स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने आगामी लोकसभा चुनाव में एक नए तरह के अभियान का प्रस्ताव रखते हुए देश के नागरिकों के नाम एक चिठ्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने जनता से अपील की है कि वह सोच—समझकर अपने मताधिकार का करे प्रयोग

आइए पढ़ते हैं जनता के नाम लिखी योगेंद्र यादव की चिट्ठी

प्रिय देशवासी,
यह चिठ्ठी नहीं एक आस है, एक आस्था है। मैं बहुत उम्मीद से आपके सामने एक प्रस्ताव रख रहा हूँ। इसलिए, चूंकि यह प्रस्ताव हम सबकी जिंदगी बदल सकता है, भारत का भाग्य बदल सकता है। इसलिए, चूंकि अभी भी देर नहीं है, लेकिन बहुत कम वक्त बचा है।

आप जानते हैं पिछले छह साल में मैं देश के कोने-कोने में घूमा हूँ, न जाने कितने नागरिकों से मिला हूँ। देश बदलने के प्रयास में धूप-छांह, ऊंच-नीच बहुत कुछ देखा है। भारत की इस खोज ने मुझे एक आस्था दी है: हमारे देश में अद्भुत ऊर्जा है। हर दिन मुझे कोई न कोई अनूठा हिंदुस्तानी मिलता है जो अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिए कुछ करने को तत्पर है, देश और दुनिया को अपनी जाति-धर्म से आगे रखने को तैयार है। लेकिन आज यह ऊर्जा बेबस है, सच्चाई के रस्ते पर चल रहा हर व्यक्ति अपने आप को अकेला महसूस करता है। समाज सुधार के संगठन दुकान बन गए हैं, पार्टियां गिरोह बन गयी हैं, विचारधाराएं दिमाग़ी कैद बन गयी हैं।

यह चिठ्ठी ऐसे ही एक अद्भुत भारतीय यानी आपके नाम है।

आज देश के सामने लोकसभा चुनाव है, लेकिन चुनने को बहुत कुछ नहीं दीखता। पिछले पांच साल में अच्छे दिन की ओर बढ़ने की बजाय हम अतीत के भूत से उलझते रहे, समस्याएं सुलझने की बजाय नयी समस्याएं खड़ी होती गयीं। जिन्हे जनता इतनी उम्मीद से सत्ता में लेकर आयी थी, वो जनता को ही नाउम्मीद करने में लगे रहे। जिन्हे विपक्ष की जिम्मेवारी मिली थी वो कोई नयी उम्मीद पैदा नहीं कर पाए। जिनसे विकल्प की उम्मीद थी वो और भी गए-गुजरे निकले। देश आगे बढ़ने को तैयार है, देशवासी अपना योगदान देने को तत्पर हैं, लेकिन न कोई नौका है, न मांझी।

ऐसे में नौका हमें बनानी होगी, पतवार हमें संभालनी होगी। इसीलिए यह चिठ्ठी लिख रहा हूँ।

पिछले चार साल में देश में दो सकारात्मक शक्तियां उभरी हैं। कई दशकों बाद देशभर के किसान एक मंच पर आये हैं। सिर्फ अपने लिए नहीं, पूरे ग्रामीण भारत के भविष्य को बचाने के लिए। दूसरी तरफ देश भर में युवा शक्ति का विस्फोट हो रहा है। नौजवान सिर्फ अपने लिए शिक्षा और रोजगार नहीं मांग रहे हैं। वो देश के नवनिर्माण में अपना योगदान देना चाहते हैं।

किसान और नौजवान भारत के भविष्य की दिशा दिखा रहे हैं। दुर्भाग्यवश इनकी दिखाई दिशा पर चलने की बजाय इनकी आवाज़ को दबाने के लिए देश को हिन्दू-मुस्लिम आग में झोंकने की तैयारी चल रही है। 2019 के चुनाव का समीकरण सीधा है: या तो किसान और नौजवान, नहीं तो हिन्दू-मुसलमान। अगर यह चुनाव किसान और नौजवान के मुद्दों पर लड़ा जाता है तो जो भी सत्ता में आएगा, देश आगे बढ़ेगा। लेकिन अगर हिन्दू-मुसलमान को लड़ाकर चुनाव होता है तो जो भी जीते, भारत हारेगा।

इसलिए मेरा यह प्रस्ताव है कि इस ऐतिहासिक चुनाव में देश के सामने असली मुद्दे और सही एजेंडा रखने के लिए एक नागरिक मंच बनाया जाय। “राष्ट्रनिर्माण के लिए लोक अभियान 2019” (अंग्रेजी में iCan19) वो मंच है जिसका आप जैसे नागरिकों को इंतज़ार था। इस अभियान के माध्यम से देश के हजारों नागरिक आने वाले चुनाव में एक सार्थक दखल दे सकेंगे। इस चुनाव में अलग-अलग पार्टियों की अपनी टीम होगी, लेकिन हम एक ‘टीम इंडिया’ बनाएंगे। इस अभियान से जुड़कर आप:

देश के असली मुद्दे चुन सकेंगे, चुनाव का एजेंडा तय कर सकेंगे।
हर समस्या का समाधान सुझा सकेंगे, बेहतर समाधान चुन सकेंगे।
देश भर में इन समस्याओं और समाधान का प्रचार कर सकेंगे ताकि उनपर चुनाव लड़ा जाय।
देश के असली मुद्दों का प्रतिनिधित्व कर सकने वाले कुछ उम्मीदवारों का चयन कर सकेंगे।
ऐसे कुछ चुनींदा उम्मीदवारों का प्रचार कर सकेंगे जो देश के सही एजेंडा के वाहक बन सकें।

इसके बदले में आपको क्या मिलेगा? कुछ नहीं। राष्ट्र सेवा कोई कैरियर नहीं है। बस सिर्फ यह संतुष्टि मिल सकती है कि हम इस संकट की घड़ी में देश के काम आये, अपने बच्चों को बता सकते हैं कि इतिहास बदलने में हमने भी अपना योगदान किया।

यह प्रस्ताव अजीब लग सकता है। मैं खुद एक पार्टी (स्वराज इंडिया) का नेतृत्व कर रहा हूँ। लोग समझते हैं कि पार्टियां चुनाव लड़ती हैं, अपने लिए वोट मांगती हैं। लेकिन स्वराज इंडिया में हम एक नयी तरह की राजनीति करने के लिए आये हैं। लोग देशसेवा के नाम पर राजनीति करते हैं, हम राजनीति के नाम पर देशसेवा कर रहे हैं। हम iCan की शुरुआत कर रहे हैं लेकिन हम इसपर कब्ज़ा नहीं करना चाहते।

इस अभियान से जुड़ने के लिए आपको स्वराज इंडिया से कोई सम्बन्ध रखने की जरूरत नहीं है। इस अभियान के मुद्दे, समाधान और उम्मीदवार, कुछ भी स्वराज इंडिया द्वारा नहीं चुना जायेगा। मेरी उम्मीद है कि जल्द ही iCan19 में वे सभी नागरिक, संगठन, आंदोलन और पार्टियां जुड़ेंगे जो देशहित को निजी और सांगठनिक हित से ऊपर मानते हैं। हम सब मिलकर इस अभियान के सभी फैसले लेंगे।

मुझे आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा। उम्मीद है आप मेरी आस्था को डिगने नहीं देंगे। उम्मीद है जल्द ही आपसे मुलाकात होगी। उम्मीद है आने वाले महीनों में आपके साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा, शायद दूर तक हमसफ़र होने का भी!

आपका एक और भारतवासी,
योगेंद्र यादव


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