Last Update On : 25 02 2018 09:04:00 PM

यहां गृहयुद्ध के हालात 7 सालों से बने हुए हैं। एक हफ्ते पहले सीरिया सरकार ने ही क्षेत्र विशेष यानी दइेश की राजधानी दमिश्क के बाहर को निशाना बनाते हुए बमबारी शुरू की थी…

पिछले एक हफ्ते से सीरिया भीषण हिंसा की आग में जल रहा है, जिसमें अब तक 500 से भी ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। मरने वालों में 150 से भी ज्यादा बच्चे शामिल हैं। हालांकि यहां गृहयुद्ध का माहौल तो पिछले 7 सालों से बना हुआ है, जब लोगों ने बेरोजगारी, भ्रष्‍टाचार और असद सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी थी, तो असद सरकार ने उन्हें कुचलना शुरू कर दिया था। इसमें अब तक लाखों लोग मारे जा चुके हैं, जिसमें असंख्य बच्चे भी शामिल हैं।

सीरियन ऑब्जेवेटी फोर ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक सीरिया 18 फरवरी से भीषण हिंसा की आग में जल रहा है। हालांकि यहां गृहयुद्ध के हालात 7 सालों से बने हुए हैं। एक हफ्ते पहले यहां की सरकार ने ही क्षेत्र विशेष यानी दइेश की राजधानी दमिश्क के बाहर को निशाना बनाते हुए बमबारी शुरू की थी।

सीरियन आॅब्जेवेटी के अनुसार ब्रिटेन के इस संस्थान ने बताया कि रविवार को हुए हवाई हमले में लगभग 29 नागरिकों की मौत हो हुई, जिसमें से 17 की मौत सिर्फ डौमा शहर में हुई।

मीडिया में आ रही रिपोर्टों के मुताबिक यहां हिंसा इतने बड़े पैमाने पर इसलिए बढ़ी है क्योंकि क्योंकि संयुक्त राष्ट्र ने संघर्षविराम पर मतदान में फिर से देरी कर दी। सीरियन ऑब्जेवेटी फोर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक सीरिया और रूसी सैन्यबल इन हमलों को अंजाम दे रहा है।

हालांकि रूस ने पूर्वी घोटा में बमबारी में अपनी सीधी संलिप्तता से साफ—साफ इंकार किया है। रूस का कहना है कि वह 2015 में सीरिया प्रशासन के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप करते हुए यहां उतरा था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद महीनेभर के संघर्षविराम के लिए बीते शुक्रवार को मतदान करने वाली थी, मगर ऐसा नहीं होने के बाद यहां हिंसा और ज्यादा बढ़ी है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सीरिया में 30 दिवसीय संघर्षविराम के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। 15 सदस्यीय परिषद ने बीते शनिवार को सीरिया के प्रभावित इलाके में सहायता पहुंचाने और मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराने के पक्ष में वोट किया था।

पहले सीरिया की राजधानी दमिश्क के पास विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके पूर्वी गूता में बमबारी शुरू हुई थी, लेकिन कार्यकर्ताओं का कहना है कि समझौते के बाद भी हवाई हमले जारी हैं। गौरतलब है कि सीरियाई सरकार का समर्थक देश रूस इस प्रस्ताव में संशोधन की मांग कर रहा था, जिस पर पश्चिमी देशों के राजनयिकों ने उन पर समय बर्बाद करने का आरोप लगाया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निकी हेली ने संर्घषविराम को तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा था, लेकिन साथ में सीरिया द्वारा संघर्षविराम को लागू करने पर आशंका भी जता दी थी।

सीरिया का घोउटा शहर विद्रोहियों का आखिरी गढ़ माना जाता है। घोउटा में की आबादी लगभग 4 लाख है जिनमें से सैकड़ों बीमार हैं। बावजूद इसके सरकार ने इन लोगों के शहर से बाहर जाने पर पाबंदी लगाई हुई है। इन हमलों के बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने घोउटा को धरती का नरक कहा है। घोउटा को निशाना बनाकर असद सरकार विद्रोहियों को आत्‍मसमर्पण करने को मजबूर करना चाहती है। पिछले तीन महीनों में यहां 1200 से भी ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

क्या हैं सीरिया में गृहयुद्ध के कारण
सीरिया के राष्‍ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ तकरीबन सात साल पहले विरोध की शुरुआत हुई थी। यह विरोध अरब देशों में चल रही अरब स्प्रिंग के तहत था। लोगों का यह विरोध बेरोजगारी, भ्रष्‍टाचार और असद सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ था, लोगों के विरोध का तरीका हिंसक नहीं था। सबसे पहले विरोध की आवाज डेरा शहर के लोगों ने उठाई, सरकार ने इसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जिसके बाद विरोधियों ने भी हथियार उठा लिये। असद ने विरोध कर रही जनता को चुप कराने के लिए उन्हें विदेशी आतंकवादी बताया। हिंसा बढ़ने के बाद अब तक इन सात सालों में यहां तीन लाख लोग मारे जा चुके हैं। यहां तक कि देश के कई बड़े शहर जमींदोज हो चुके हैं। लाखों लोग देश छोड़कर जा चुके हैं। हालांकि इस गृहयुद्ध में कई विदेशी ताकतें भी शामिल हैं। अमेरिका और तुर्की जहां असद विद्रोहियों का साथ दे रहा है, वहीं रूस असद के साथ कदमताल कर रहा है।

युद्ध के हालातों से गुजर रहे देश में आसमानी चरम पर पहुंच चुकी है। घोउटा शहर तो पिछले चार सालों से सैनिकों से घिरा हुआ है। गुप्‍त सुरंगों के जरिए सामान लाया जाता है। इस इलाके में कैमिकल हमले भी किए गए हैं।