Last Update On : 02 02 2018 09:16:00 PM

151 पदों पर महिलाओं को नियुक्त किया जाना चाहिए था, मगर नियुक्त की गईं मात्र 72 महिलाएं। बचे हुए 79 पदों पर पुरुषों को तमाम नियम—कानूनों को दरकिनार कर और तिकड़म भिड़ाकर नियुक्त कर दिया गया…

लखनऊ। महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर तमाम तिकड़म भिड़ाकर और नियम—कानूनों को दरकिनार कर पुरुषों को नियुक्ति दी गई। वह भी किसी एक पद पर नहीं पूरे 79 पदों पर महिलाओं के बजाय पुरुषों को नौकरी दे दी गई।

हालांकि अब उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने गठन के बाद हुई अपनी पहली बैठक में वर्ष 2015 में अवर अभियंता और तकनीकी सामान्य चयन में धांधली कर महिलाओं के लिए आरक्षित 79 पदों पर पुरुषों को दी गई नौकरी को निरस्त करने का निर्णय लिया है।

आयोग का कहना है कि वह धांधली से महिलाओं के स्थान पर नौकरी पाने वाले पुरुषों की सेवाएं खत्म किए जाने को लेकर संबंधित विभागों को पत्र लिखेगा। आयोग के अध्यक्ष सीबी पालीवाल के मुताबिक इन पदों के अलावा दस अन्य पदों पर हुई धांधली की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा।

यह कारनामा हुआ था उत्तर प्रदेश में। गौरतलब है कि वर्ष 2015 में अवर अभियंता व तकनीकी सामान्य चयन के 757 पदों के लिए नौकरियां निकली थीं। इनमें से 20 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित थे। यानी 151 पदों पर महिलाओं को नियुक्त किया जाना चाहिए था, मगर नियुक्त की गईं मात्र 72 महिलाएं। जबकि बचे हुए 79 पदों पर पुरुषों को तमाम नियम—कानूनों को दरकिनार कर और तिकड़म भिड़ाकर नियुक्त कर दिया गया।

गौरतलब है कि हाल ही में सीबी पालीवाल को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उन्होंने आयोग के सदस्यों की पहली बैठक लेते हुए 31 जनवरी को भर्तियों के अलावा कई अन्य प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि नियुक्ति में हुई गड़बड़ियों के लिए जल्द ही एक कमेटी गठित की जाएगी, जो इसकी जांच करेगी।

सीबी पालीवाल ने नियुक्तियों में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन देते हुए कहा कि फरवरी के आखिरी हफ्ते में भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला जाएगा, जिसके लिए सिर्फ आॅनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।

गौरतलब है कि सतर्कता विभाग द्वारा 23,000 पदों पर भर्तियों की जो जांच की जा रही है, उसे जल्द पूरा कराने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखने की बात भी आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष ने कही।