Last Update On : 17 11 2017 10:05:00 PM

कहा जल्द से जल्द चली जाए मायके, तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की उड़ रहीं खुलेआम धज्जियां, पीड़िता ने शासन—प्रशासन से की न्याय की मांग

सीतामढ़ी, बिहार। सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को त्वरित तीन तलाक को पूर्ण प्रतिबंधित करने का आदेश पारित किया था, कहा था कि जो इसे नहीं मानेगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मगर देश में भी अदालत के इस फैसले का दिल से स्वागत किया गया और माना गया कि अदालत का यह फैसला मुस्लिम महिलाओं के वैवाहिक रिश्ते में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। अब मुस्लिम महिलाओं को किसी भी वक्त तलाकशुदा होने की ‘अनहोनी’ के मानसिक दबाव में नहीं जीना पड़ेगा।

मगर सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की धज्जियां उड़ती खुलेआम देखी जा सकती हैं। सितंबर में कोर्ट के फैसले के एक महीने के भीतर ही 19 सितंबर को राजस्थान में पति द्वारा पत्नी को मोबाइल पर तलाक देने की घटना सामने आई थी। इसके अलावा भी और कई फोन, वाट्सअप, इंटरनेट पर तलाक के मामले सामने आ चुके हैं। अब बिहार के सीतामढ़ी जनपद के नानपुर प्रखंड के गाव धनकौल की रफत तरन्नुम को उसके शौहर आरिफ द्वारा इंटरनेट कॉल से तलाक देने का मामला सामने आया है।

गौरतलब है कि धनकौल गांव की रफत तरन्नुम की शादी गांव के ही आरिफ जया से 7 साल पहले हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही आरिफ के परिजन रफत के घरवालों से दहेज की मांग करने लगे। जब दो साल तक रफत को कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ तो उसे बच्चे के नाम पर सताया जाने लगा।

इसी सबके बीच आरिफ नौकरी के लिए सऊदी चला गया और वहीं से पिछले महीने 18 अक्तूबर को रफत को इंटरनेट कॉल पर तलाक दे दिया। हालांकि इस मामले में गांव में पंचायत में मामला निपटाने की कोशिश की गई, मगर जब आरिफ के घरवालों ने भी बहू का साथ नहीं दिया तो पीड़िता ने नानपुर थाने पहुंच पुलिस में शिकायत दर्ज कर न्याय की अपील की है।

पीड़िता तरन्नुम कहती है, पहले तो मुझे इस बात का यकीन ही नहीं हुआ कि मुझे मेरे शौहर ने फोन पर तलाक देकर मायके जाने का आदेश सुनाया है, मगर जब पंचायत के हस्तक्षेप के बाद भी रफत और उसके घरवाले मुझे अपनाने को तैयार नहीं हुए तो मैं अवाक रह गई। मैं अपनी शादी बचाना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि शासन—प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर मुझे न्याय दिलाए।’

तरन्नुम की मां कहती है, मैं सिर्फ इसी बेटी के मामले में पीड़ित नहीं हूं। मेरी दूसरी बेटी को भी दहेज की मांग पूरी न हो पाने पर तलाक दे दिया गया था।’