Last Update On : 15 01 2018 04:23:00 PM

उच्च शिक्षा बचाओ समिति ने कहा फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षकों प्रिंसिपलों, मैनेजमेंट और पैनल में शामिल शिक्षकों के विरुद्ध बिना देरी के हो एफआईआर…

लखनऊ, जनज्वार। उच्च शिक्षा बचाओ समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्य परीक्षा-2018 के पूर्व स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों एवं स्ववित्तपोषित कॉलेजों की SIT जांच की मांग की है। साथ ही कहा है कि अनुमोदन फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षकों, प्राचार्यों, प्रबंधकों एवं पैनल में शामिल शिक्षकों के विरुद्ध अविलम्ब एफआईआर दर्ज की जाए।

एक पत्र के माध्यम से उच्च शिक्षा बचाओ समिति के अध्यक्ष राकेश सिंह ने प्रदेश के महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री सहित निदेशक उच्च शिक्षा इलाहाबाद, समस्त क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों एवं सभी विश्वविद्यालय कुलपतियों और कुलसचिवों को पत्र भेजकर अपनी यह मांग रखी है।

समिति का कहना है आगरा विश्वविद्यालय आगरा, अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद, मेरठ विश्वविद्यालय मेरठ एवं बरेली विश्वविद्यालय बरेली में आए दिन सम्बद्ध महाविद्यालयों में भ्रष्टाचार, शोषण व शिक्षक अनुमोदन फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है। प्रदेश की उच्च शिक्षा आज जबावदेह अधिकारियों की उदासीनता व प्रश्रय एवं लिफाफा प्रवृत्ति के कारण अनियमितता, शोषण, उत्पीड़न, भ्रष्टाचार एवं शिक्षक अनुमोदन फर्जीवाड़े की धुरी बन चुकी है।

इसमें विश्वविद्यालयों के जबावदेह अधिकारियों—कर्मचारियों के साथ साथ स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्राचार्य व प्रबंधन की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। विश्वविद्यालय परिक्षेत्र के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों व स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबन्धन द्वारा की जाने वाली यह अनियमितता, भ्रष्टाचार, शोषण और शिक्षक अनुमोदन फर्जीवाड़ा बिना सरकार के जबावदेह अधिकारियों के संभव नहीं है।

समिति का कहना है कि कुलाधिपति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश एवं उच्च शिक्षा मंत्री के आदेश और विश्वविद्यालयों के बारंबार पत्राचार के बावजूद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों द्वारा अनुमोदित शिक्षकों का आधार सहित विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

इसलिए समिति ने मांग की है कि अनुमोदित शिक्षकों का आधार सहित विवरण अभी तक उपलब्ध न कराने वाले महाविद्यालयों को तत्काल प्रभाव से मुख्य परीक्षा-2018 से वंचित किया जाए।

जिन महाविद्यालयों शिक्षक व अवस्थापना सम्बन्धी सुविधाएं मानक के अनुरूप न हो, उनकी सम्बद्धता को निरस्त किया जाए। विश्वविद्यालय स्तर पर एसआईटी जांच करवाकर शिक्षक अनुमोदन फर्जीवाड़े के दोषी अनुमोदित शिक्षकों, प्राचार्यों प्रबन्धकों एवं एक्सपर्ट पैनल में शामिल स्थाई शिक्षकों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करायी जाए।

अनुमोदित शिक्षकों के वेतन एवं कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के सन्दर्भ में शासनादेश व विश्वविद्यालय के आदेशों का अनुपालन न करने के लिए दोषी महाविद्यालयों का आॅडिट करवा प्रिंसिपल और मैनेजमेंट के विरूद्ध आयकर अधिनियम व वित्तीय अनियमितता का मामला दर्ज करवाया जाए।

विश्वविद्यालय से सम्बद्ध समस्त अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित अनुमोदित शिक्षकों एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के अनुमोदित शिक्षकों का मुख्य परीक्षा-2018 से पहले परिक्षेत्र के जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों की निगरानी में भौतिक सत्यापन करवाया जाय।

समिति का कहना है कि अगर इन सब बातों को मद्देनजर रखा जाएगा तो उच्च शिक्षा को भ्रष्टाचार, अनियमितता व शिक्षक अनुमोदन फर्जीवाड़े से मुक्त करवाया जा सकता है। इससे उच्च शिक्षा के साथ—साथ निदेशक, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, कुलपति व कुलसचिव पद की गरिमा और विश्वविद्यालय का सम्मान भी सुरक्षित रह सके।