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पकौड़ी बेचने को रोजगार बताने के बाद चर्चा में आए प्रधानमंत्री मोदी खुद चाय बेच चुके हैं, ऐसे में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का चाय—पकौड़ी में 68 लाख खर्च करना प्रधानमंत्री की योजना का हिस्सा जान पड़ता है, कोई पैसे की बर्बादी नहीं…

जनज्वार, देहरादून। आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया ने एक आरटीआई दाखिल कर पूछा था कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के ने जबसे पद संभाला है, उसके बाद चाय—पानी में कितना खर्च हुआ है।

आरटीआई के जवाब में उत्तराखंड सचिवालय प्रशासन जानकारी भेजी। सचिवालय से मिली जानकारी से पता चला कि मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण 18 मार्च 2017 के बाद से 22 जनवरी 2018 तक उन्होंने मेहमानों के चाय—पानी पर 68 लाख 59 हजार 865 रुपए खर्च किए हैं।

सरकार ने यह जानकारी नैनीताल के आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया के आरटीआई के जवाब दिया है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिसे देश में करोड़ों लोग दो जून की भरपेट रोटी नहीं खा सकते, रोज अपने बच्चों को एक कप दूध नहीं मुहैया करा सकते, उन्हीं लोगों की बदौलत अपना खर्चा वाले ये प्रतिनिधि और उनके आका लाखों—करोड़ों की चाय मेहमान नवाजी में फूंक डालते हैं।

वर्ष 2016 में उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार के बारे में खुलासा हुआ था कि उसने अपने मंत्रियों के चाय—नास्ते पर चार सालों में 9 करोड़ रुपए का खर्च किया था।

सचिवालय द्वारा चाय—पानी के खर्चे का जवाब