Last Update On : 12 10 2018 08:58:44 PM

उत्तराखण्ड सरकार को हाईकोर्ट ने कहा खाद्य आपूर्ति शीतकाल भर रखे जारी, भारत तिब्बत सीमा पुलिस के साथ समन्वय बनाकर आदेश का कराए पालन…

नैनीताल, जनज्वार। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को दैनिक आवश्यक की चीजों को 24 घंटे में मुहैया कराने के निर्देश सरकार को दिए हैं। साथ ही सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह सीमावर्ती गावों में भारत तिब्बत सीमा पुलिस के साथ समन्वय बनाकर इस आदेश का पालन कराए। साथ ही वायु सेना की मदद भी लें।

घटनाक्रम के मुताबिक धारचूला निवासी महेंद्र सिंह बुदियाल ने जनहित याचिका दायर कर न्यायालय से कहा था कि पिथौरागढ़ जिले के लमारी, बुंदी, गुंजी, चैयालेख, गर्ब्यांग नपलच्यु नाबी, रोगकोंग, कुटी, कालापानी और नाभीढांग गावों की आबादी लगभग नौ हजार है। इस क्षेत्र में कोई सड़क नहीं है, जबकि इन क्षेत्रों को केवल पगडंडियां ही आपस में जोड़ती हैं और यहां जाने का एकमात्र रास्ता यही है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि वर्ष 1999 से 2000 के बीच केंद्र सरकार ने सीमांत क्षेत्रों में सड़कों के महत्व को देखते हुए घटियाबागढ़ से लिपुलेख तक चार किलोमीटर मोटर मार्ग का प्रस्ताव स्वीकृत किया था, जिसे बीआरओ द्वारा संचालित कराना था जो अभी तक लंबित है। वहां हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गई थी, लेकिन उसका किराया 3100 रुपया प्रति व्यक्ति था जो बहुत ज्यादा था और उसे भी बिना किसी नोटिस के बन्द कर दिया गया।

याची ने न्यायालय को यह भी बताया कि संचार और हेलीकॉप्टर सेवा के अभाव में उनके क्षेत्र में अब खाद्य सामग्री और दूसरे रोजमर्रा के जरूरी सामान भी समाप्त हो गए हैं। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को निर्देश दिए है कि उस क्षेत्र के लोगों को 24 घंटे के भीतर घी, गेहूं, धान, आटा, सब्जी, मसाले, माचिस, पाउडर दूध, कंबल और मिट्टी का तेल मुहैया कराया जाए।

खण्डपीठ ने इस आपूर्ति को शीतकाल भर जारी रखने को कहा है। खण्डपीठ ने मुख्य सचिव को भारतीय वायु सेना से संपर्क कर इस आदेश का अनुपालन करने में मदद लेने को भी कहा है। साथ ही विपक्षीगणों को दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र देने का निर्देश भी जारी किया गया है।