Last Update On : 07 05 2018 01:09:00 PM

उत्तराखण्ड भाजपा सरकार में विधायक महोदय जब भी गुस्से में होते हैं, उसे प्रकट करने के लिए मां-बहन की गालियों का ही इस्तेमाल करते हैं, किसी की भी मां-बहन को गाली कैसे दे सकते हैं? किसने दिया यह अधिकार आपको…

विधायक राजकुमार ठुकराल से पत्रकार रूपेश कुमार सिंह के दोटूक सवाल

आदरणीय विधायक राजकुमार ठुकराल जी! कल किच्छा रोड पर टोल प्लाजा में जो तांडव आपने और आपके अराजक कार्यकर्ताओं ने मचाया, वो आपके व्यवहार का पुराना गुण है।

न जाने कितनी बार आप मर्यादा, शिष्टाचार, कानून और लोक-लाज को ताक पर रख चुके हो, इसलिए आपकी बदतमीज़ी, हाथापाई, गाली-गलौज, फासीवादी हरकतों को आज सुबह अखबार में पढ़कर कोई आश्चर्य नहीं हुआ।

तमाम मामलों को भाजपा दरकिनार करती रही है, लेकिन जनता सब कुछ देख रही है। जिस दिन वो अपना फैसला सुनाएगी, तब आपके पास मलाल करने से ज्यादा कुछ नहीं बचेगा।

विधायक जी आप इतना बेलगाम क्यों हुए जाते हैं? जनता ने 2022 तक आपको अपना मत दिया है। इसी रूद्रपुर ने इतिहास बदला है। हो सकता है कि कल आप भी इतिहास बन जायें। इसलिए घमंड लाजिमी नहीं है।

एक पत्रकार होने के नाते मैं इस पोस्ट के माध्यम से आपसे कुछ सवाल करना चाहता हूं। उम्मीद कम है कि आप जवाब देंगे। लेकिन फिर भी मैं अपना काम तो करूंगा ही।

आपने सार्वजनिक तौर पर मां-बहन की गाली देकर समस्त महिला समाज का अपमान नहीं किया है?

आप जब भी गुस्से में होते हैं, तब आप उसे प्रकट करने के लिए मां-बहन की गालियों का ही इस्तेमाल करते हैं, आप किसी की भी मां-बहन को गाली कैसे दे सकते हैं? किसने दिया यह अधिकार आपको?

आपके कार्यकर्ता टोल चेम्बर में बैठे कर्मचारी को बाहर निकालने के लिए जिस बर्ताव को कर रहे हैं, वो जायज है?

टोल के कर्मचारियों, पुलिस के जवान- अधिकारी व एस डी एम से धक्कामुक्की, हाथापाई व गाली-गलौज करना जायज है?

ऐसा करने से सरकारी मिशनरी की साख और कर्मचारियों का मनोबल नहीं गिरेगा?

देश में थाना, कोर्ट-कचहरी और पूरी संवैधानिक व्यवस्था और संस्थाएँ हैं, विरोध का कोई और तरीका नहीं हो सकता था क्या?

—यदि सभी मामलों का फैसला आपको सड़क पर ही करना है तो सारी प्रशासनिक व न्यायिक संस्थाओं पर ताला जड़ दो?

—अपनी ही सरकार के खिलाफ अराजक प्रदर्शन करके आप स्वयं अपनी सरकार व पार्टी की छवि धूमिल नहीं कर रहे हैं?

—समय-समय पर इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने के पीछे आपका मकसद क्षेत्र में भय बनाये रखने का तो नहीं है?

—आप जिलाधिकारी, कमीश्नर से क्यों नहीं मिले, इस मामले में?

—हाईकोर्ट में भी समस्या को दर्ज कराया जा सकता था, वहां क्यों नहीं गये आप?

—इस तरह की ओछी हरकतें अखबार और चर्चाओं में बने रहने के लिए तो नहीं?

—एन एच का काम जमीन घोटाले के कारण रूका हुआ है, आपकी सरकार है, उसे हल क्यों नहीं करा देते?