Last Update On : 24 04 2018 10:31:00 AM

अभिषेक के फॉलोवर्स हैं कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा के बड़े नेता

भाजपा के प्रमुख आनुशांगिक संगठन विश्व हिंदू परिषद के आईटी सेल के संस्थापक अभिषेक मिश्रा ने सिर्फ इसलिए ओला कैब की बुकिंग कैंसिल कर दी क्योंकि उसका ड्राइवर एक मुस्लिम था। अपने इस कृत्य पर बजाय शर्मिंदा होने के अभिषेक डंके की चोट पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ऐलान करता है कि ‘मैंने ओला कैब कैंसिल कर दी, क्योंकि मैं जिहादी को अपना पैसा नहीं देना चाहता।’ यही मैसेज उसने राइड कैंसिल करने का ओला को भेजा।

ऐसे में सवाल है कि असल जिहादी कौन है और कौन सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रहा है। क्या वो ड्राइवर मुस्लिम होने की वजह से हिंदू सवारियों की राइड कैंसिल करता था, यह मसला सीधे—सीधे अमानवीयता और हिंदू कट्टरता से जुड़ा है। क्यों नहीं मोदी सरकार उसपर कोई कार्रवाई करती है, जो कि सीधे—सीधे सांप्रदायिकता को हवा देने का काम कर रहा है।

उल्टा आश्चर्य की बात तो यह है कि इन अभिषेक मिश्रा को ट्वीटर पर फॉलो करने वाले में बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री तक शामिल हैं। अभिषेक के फॉलोवर्स में केंद्रीय शिक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, धर्मेंद्र प्रधान और संस्कृति मंत्री महेश शर्मा जैसे कई बड़े नाम भी शामिल हैं।

अभिषेक के फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार वह अयोध्या का रहने वाला है। लखनऊ में आईटी प्रोफेशनल के तौर पर काम करने वाले अभिषेक का प्रोफाइल कहता है कि वह विश्व हिंदू परिषद के आईटी सेल में भी काम करता है और विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल का सक्रिय सदस्य है। यह दोनों ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े संगठन हैं।

सोशल मीडिया पर अभिषेक की ज्यादातर पोस्टें सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाली हैं। हालांकि सिर्फ मुस्लिम होने के चलते कैब कैंसिल करने के उसके निर्णय पर जहां संघ मानसिकता के लोग उसके पक्ष में कमेंट कर रहे हैं, वहीं कुछ लोगों ने सांप्रदायिकता को हवा देने के लिए उसका विरोध करना भी शुरू कर दिया है।

@ Desi Gooner ने ट्वीट किया है, भाई तो मोदी से बोलकर अरब देशों से तेल आयात करना बंद करवा दो। हिंदू गाड़ी होंगी, लेकिन मुस्लिम पेट्रोल। गौ मूत्र से चलाना ज्यादा उचित होगा, जय हिंद।

@Abdullah khan Nadwi कहते हैं, विहिप के अभिषेक मिश्रा ने कैब का ड्राइवर मुस्लिम होने पर बुकिंग कैंसिल की। देखना है डीजल, पेट्रोल का बहिष्कार अभिषेक कबसे करेगा।

सोशल मीडिया पर अभिषेक कठुआ में बलात्कारियों का पक्ष लेते भी दिखे हैं। दैनिक जागरण की खबर को शेयर करते हुए लिखा है, ‘भारत एवं भारत से बाहर, कठुआ की घटना को रेप के रूप में प्रस्तुत कर हिंदुओं को बदनाम करने वाले पत्रकारों को सार्वजनिक माफ़ी मांगनी चाहिए, अगर वह स्वयं को जिम्मेदार पत्रकार मानते हैं तो।’

सबसे ज्यादा आश्चर्य तो अभिषेक की उस पोस्ट पर होता है जब खुद को आईटी प्रोफेशनल कहने वाला बंदा कहता है कि ‘मुझे कोई संदेह नहीं की महाभारत के काल में हमारे देश में इंटरनेट नहीं था और अगर जिन्हें संदेह है वो सिद्ध कर के दिखाये की इंटरनेट नहीं था। हमारा भारत, विज्ञान से संपन्न था लेकिन छद्म बुद्दिजीवियों ने भारत को ज्ञान का भंडार ना मान कर विदेशियों को हम से अधिक विद्वान माना।’