Last Update On : 18 04 2018 06:31:35 PM

20 हजार की मांग पर थमा रहे हैं बैंक 5 हजार, आम जनता को मोदी राज ने कर दिया है तबाह, देश का नहीं आम लोगों की प्राइवेसी और पैसों का चौकीदार बन गए हैं मोदी

आरबीआई ने दिया बयान चुनाव के लिए नेतागण करने लगे हैं पैसे इकट्ठा, जिससे पैदा हो रहे नोटबंदी जैसे हालात  

जनज्वार, दिल्ली। एक बार फिर देश के कई हिस्सों में नोटबंदी जैसे हालात पैदा हो गए हैं। लोगों में इन हालातों के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है। दिन—ब—दिन बैंक में जमा अपने ही पैसों को निकालने के लिए आमजन को जिन कठिनाइयों से जूझना पड़ रहा है और नियम जितने सख्त कर दिए गए हैं, आम जनता ने कहना शुरू कर दिया है कि मोदी हमारा पैसा नीरव मोदी, मालिया जैसे भगौड़ों के लिए हमसे छीन रहे हैं।

पिछले एक हफ्ते से देशभर के अलग—अलग हिस्सों में आम जनता कैश की भारी कमी से जूझ रही है, क्योंकि न एटीएम से कैश मिल रहा है और न ही बैंक। कहा जा रहा है कि हालात ठीक वैसे ही बनने लग हैं जैसे 8 नवंबर 2016 को लागू की गई नोटबंदी के बाद बने थे।

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मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक कैशलेस एटीएम और बैंकों पर आरबीआई ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। आरबीआई ने कहा है कि चुनाव के लिए रुपये को जमा किया जा रहा है, इसके कारण निकासी ज्यादा की जा रही है, जिससे देश में नोटबंदी जैसे हालात हो रहे हैं।

एक बार फिर कैश के लिए बैंकों और एटीएम की लाइन में लगकर आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि फिलहाल देश में अघोषित नोटबंदी जैसे हालात हो गए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से एटीएम और बैंक में पर्याप्त कैश न होने के कारण खासा परेशानियों से आम जनता जूझ रही है।

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ख्यात कार्टूनिस्ट कैशलेस एटीएम पर कमेंट करते हैं, क्या नोटबंदी पार्ट 2 शुरू हो गई है। कैशलेस पेमेंट के लिए बोला था या कैशलेस एटीएम के लिए….

गौरतलब है कि बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बीते कई दिनों से लोगों को कैश न मिलने की छिटपुट खबरें मीडिया में आ रही थीं, मगर हालात अब और ज्यादा बिगड़ने लगे तो यह मुद्दा भी बड़ा बन गया है। अपने ही पैसे निकालने के लिए कामकाज छोड़ लोगों को एटीएम के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

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न सिर्फ उपरोक्त राज्यों बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर में भी लोगों को एटीएम में कैश न मिलने के कारण खासी दिक्कते आ रही है। कहा जा रहा है कि गुड़गांव के 80 प्रतिशत एटीएम कैशलेस हो गए हैं।

आरबीआई का कहना है कि नोटबंदी के बाद बाजार में नगदी की आई कमी के बाद लगभग 5 लाख करोड़ रुपए के 2000 के नोट जारी किए गए थे और ये नोट प्रचलन में थे, स्थिति सुधर भी गई थी, मगर जो हालात हैं वो ठीक नहीं हैं।

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में भी हालात बदतर हैं। लोग गुस्से में हैं, कह रहे हैं हमने जरूरत के लिए बैंक में पैसा रखा है और उसे ही नहीं निकाल पा रहे हैं तो क्या फायदा ऐसी व्यवस्था का। हैदराबाद में ज्यादातर एटीएम खाली पड़े हैं, यही हाल बैंकों का है।

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उत्तर प्रदेश के बनारस को देखकर तो यह लग रहा है कि दोबारा नोटबंदी लागू हो गई है। लंका चौराहे पर दुकानदार मिथिलेश कहते हैं समझ नहीं आ रहा कि मोदी जी के राज में यह कैसी समस्या शुरू हो गई है, आए दिन कोई न कोई ड्रामा लगा रहता है। लोगों को बच्चों के एडमिशन के लिए और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए पैसा नहीं मिल पा रहे हैं। लंबी कतार में भी खड़े होने के बाद हालात खराब हैं।

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी एटीएम से पैसे न निकलने से जनता परेशान है। वहां पिछले 2 हफ्तों से ऐसी स्थिति बनी हुई है। शहर भर के एटीएम के चक्कर लगाने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे जरूरतमंद लोग रूआंसे हो रहे हैं।

कैशलेस एटीएम की समस्या इसलिए भी विकराल लग रही है क्योंकि बैंकों में भी पैसा नहीं हैं। बेटी के एडमिशन और स्कूल यूनिफॉर्म, किताबों के लिए अखिलेश को 20 हजार रुपए की जरूरत थी, तो वो अपने बैंक पहुंचे, मगर बैंक ने यह कहते हुए सिर्फ 5 हजार रुपए थमाए कि कैश नहीं है।

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बैंक मैनेजरों कह रहे हैं कि जब उन्हें ही पूरे दिन भर बैंक मात्र 2 लाख रुपए में चलाना पड़ रहा है तो वो किसी एक व्यक्ति को 20 हजार कैश कैसे दे दें। नोटबंदी जैसे हालातों से बैंककर्मी भी सहमे और डरे हुए हैं। क्योंकि पैसा न दे पाने की स्थिति में सबसे पहले ग्राहकों के गुस्से का शिकार वही होते हैं।

इन हालातों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसी की साजिश करार देते हैं। कहते हैं 16.5 लाख करोड़ नोट छापे गए हैं और मार्केट में पहुंच चुके हैं, लेकिन 2000 के नोट कहां जा रहे हैं? कौन लोग नकदी संकट जैसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं? समस्या उत्पन्न करने की साजिश चल रही है और राज्य सरकार इसके बारे में सख्त कदम उठाएगी, हम केंद्र सरकार के संपर्क में भी हैं।

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