व्यवस्था की लाश : ओडिशा के बौद्ध जिले की यह तस्वीर। डायरिया से हुई मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले जाता परिजन

यह साईकिल नहीं 70 साल के लूटतंत्र की अर्थी है और इसका ​जल्दी से जल्दी जमींदोज होना ही जनहित में है…

जनज्वार। पहले भी कई बार ऐसी भयावह तस्वीरें हमलोग देखते हैं जो साबित करती हैं कि सरकारें कितनी बेवजह और बेमलब तौर पर शासन करती हैं और वह बुनियादी तौर पर जन जरूरतों के लिए किसी काम की नहीं रह गयी हैं।

जो तस्वीर आपको दिख रही है वह ओडिशा के बौद्ध जिले की है। इस तस्वीर को सबसे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के ओडिशा के बौध जिला महासचिव और जिला परिषद सदस्य अबकाश साहू ने साझा की। अबकाश ने अपनी यह पोस्ट पोस्ट ​उड़िया में लिखी जिसे अंग्रेजी में बरहामपुर के वामपंथी कार्यकर्ता भालचंद्र सदांगी ने अनूदित किया है।

भालचंद्र सदांगी पोस्ट शेयर करते हुए बताते हैं कि इसके बारे में उन्हें अबकाश साहू ने बताया। घटना ओडिशा के बौध जिले करुसनापल्ली गांव के पंचायत ब्रम्हानपल्ली और ब्लॉक कंटमाल की है। यह गांव ओडिशा विधानसभा के स्पीकर प्रदीप कुमार अमाट का भी गांव है। ओडिशा सराकर के पूर्व वित्त मंत्री और विधानसभा के मौजूदा स्पीकर प्रदीप कुमार अमाट बौद्ध विधानसभा सीट से चार बार से विधायक हैं।

सदांगी बताते हैं कि फोटो में दिख रही औरत मर चुकी है और उसे जिस आदमी ने साईकिल पर लादा हुआ है वह उसका जेठ है यानी वह उसके भाई की पत्नी है। महिला की मौत डायरिया से हुई है। तस्वीर में दिख रहे आदमी की पत्नी और उसके भाई की बीवी एक साथ डायरिया पीड़ित होने पर एक साथ अस्पताल में भर्ती हुए थे। ईलाज के दौरान भाई की पत्नी की मौत हो गयी, जबकि साईकिल चालक की पत्नी की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

सदांगी कहते हैं कि इस व्यवस्था की अमानवीयता की यह तस्वीर साबित करती है कि ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार पूरे तौर पर जनविरोधी हो चुकी है। दूसरी बात ये कि यह कैसी आजादी है कि सत्तर साल बाद कोई सामान्य से डायरिया रोग मर जाता है।