प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा आरएसएस-भाजपा, मोदी—योगी दे रहे हैं मनुवादी सिद्धांत को बढ़ावा, ये करते हैं कठुआ व उन्नाव के बलात्कारियों की रक्षा, बीएचयू छात्राओं पर हमले, दलितों व पिछड़ों के आरक्षण के हक पर रहे हैं हमलावर और साम्प्रदायिक दंगे कराकर मुसलमानों की लेते रहते हैं जान….

जनज्वार। महिलाओं की बराबरी, पितृसत्ता का विरोध, महिलाओं को दोयम दर्जे में रखने वाली मनुवादी सोच का विरोध करते हुए प्रगतिशील महिला संगठन ने आज 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर इलाहाबाद के घूरपुर और कौशाम्बी के चायल में प्रदर्शन किया।

हवा में मुट्ठी बांध, झंडे लहराते हुए प्रदर्शन करती महिलाओं ने अपनी कई मांगें शासन—प्रशासन के सामने रखीं। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने यौन उत्पीड़न में प्रभावी सजा सुनिश्चित करने, जीने लायक न्यूनतम मजदूरी महिलाओं को देने, बराबर काम का बराबर दाम, अंगूठा निशानी के नाम पर राशन में कटौती बंद करने, कच्ची शराब बनाने पर रोक लगाने, स्कूल रसोइयों, आंगनवाड़ी व आशाओं को सरकारी मानदेय देने, मजदूरों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लेने, परिवारों में इलाज व शिक्षा में भेदभाव बंद करने, दहेज प्रथा पर रोक लगाने, खेती की जमीन, नदी का पानी व जंगल गरीबों से छीनकर शोषणकारी माफिया ठेकेदारों व विदेशी कम्पनियों के हवाले न करने और सम्पत्ति में बराबर का अधिकार दिए जाने की मांगें उठाईं।

एक तरफ जहां आरएसएस जैसे हिंदुवादी संगठन और भाजपा के गिरोह खुलेआम गांवों में महिला के सा​थ दोयम दर्जे का व्यवहार किए जाने की वकालत करते हैं, वहीं उसके विरोध में आवाज उठाते हुए इन महिलाओं ने अपने अभावग्रस्त जीवन के खिलाफ जन विकास व रोजगार के अवसरों की कमी, पिछड़ेपन के खिलाफ आवाज बुलन्द कर समाज को जागृत करने का प्रयास किया।

प्रगतिशील महिला संगठन ने आरएसएस-भाजपा की मोदी व योगी सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि यह मनुवादी सिद्धान्त को बढ़ावा दे रही हैं। कठुआ व उन्नाव के बलात्कारियों की रक्षा करते रहे हैं। बीएसचयू की छात्राओं पर हमले करते रहे हैं, दलितों व पिछड़ों के आरक्षण के हक पर हमलावर रहे हैं और साम्प्रदायिक दंगे कराकर मुसलमानों की जान लेते रहते हैं।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा मोदी का तीन तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं का पक्ष लेना एक धोखा है, क्योंकि उनके आरएसएस समेत तमाम हिंदुवादी संगठन खुलेआम इन्हीं महिलाओं के पतियों व भाइयों की गौरक्षा के नाम पर हत्या करते हैं, जबकि पुलिस चुप खड़ी रहती है।

घूरपुर में प्रगतिशील महिला संगठन द्वारा आयोजित प्रदर्शन में धनपति, शबनम, वर्षा, सहदेयी, उषा, सुनीता, मंजू, गुंजन, पार्वती, सैयदा बेगम, मालती समेत कई अन्य महिलाओं ने हिस्सा लिया। वहीं चायल, कौशाम्बी में आयोजित प्रदर्शन में बुदनी देवी, रंजना, संजना, अन्नु उजिहनी, रेशमी देवी, खुद गांव की ननकी, इन्द्रकली, रघुवंशी, राजपति जलालपुर आदि महिलाओं ने पुरुष वर्चस्ववादी समाज के विरूद्ध आवाज बुलंद की।


जन पत्रकारिता को सहयोग दें / Support people journalism


Facebook Comment