Last Update On : 10 05 2018 09:11:00 PM

जो अभिभावक अपने बच्चों को सिटी मांटेसरी स्कूल में पढ़ा रहे हैं वे उनका भविष्य बरबाद कर रहे हैं। कल यदि विद्यालय की अनियमितताएं उजागर हुईं, विद्यालय की मान्यता समाप्त हो तो बच्चों का क्या होगा…

संदीप पांडेय, मैग्सेसे से सम्मानित

लखनऊ का सिटी मांटेसरी स्कूल दुनिया का सबसे बड़ा विद्यालय होने का दावा करता है क्योंकि यहां 55,000 बच्चे पढ़ते हैं। विद्यालय में तमाम राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम होते रहते हैं। बोर्ड की परीक्षा में विद्यालय का परिणाम अच्छा आता है, क्योंकि कमजोर बच्चों को विद्यालय कक्षा 8 के स्तर पर ही बाहर कर देता है।

किंतु निजी विद्यालयों का संचालन सारे नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए कैसे होता है इसका सिटी मांटेसरी एक अच्छा उदाहरण है। विद्यालय के प्रबंधक जगदीश गांधी आध्यात्मिक प्रवचन देते हैं एवं साल में एक बार दुनियाभर के न्यायाधीशों का बुलाकर विश्व सरकार चलाने की बात करते हैं।

सिटी मांटेसरी स्कूल की जाॅपलिंग रोड शाखा जो 4 लाजपत राय मार्ग (2 ए जाॅपलिंग रोड) पर संचालित की जा रही है, असल में तीन भाइयों डाॅ. सुनील बिसेन, संजय बिसेन, अजय बिसेन व उनकी बहन डाॅ. मीता बिसेन की पैतृक सम्पत्ति है जो इनके पिता स्व. विश्वनाथ शरण सिंह बिसेन ने 1982 में जगदीश गांधी को किराए पर दी थी।

विश्वनाथ शरण सिंह बिसेन, जिनका देहावसान 1992 में हुआ, ने अपने जीवनकाल में ही किराएदारी समाप्त करके मकान खाली करवाने की न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी थी। तब से लेकर आज तक इनका परिवार कानूनी लड़ाई लड़ रहा है किंतु अपना घर प्राप्त करने में असफल है और न ही उन्हें उसका किराया मिल पा रहा है।

1982 में फीस थी रुपए 50 प्रतिमाह और किराया था रु. 4,000 प्रतिमाह। आज फीस तो बढ़ गई है दस गुना, लेकिन किराया सिर्फ रु. 5,200, वह भी न्यायालय में जमा हो रहा है। मौजूदा समय में मुकदमा जनपद न्यायाधीश की अदालत में लम्बित है, जिसके लिए उच्च न्यायालय से दिसम्बर 2015 में शीघ्र समयबद्ध निस्तारण का आदेश पारित है लेकिन जगदीश गांधी द्वारा कानूनी अड़चने डालकर न्याय नहीं होने दिया जा रहा है।

इस संदर्भ में जिला मजिस्ट्रेट के यहां एक प्रार्थना पत्र भू-माफिया कानून के अंतर्गत कार्यवाही करने हेतु दिया जा चुका है व मुख्यमंत्री के यहां भी शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।

क्योंकि विद्यालय कब्जा किए हुए भवन में नाजायज रूप से संचालित हो रहा है अतः इसकी मान्यता समाप्त कर तत्काल यह बंद होना चाहिए। सिटी मांटेसरी स्कूल की इंदिरा नगर शाखा का भवन बिना अनुमति के बना है, मानचित्र स्वीकृत नहीं है, भू-उपयोग आवासीय है, 21 वर्षों से ध्वस्तीकरण आदेश पारित है, विद्यालय संचालन के लिए शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र व राजस्व विभाग से भूमि प्रमाण पत्र भी नहीं, फिर भी इण्डियन काउंसिल फाॅर स्कूल सर्टिफिकेट इग्जामिनेशन ने अवैध रूप से मान्यता प्रदान की हुई है। आई.सी.एस.सी.ई. के खिलाफ विधिक कार्यवाही प्रारम्भ हो चुकी है।

लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात सिटी मांटेसरी स्कूल की चौक में घटित हुई है। वहां की तीन दशकों से ज्यादा प्रधानाचार्या रह चुकी साधना चूड़ामणि जो विवाह पश्चात बेदी नाम कर उपयोग करने लगीं, ने कई लोगों से करोड़ों रुपए विद्यालय के लेटरहेड पर रसीद जारी कर उधार लिए।

उदाहरण के लिए नवीन कांत रस्तोगी के परिवार से रुपए 67 लाख, रितेश अग्रवाल के परिवार से रुपए 61 लाख, राजेश अग्रवाल के परिवार से रुपए 25 लाख, फैजी जैदी के परिवार से करीब रुपए साढ़े 19 लाख, सुनील मल्होत्रा, जिनके घर में विद्यालय की यह शाखा चल रही है, से रुपए साढ़े 17 लाख, इंद्रजीत अरोड़ा के परिवार से रुपए 15 लाख व विभोर बैजल के परिवार से रुपए 9 लाख 12 प्रतिशत से लेकर 24 प्रतिशत ब्याज पर लिए गए हैं।

26 जून 2017 को जगदीश गांधी ने साधना बेदी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा उन्हें विद्यालय से निष्कासित कर दिया। साथ ही जगदीश गांधी ने पुलिस महानिदेशक को यह शिकायत की दी कि प्रधानाचार्या के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में कार्यवाही करें। जिनका पैसा उधार लिया गया था, उनसे जगदीश गांधी कहते हैं कि साधना बेदी ने बिना उनकी जानकारी के यह पैसा विद्यालय के नाम पर लिया, अतः इसके लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं और लोग साधना बेदी के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराएं। एक तरह से लोगों का करोड़ों रुपए डूब गया।

जानने वाले बताते हैं कि सिटी मांटेसरी स्कूल में बिना जगदीश गांधी की अनुमति से एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। किसी बच्चे को शुल्क में छूट देनी हो अथवा किसी कार्यक्रम में चाय पिलाने या खाना खिलाने का ठेका किसे मिलेगा, हरेक फैसला जगदीश गांधी खुद लेते हैं। ऐसे में यह कैसे सम्भव है कि विद्यालय के लेटरहेड पर पैसे लेने की रसीदें जारी होती रहीं और जगदीश गांधी को पता ही न चला हो?

पूरे मामले में सम्भवतः जगदीश गांधी की भी संलिप्तता है और पूरा षडयंत्र इस तरह से रचा गया है कि जगदीश गांधी या सिटी मांटेसरी स्कूल को कुछ न हो और साधना बेदी को बलि का बकरा बना दिया जाए। अब साधना बेदी और उनके पति जो शहर के प्रख्यात काॅल्विन तालुकेदारस कालेज के प्रधानाचार्य हैं, के साथ जगदीश गांधी ने न मालूम क्या समझौता किया है?

एक तरीके से जगदीश गांधी के यहां निजी बैंक चल रहा था। क्या सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक को इसकी जानकारी थी?

ऐसा प्रतीत होता है जगदीश गांधी को अवैध भवनों में मान्यता प्राप्त करने व अवैध तरीकों से विद्यालय संचालन करने की महारथ हासिल है। जो व्यक्ति अवैध तरीकों का इस्तेमाल करता है, दूसरों की सम्पत्ति पर कब्जा कर व्यवसायिक उद्देश्य से विद्यालय चलाता है उसके यहां कैसी शिक्षा मिलती होगी और किस तरह के नैतिक मूल्य बच्चों को मिलते होंगे?

जगदीश गांधी ने सिटी मांटेसरी स्कूल में शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत मुफ्त शिक्षा हेतु बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा दिए गए अलाभित समूह व दुर्बल वर्ग के बच्चों के दाखिले के आदेश को धता बताकर अपना गरीब विरोधी व मानवता विरोधी चरित्र भी उजागर कर दिया है।

जो अभिभावक अपने बच्चों को सिटी मांटेसरी स्कूल में पढ़ा रहे हैं, वे उनका भविष्य बरबाद कर रहे हैं। कल यदि विद्यालय की कार्यप्रणाली की जांच होने लगे और विद्यालय संचालन में उपरोक्त अनियमितताएं उजागर हुईं तो विद्यालय की मान्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में बच्चों का क्या होगा?