file photo : Kerala floods

अपनी पूरी निर्लज्जता और बर्बरता से इस आपदा, इस संकट का स्वागत कर रहे हैं खुशी मना रहे, नाच रहे हैं गा रहे हैं। सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफार्मों के जरिए ‘#बायकॉटकेरलबाढ़’ का अभियान चला रहा है। फेसबुक और ट्वीटर पर बाकायदा इस नाम से पेज भी बनाए गए हैं….

सुशील मानव का लेख

वो अपनी स्थापना, मान्यता, विचार और आचरण में बेहद क्रूर और बर्बर हैं। उन्हें किसी भी मूल्य पर वैचारिक, नस्लीय, धार्मिक लैंगिक व भाषाई असहमतियाँ स्वीकार्य नहीं है। अपनी इसी विवेकहीन कट्टरतावादी आग्रह के चलते वो अपनी मनुष्यता की हत्या करते चलते हैं और आपदा जैसे बेहद संवेदनशील पलों में भी वो अपनी मनुष्यता की रक्षा नहीं कर पाते हैं।

ऐसे में विपदाग्रस्त लोगों की मदद करना तो दूर, न सिर्फ इस समय वो शब्दों को खूब चबा-चबाकर बोलने लगते हैं, बल्कि अपने खूनी नुकीले दाँत को दिखा दिखाकर मौत से जूझते लोगों की तकलीफों उनकी डूबती सांसों का आनंद लेते हुए उनके विचारों और मान्यताओं का उपहास करते हैं।

वो लोगों पर आयी आपदा को उनके विचारों और मान्यताओं से जोड़कर उसे उनके कर्मों का फल बताकर उस विपदा को ही जस्टीफाई करने लगते हैं। बावजूद इसके जब लाचार लोगों की मदद के लिए हजारों हाथ आगे आने लगते हैं तो फिर अपनी हैवानियत पर उतारू होकर ये लोग मदद के लिए हाथ बढ़ाने वाले तमाम लोगों के हाथों को काटने लगते हैं।

केरल बाढ़ आपदा के इस बेहद संकटकाल में मनुष्यविरोधी कृत्य करने वाले ये लोग जाहिर है हिंदुत्ववादी संगठनों और उन्हीं के राजनीतिक दलों के लोग हैं। जो अपनी पूरी निर्लज्जता और बर्बरता से इस आपदा, इस संकट का स्वागत कर रहे हैं खुशी मना रहे, नाच रहे हैं गा रहे हैं। सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफार्मों के जरिए ‘#बायकॉटकेरलबाढ़’ का अभियान चला रहा है। फेसबुक और ट्वीटर पर बाकायदा इस नाम से पेज भी बनाए गए हैं!

आखिर ये कैसी मानसिकता है जो मदद करने वालों से ‘मदद मत करो’ की अपील कर रही है? ये भारतीयता की मानसिकता तो हर्गिज नहीं है। ये हिंदुत्ववादी मानसिकता है जो मनुष्यता पर आई आपदा को ऊपरवाले का न्याय बता रहा है। काश कि इनसे कोई ये पूछता कि बद्रीनाथ धाम में आई आपदा किसका न्याय था। न तो वहाँ कोई गाय खाने वाला था, न कम्युनिस्ट न मुसलिम फिर क्यों आपदा आई थी बद्रीनाथ और उत्तराखंड में।

वहीं संघ से जुड़ी हुई एक संस्था सेवा भारती लोगों द्वारा दिए जा रहे मदद को बाँटने की गरज से भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और आरएसएस चिंतक गुरुमूर्ति के बेहद ही निर्ल्ज्जता पूर्ण और अमानवीय और स्त्रीविरोधी बयान आया है – ‘केरल में आई बाढ़ सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को जाने की इज़ाज़त देने का नतीजा है!’

वहीं भारतीय मूल के एक अमेरिकी कथित लेखक राजीव मल्होत्रा ने सांप्रदायिक ट्टीट करते हुए लिखा- केरल के हिंदुओं की मदद के लिए कृपया दान करें। ईसाई और मुसलमान दुनियाभर से पैसे इकट्ठा कर ख़ासतौर पर अपने लोगों और एजेंडा की मदद कर रहे हैं। साथ ही आकंठ नफ़रत में डूबे इस कथित लेखक ने सेवा इंटरनेशनल नाम की संस्था का लिंक भी साझा किया है जिसमें दान की राशि जमा करने की अपील की है।

8 अगस्त से केरल में बारिश और बाढ़ का तांडव शुरू हुआ और 17 अगस्त तक करीब 173 लोग मौत हो गई। लेकिन तब तक केंद्र सरकार आँख कान मूँदे मस्त रहती है। 17 अगस्त को चेंगन्नूर के माकपा विधायक साजी चेरियन टीवी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की अपील करते हुए रोने लगे।

अपने विधान सभी का संकटग्रस्त हालात का विवरण सुनाते हुए रोते हुए उन्होंने कहा- ‘प्लीज मोदी को कहिए वो हमें हेलीकॉप्टर दें। हमें हेलीकॉप्टर चाहिए..प्लीज, प्लीज नहीं तो 50 हजार लोग मारे जाएंगे। हम लोग नेवी से पिछले चार रोज से मदद माँग रहे हैं, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं पहुँचा है, अब एकमात्र उपाय एयरलिफ्ट ही रह गया है… प्लीज, प्लीज… प्लीज।’

आखिर केंद्र द्वारा केरल को मदद देने में इतनी देरी क्यों की गई? उत्तर प्रदेश में काँवड़ियों पर फूल बरसाने के लिए सहजभाव से पर्याप्त संख्या में हेलीकॉप्टर मुहैया करवाने वाली केंद्र सरकार ने केरल बाढ़ आपदा बचाव के लिए हेलीकॉप्टर भेजने में इतनी देरी क्यों की। क्या ये केवल चुनावी नतीजे का विद्वेष था केरल की जनता के प्रति जो निभाया जा रहा था। जाहिर है उनकी जगह कोई भी संवेदनशील व्यक्ति होता तो एमएलए के अपील करने से पहले ही सैंकड़ों हेलीकॉप्टर केरल की आसमान में बचाव कार्य में जुटे दिखते।

इस तरह के मैसेज हो रहे हैं सोशल मीडिया पर वायरल

मनुष्यता का कोई मजहब नहीं होता। इस बात को साबित करते हुए खाड़ी देशों ने केरल में आई प्राकृतिक आपदा में मदद के लिए अपने खजाने खोल दिए हैं। कुवैत, क़तर, ओमान, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब समेत कई देश और यहां केरल निवासी एसोशिएसनों ने मदद के लिए आगे हाथ बढ़ाया है।

बाढ़ की भीषण तबाही से जूझ रहे केरल की मदद के लिए यूएई (यूनाइटेड अरब अमीरात) ने आगे आकर हाथ बढ़ाया है. यूएई ने केरल में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एक कमेटी का गठन किया है। यूएई के प्रेसिडेंट शेख खलीफा ने एक नेशनल इमरजेंसी कमेटी का गठन करने का निर्देश दिया है, ताकि केरल बाढ़ पीड़ितों को सहायता मुहैया कराई जा सके।

वहीं यूएई के वाइस प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने ट्वीट कर कहा है कि केरल के लोग हमारी सफलता में सहभागी रहे हैं और हैं। ऐसे में उनके प्रति हमारी विशेष जिम्मेदारी बनती है। इस समय बाढ़ प्रभावित लोगों कि मदद करना हमारा फर्ज है।

वाइस प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने कहा है कि हमें भारत में अपने भाइयों की मदद से पीछे नहीं हटना चाहिए। हमने एक कमेटी का गठन कर दिया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस समय बढ़-चढ़कर केरल के लोगों की मदद करें।

हमारी अपनी सरकार दो दिन जश्न और तीन दिन मातम मनाने के बाद आज हवाई यात्रा से लोगों के हाल चाल जान रही है, जबकि बाढ़ के चलते अब तक 385 लोगों की मौत हो चुकी है। कागज की जियो यूनिवर्सिटी को 1000 करोड़ और 36 राफेल डील के बदले 58000 करोड़ विदेशी कंपनियों को दे आने वाले और अपनी उपलब्धियों का गुणगान और प्रचार करने के लिए 4,343 करोड़ रुपए पानी की तरह उड़ा देने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ से तबाह केरल की आर्थिक मदद देने का वक्त एक-एक रुपए को दाँत से पकड़ते हुए केवल 500 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद की घोषणा की है। ये मजाक नहीं तो और क्या है केरलवासियों के साथ। जाहिर है आफत में फंसे केरल के लोगो से चुनावी खुन्नस भी पूरी कर ली जा रही है।

जबकि केरल की राजधानी तिरुआनंतपुरम में स्थित अनंत पद्मनाभ स्वामी मंदिर भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। इस मंदिर की संपत्ति एक लाख करोड़ रुपये के करीब है। फिर भी केरल के लोग भयानक बाढ़ से खुद को बचाने के लिए दूसरों से आर्थिक मदद पर निर्भर हैं? इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी?

पोप फ्रांसिस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया कि वह बाढ़ से प्रभावित केरल के पीड़ितों की ठोस मदद करें। उन्होंने इस बाढ़ को भयानक आपदा करार दिया। वेटिकन न्यूज के मुताबिक पोप फ्रांसिस ने सेंट पीटर्स स्क्वायर पर बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रार्थना की।

उन्होंने कहा, केरलवासी भारी बारिश से आई बाढ़ की विभीषिका में फंस गए हैं। व्यापक जनहानि हुई है, कई लोग लापता और विस्थापित हैं। फसलों और घरों को भी काफी नुकसान पहुंचा है।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि इन भाइयों और बहनों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकजुटता और ठोस मदद मिलेगी।


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