Fatehpur news : खजुहा का एक ऐसा ऐतिहासिक तालाब जहां नहाती हैं सिर्फ विधवा महिलायें, दिखाता है बजबजाते इतिहास का चेहरा

विधवा महिलाओं को हमारा समाज हमेशा से तिरस्कार की दृष्टि से देखता रहा है, हमारा इतिहास भी विधवाओं के तिरस्कार का बजबजाता आइना दिखाता है, अगर इसकी एक झलक देखनी हो तो फतेहपुर के खजुहा कस्बे में मौजूद रांडन तालाब को देखना चाहिए, जो बताता है कि विधवाओं को किस हद तक अभिशाप समझा जाता रहा है...

Update: 2022-07-27 14:30 GMT

लईक अहमद की ग्राउंड रिपोर्ट

Fatehpur news : यूपी के फतेहपुर जिले के खजुहा कस्बे में एक ऐसा भी तालाब है, जहां सिर्फ विधवा महिलाएं ही स्नान करती हैं। सत्रहवीं सदी में विधवा महिला जमुना कुंवर ने पक्का तालाब और भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।

सत्रहवीं शताब्दी एक ऐसा कालखंड था जब विधवा महिला को समाज का अभिशाप माना जाता था। यहां तक विधवा महिलाएं इतना तिरस्कृत होती थी कि यात्रा के समय या मांगलिक कार्यों में इनकी उपस्थिति को अमंगलकारी माना जाता था। विधवा जमुना कुंवर द्वारा बनवाया कराया गया मंदिर व तालाब शायद इसी वजह से अभिशप्त हो गया। तत्कालीन समाज ने रांड महिला द्वारा इसका निर्माण कराए जाने की वजह से इसे रांडन तालाब कह कर दूरी बना ली। 

गौरतलब है कि भारत में सैकड़ों साल पहले समाज में फैली कुरीतियों के कारण विधवाओं को अभिशाप माना जाता था, इसलिए गांव के बाहर विधवाओं के रहने के लिए कमरे भी बनवाये गये थे।

17वीं शताब्दी में विधवा हुई जमुनाकुंवर ने जनपद फतेहपुर के ऐतिहासिक नगरी खजुहा में एक विशाल मंदिर और भव्य तालाब का निर्माण कराकर विधवा महिलाओं के तालाब में स्नान करने का प्रबंध किया था। जमुना कुंवर की पृष्ठभूमि में जो तथ्य उभर कर सामने आए हैं, वो समाज के उस चेहरे को बेनकाब करते हैं कि धन-संपत्ति होने पर लोग किस कदर संवेदनहीन हो जाते हैं।

विधवा महिला जमुनाकुंवर द्वारा निर्माण कराया गया मंदिर व तालाब जो रांडन तालाब के नाम से प्रसिद्ध है और जाना जाता है, वास्तु-कलाकृति का अद्भूत नमूना है। जमुना कुंवर का परिवार मूल रूप से कानपुर जनपद के बरईगढ का है। परिवार ने समय परिवर्तन के साथ कानपुर छोड कर फतेहपुर जिले के जहानाबाद आया और फिर खजुहा आकर बस गया। परिवार के लोग तांबें के बर्तनों व पंसारी का व्यवसाय करते थे। जमुना कुंवर के दसवीं पीढ़ी के लोग अभी भी खजुहा में रहते हैं।

जमुना कुंवर द्वारा बनवाया गया मुगल रोड से जुडा रांडन तालाब चारों ओर से पक्का है

जमुना कुंवर के परिवार के दसवीं पीढ़ी के अजय प्रकाश गुप्ता बताते हैं, बारे मे बताया कि सत्रहवीं शताब्दी में खजुहा के धनी मानी व्यापारी तुलाराम गुप्ता ने नगर के उत्तरी पूर्वी छोर पर एक भव्य तालाब व मंदिर का निर्माण कराया था। एक दिन जमुना कुंवर परिवार की महिलाओं के साथ तुलाराम के तालाब में स्नान करने गई थी और मुल्तानी मिट्टी से बाल धुल रही थीए उसी समय तुलाराम के घर की महिलाएं आ गईं और जमुना कुंवर को अपने धन का अभिमान दिखाते हुए बाल धो रही महिलाओं को बेइज्जती के साथ भला बुरा कहते हुए बोली आज के बाद इस तालाब को गन्दा करने के लिए मत आना।अगर बहुत तालाब में नहाने का शौक है तो खुद तालाब बना कर दिखाना। यह बात जमुना कुंवर को तीर की तरह घर कर गई और उन्होंने दृढ़ प्रतिज्ञ होकर संकल्प लिया कि जब तक ऐसा ही भव्य व शानदार तालाब व मंदिर का निर्माण नहीं करा देंगी तब तक किसी भी तालाब में स्नान नहीं करेंगी।

बताया जाता है विधवा जमुनाकुंवर ने तालाब व मंदिर निर्माण के लिए ताना.बाना बुना। मंदिर व तालाब निर्माण के लिए एक बड़ी धनराशि के लिए योजनाबद्ध होकर काम शुरू किया। यद्यपि जमुना कुंवर के पास काफी सम्पत्ति थी इसके बावजूद अपनी कुछ महिला सहयोगियों के साथ धन संकलन के लिए अतिरिक्त काम व मेहनत की। किंवदंती के अनुसार जमुनाकुंवर ने लोगों के घरों में जाकर आटा चक्कियां चलाकर भी धन जुटाया।

मंदिर तालाब निर्माण काल में सूखा पड़ा था, लोगों को दो जून की रोटी मुहैय्या नहीं हो पा रही थी। जमुना कुंवर ने ऐसे मे ऐलान कर दिया कि जो मेरे मंदिर तालाब निर्माण में काम करेगा, उसे उसका पारिश्रमिक तो मिलेगा ही साथ में उसके पूरे परिवार के खाने पीने की भी सामग्री उपलब्ध कराएंगी। मेहनतकश लोगों ने तन मन से लग कर एक भव्य मंदिर व तालाब के निर्माण का सपना पूरा कराया। जिस दिन मंदिर व तालाब का निर्माण पूर्ण हुआ, वह दिन विधवा जमुना कुंवर के लिए खास बन गया।

बेजोड़ कलाकृति का नमूना है मंदिर

जमुना कुंवर द्वारा निर्माण कराया गया मंदिर एक सुंदर कलाकृति का अद्भूत नमूना है। मंदिर में बने कंगूरे उन पर लगे धातु के त्रिशूल मंदिर को शोभायमान करते हैं। दर्शनीय मंदिर व तालाब आज राडन के तालाब के नाम से सुविख्यात है।

जमुना कुंवर द्वारा निर्माण कराया गया मंदिर एक सुंदर कलाकृति का अद्भूत नमूना है

घाटों से सुसज्जित पक्का तालाब

जमुना कुंवर द्वारा बनवाया गया मुगल रोड से जुडा रांडन तालाब चारों ओर से पक्का है। चारों दिशाओं में स्नान करने की सीढ़ियां बनाई गई हैं। इस तालाब में सिर्फ विधवा महिलाएं ही स्नान करती थी।

रांडन तालाब नाम कैसे पड़ा

सत्रहवीं शताब्दी एक ऐसा कालखंड था जब विधवा महिला को समाज का अभिशाप माना जाता था। यहां तक विधवा महिलाएं इतना तिरस्कृत होती थी कि यात्रा के समय या मांगलिक कार्यों में इनकी उपस्थिति को अमंगलकारी माना जाता था। विधवा जमुना कुंवर द्वारा बनवाया कराया गया मंदिर व तालाब शायद इसी वजह से अभिशप्त हो गया। तत्कालीन समाज ने रांड महिला द्वारा इसका निर्माण कराए जाने की वजह से इसे रांडन तालाब कह कर दूरी बना ली। अन्ततः इस तालाब का नाम रांडन का तालाब हो गया। यह तालाब व मंदिर दर्शनीय है।

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पुरातत्व विभाग से संरक्षित किए जाने की मांग

ऐतिहासिक धार्मिक व सांस्कृतिक नगरी स्थिति सत्रहवीं शताब्दी में निर्मित रांडन तालाब व मंदिर को ऐतिहासिक दृष्टिकोण से पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित किए जाने की यहां के प्रमुख निवासी जमुना कुंवर परिवार की वृद्धा निर्मला गुप्ता, सामाजिक कार्यकर्ता विकास अवस्थी, पूर्व प्रधान अंकित शुक्लाएदीपू त्रिपाठी, अवधेश मिश्रा व राम प्रताप यादव आदि ने मांग की है।

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