UGC रेगुलेशन की मांग हुई तेज, फूलपुर तहसील पर किसान संगठनों ने प्रदर्शन राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन !

जिस तरीके से लखनऊ में प्रदर्शन करने वाले यूनिवर्सिटी के छात्रों और विधानसभा पर प्रदर्शन करने वाले संगठनों का उत्पीड़न किया गया उससे स्पष्ट है कि सरकार वंचितों को उसका अधिकार नहीं देना चाहती। दिल्ली में जिस तरह से यूजीसी समर्थकों के साथ अराजकता की गई और जब उसके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाने गए तो वहां पर महिला आंदोलनकारियों पर जिस तरीके से अस्लील और भद्दे कमेंट किए गए उससे स्पष्ट है कि भेदभाव को हथियार बनाकर सदियों के उत्पीड़न को कायम रखने की कोशिश की जा रही है...

Update: 2026-02-20 11:56 GMT

फूलपुर, आजमगढ़। यूजीसी इक्विटी नियमावली लागू करने की मांग आजमगढ़ में तेज हो गयी है। पूर्वांचल किसान यूनियन और सोशलिस्ट किसान सभा ने फूलपुर तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी फूलपुर को सौंपा। यूजीसी रेगुलेशन लागू करो, न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व की गारंटी करो, रोहित वैमूला अमर रहें, पायल तड़वी अमर रहें के नारे लगाते हुए सभा की। किसान संगठनों ने मेंहनगर, निजामाबाद के बाद फूलपुर तहसील पर ज्ञापन देते हुए बताया कि आजमगढ़ की सभी तहसीलों में ज्ञापन देते हुए ब्लॉक मुख्यालयों पर भी ज्ञापन दिया जाएगा। यूजीसी के मुद्दे को जनता के बीच में ले जाने के लिए गांव-कस्बों में यूजीसी चौपाल लगाई जाएगी।

वक्ताओं ने कहा कि रोहित वैमुला और पायल तड़वी की माओं के संघर्षों की बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया। यूजीसी ने उत्पीड़नों को देखते हुए गाइडलाइन बनाई, जिसके खिलाफ जाति विशेष के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया। यह न्यायसंगत नहीं है। जिस तरीके से लखनऊ में प्रदर्शन करने वाले यूनिवर्सिटी के छात्रों और विधानसभा पर प्रदर्शन करने वाले संगठनों का उत्पीड़न किया गया उससे स्पष्ट है कि सरकार वंचितों को उसका अधिकार नहीं देना चाहती। दिल्ली में जिस तरह से यूजीसी समर्थकों के साथ अराजकता की गई और जब उसके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाने गए तो वहां पर महिला आंदोलनकारियों पर जिस तरीके से अस्लील और भद्दे कमेंट किए गए उससे स्पष्ट है कि भेदभाव को हथियार बनाकर सदियों के उत्पीड़न को कायम रखने की कोशिश की जा रही है।

वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी के अपने आँकड़े ही बताते हैं कि 2019 से 2024 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस लिहाज से विश्वविद्यालयों-कॉलेजों को जाति भेदभाव व उत्पीड़न से मुक्त बनाने की दिशा में यूजीसी इक्विटी नियमावली न्यूनतम कोशिश है। इसे तत्काल लागू किया जाए। सामाजिक न्याय के लिए ठोस व सुसंगत नीतियां व योजनाएं बने, इसके लिए जरूरी है कि जाति जनगणना हो। जाति जनगणना की घोषणा के बाद अभी जारी जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं है, जाति जनगणना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

सामाजिक न्याय के सवालों पर न्यायालय के रवैये पर वक्ताओं ने कहा कि भारत की न्यायपालिका, विशेषकर संविधान पीठों में, सामाजिक विविधता एवं प्रतिनिधित्व का अभाव लोकतंत्र की आत्मा को कमजोर करता है। ऐसे में संविधान पीठ में अनिवार्य रूप से एसटी-एससी व ओबीसी को सम्मिलित किया जाना चाहिए और न्यायपालिका में एससी-एसटी व ओबीसी के प्रतिनिधित्व की गारंटी होनी चाहिए।

सभा को पूर्वांचल किसान यूनियन महासचिव वीरेंद्र यादव, सोशलिस्ट किसान सभा महासचिव राजीव यादव, डॉ. राजेंद्र यादव और मुलायम यादव ने सम्बोधित किया। प्रदर्शन में अधिवक्ता विनोद यादव, अवधेश यादव, साहब दीन, हीरालाल यादव, चंद्रशेखर मौर्या, नन्दलाल यादव आदि मौजूद रहे।

Tags:    

Similar News