Alvida Lata Mangeshkar: सारी दुनिया लता को याद कर रही है, लेकिन लता जिसे याद करती थीं...

Alvida Lata Mangeshkar: सारी दुनिया लता मंगेशकर को याद कर रही है लेकिन लता मंगेशकर जिस शख़्स को याद करती रहती थीं उस राजसिंह डूंगरपुर को कोई याद नहीं कर रहा ! आज भारत सरकार ने लता मंगेशकर के निधन पर राष्ट्रीय शोक का जो आदेश निकाला है उसमें उन्हें कुमारी लता मंगेशकर लिखा गया है ।

Update: 2022-02-06 16:28 GMT

Alvida Lata Mangeshkar: सारी दुनिया लता को याद कर रही है, लेकिन लता जिसे याद करती थीं...

कल्बे कबीर की टिप्पणी

Alvida Lata Mangeshkar: सारी दुनिया लता मंगेशकर को याद कर रही है लेकिन लता मंगेशकर जिस शख़्स को याद करती रहती थीं उस राजसिंह डूंगरपुर को कोई याद नहीं कर रहा ! आज भारत सरकार ने लता मंगेशकर के निधन पर राष्ट्रीय शोक का जो आदेश निकाला है उसमें उन्हें कुमारी लता मंगेशकर लिखा गया है । अगर लता मंगेशकर का प्यार परवान चढ़ता तो वे कुमारी नहीं होती, अकेली नहीं रहती । क्या लता मंगेशकर और राजसिंह डूंगरपुर की प्रेमकथा अधूरी रही या पूर्ण हुई ?

क्या सच्चे प्रेम की कथाएँ शायद अधूरी रहने को अभिशप्त होती हैं ? लता और राजसिंह की प्रेमकहानी भी इसी तरह की रही । लैला मजनूँ जैसी । ढोला मारू जैसी । जयपुर में 80 के आसपास राजसिंह डूंगरपुर लता मंगेशकर को जयपुर लाये थे । तब बाढ़ पीड़ितों के लिए एसएमएस स्टेडियम में लताजी का यादगार कार्यक्रम हुआ था, जिसकी मुझे याद है ।


राजसिंह डूंगरपुर क्रिकेटर थे, क्रिकेट के आदमी थे, उन्होंने ही क्रिकेट चयन समिति का अध्यक्ष रहते अजहरुद्दीन से कहा था - मियाँ कप्तान बनोगे ? और अज़हर को कप्तान बनाया । यह एक अद्भुत प्रेम कथा है जिसे किसी को लिखना चाहिए । वाणी प्रकाशन से प्रकाशित यतीन्द्र मिश्र की झूठी और पुरस्कृत किताब 'लता एक सुरगाथा' को इसलिए मैंने खिड़की के बाहर फेंक दिया था जिसमें राजसिंह डूंगरपुर का नाम तक नहीं है । और आश्चर्य यह कि इस किताब में खेमचंद्र प्रकाश का भी कोई ज़िक़्र नहीं है, जिसने लता को लता मंगेशकर बनाया ।

कब तक छिपाया जाएगा, किसी को तो लिखनी पड़ेगी यह अद्भुत प्रेम कहानी, जिसमें दोनों प्रेमियों को अकेले जीवन बसर करना पड़ा । लता मंगेशकर भी आजीवन कुमारी रही और हमारे राजस्थान के राजसिंह डूंगरपुर कुमार । उन्होंने भी शादी नहीं की । लता मंगेशकर क्रिकेट की दीवानी ऐसे ही नहीं थी ।

दोनों प्रेमियों को स्मृति-नमन !

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