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पेगासस सूची में पत्रकार संदीप राउज़ी का नाम भी शामिल, बोले ये जनता के खून पसीने की कमाई का घोर दुरुपयोग है

Janjwar Desk
8 Aug 2021 3:40 PM GMT
पेगासस सूची में पत्रकार संदीप राउज़ी का नाम भी शामिल, बोले ये जनता के खून पसीने की कमाई का घोर दुरुपयोग है
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( पत्रकार संदीप ने कहा कि यह इस बात का प्रतीक है कि ताकतवर होने के बावजूद सरकार इतनी डरी हुई है )

रामनगर के पर्वतीय सभा के सभागार में संपन्न इस गोष्ठी में दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील कमलेश कुमार ने कहा कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने वाली सर्वोच्च अदालत को भी पेगासस के माध्यम से नियंत्रित करने की कोशिश की गई....

रामनगर। पेगासस जासूसी देश में लोकतंत्र के ख़ात्मे की मुनादी है। यह जनता के खून पसीने की कमाई का घोर दुरुपयोग है। जहां कोरोना महामारी में जनता की मदद के लिए सरकार आंख चुराती रही वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, वकीलों, विपक्षी नेताओं, सुप्रीम कोर्ट के जजों की जासूसी के लिए मोदी सरकार ने करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए। ये बातें बीबीसी के पूर्व पत्रकार और वर्कर्स यूनिटी के फाउंडर एडिटर संदीप राउज़ी ने समाजवादी लोक मंच द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में कहीं।

पेगासस निगरानी सूची में अपना नाम आने पर हैरानी जताते हुए उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रतीक है कि ताकतवर होने के बावजूद सरकार इतनी डरी हुई है कि वो अपने ही नागरिकों की अंधाधुन जासूसी करने से नहीं हिचक रही है। उन्होंने कहा कि एक फो़न नंबर की जासूसी के लिए सरकार ने 90 लाख रुपये ख़र्च किए। इस तरह 300 लोगों की जासूसी की गई और करोड़ों रुपये बर्बाद कर दिए गए।

रामनगर के पर्वतीय सभा के सभागार में संपन्न इस गोष्ठी में दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील कमलेश कुमार ने कहा कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने वाली सर्वोच्च अदालत को भी पेगासस के माध्यम से नियंत्रित करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज और रजिस्ट्रार की भी जासूसी की गई। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली महिला कर्मचारी के फ़ोन की भी पेगासस के माध्यम से जासूसी की गई थी।


एडवोकेट कमलेश ने कहा कि पेगासस जासूसी कांड कानूनन ग़लत है और कानून के तहत सिर्फ आतंकवाद में लिप्त लोगों की ही जासूसी करवाई जा सकती है लेकिन सरकार ने एक्टिविस्टों, पत्रकारों, वकीलों, जजों, नेताओं की जासूसी करवाई और अब इससे मानने से भी मुकर रही है। संदद में बीते 15 दिनों से कार्यवाही बाधित है लेकिन मोदी सरकार गोलमोल जवाब दे रही है।

वन पंचायत संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष तरुण जोशी ने पेगासस जासूसी प्रकरण को जनता के संवैधनिक निजता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए कहा कि सरकार जन आंदोलनों पर दबाव बनाने की कोशिश में है, लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाएगी।

तरुण जोशी ने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ़ गैरकानूनी तरीके से जासूसी की जा रही है, हम सब उनके साथ खड़े हैं और सरकार के इस कदम की निंदा करते हैं।

गोष्ठी में रामगनर और आस पास क्षेत्रों से आए लोगों ने भारी संख्या में भागीदारी की। काशीपुर के एडवोकेट सतपाल सिंह, युवा एकता संगठन मालधन के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, दिल्ली के धरमेंद्र जोशी व समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार ने इस गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त किए। इसका संचालन एमएस मेहता ने किया।


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