खनन डम्पर की चपेट में आकर दर्दनाक मौत की शिकार वीरपुर लच्छी की बच्ची आशा की याद में बने आशा स्मृति पुस्तकालय का उद्घाटन
पुस्तकालय में कानून,पर्यावरण, विज्ञान, महापुरुषों की जीवनी, बाल कथाएं, उपन्यास समेत राजनीतिक-सामाजिक विषयों पर पुस्तकें उपलब्ध हैं, पुस्तकालय सप्ताह में 2 दिन शनिवार व रविवार को खुलेगा और कोई भी व्यक्ति पढ़ने के लिए पुस्तकालय की सदस्यता लेकर निशुल्क पुस्तकें प्राप्त कर सकता है....
रामनगर। महिला एकता मंच द्वारा उत्तराखंड के रामनगर स्थित बक्सा जनजाति बहुल गांव वीरपुर लच्छी में आशा स्मृति पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया। 10 वर्ष पूर्व वीरपुर लच्छी गांव के बीच से गुजर रहे खनन डम्पर की चपेट में आने से कक्षा 11 की 17 वर्षीय छात्रा आशा की दर्दनाक मृत्यु हो गई थी, उसकी याद में गांव में पुस्तकालय शुरू किया गया है। पुस्तकालय का उद्घाटन मेनका देवी द्वारा किया गया।
पुस्तकालय में कानून,पर्यावरण, विज्ञान, महापुरुषों की जीवनी, बाल कथाएं, उपन्यास समेत राजनीतिक-सामाजिक विषयों पर पुस्तकें उपलब्ध हैं।
पुस्तकालय की संचालक रजनी सिंह ने बताया कि पुस्तकालय सप्ताह में 2 दिन शनिवार व रविवार को खुलेगा और कोई भी व्यक्ति पढ़ने के लिए पुस्तकालय की सदस्यता लेकर निशुल्क पुस्तकें प्राप्त कर सकता है।
कार्यक्रम में महिला एकता मंच दिल्ली से शामिल हुई सीमा सैनी ने पुस्तकों के महत्व के बारे में कहा कि आपके पास से सोना, चांदी, रुपया, पैसा व अन्य कीमती वस्तुएं कोई भी छीन सकता है,उन्हें चोरी कर सकता है परंतु पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान हमेशा आपके साथ रहेगा, आपको रास्ता दिखाता रहेगा और इसे कोई नहीं छीन सकता। उन्होंने उन्होंने मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी बूढ़ी काकी भी ग्रामवासियों को पढ़कर सुनाई।
गिरीश चन्द्र ने कहा कि धर्म ग्रंथों में शूद्रों और महिलाओं को शिक्षा का अधिकार नहीं था, इस कारण हमारे पूर्वज अनपढ़ रह गए, परंतु आज हमें शिक्षा और अध्ययन के महत्व को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पढ़ने लिखने की कोई उम्र नहीं होती इस पुस्तकालय से बच्चों से लेकर वरिष्ठ लोग भी ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम में रानी, कौशल्या, एडवोकेट कमलेश, लक्ष्मी, जगमोहन रावत व मुनीष कुमार आदि ने भी विचार व्यक्त किए।