शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहादत दिवस पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा ने रुद्रपुर के गांधी पार्क में की सभा आयोजित, जुलूस निकालकर भगत सिंह की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
श्रमिक नेताओं ने कहा कि आज मोदी सरकार ने मज़दूरों को पूंजी और मुनाफे का खुला गुलाम बनाने के लिए मज़दूर विरोधी चार श्रम संहिताएं थोप दी हैं। मज़दूरों के लंबे संघर्षों से हासिल सीमित कानूनी अधिकार भी समाप्त कर दिए हैं...
रुद्रपुर । शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु के शहादत दिवस पर श्रमिक संयुक्त मोर्चा की ओर से गांधी पार्क रूद्रपुर में सभा आयोजित हुई और भगत सिंह चौक तक जुलूस निकालकर भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
इस दौरान केंद्र की मोदी सरकार व राज्य सरकार द्वारा मजदूरों को बंधुआ बनाने वाले चार श्रम संहिताओं और ईरान पर अमेरिका-इजरायल द्वारा थोपे गए साम्राज्यवादी युद्ध का विरोध किया गया।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु और उनकी पार्टी हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचएसआरए) ने "साम्राज्यवाद को बड़ी डाकेजनी" कहा था, वहीं अंग्रेजों द्वारा थोपे गए ट्रेड डिसप्यूट बिल के खिलाफ भगत सिंह और बटूकेश्वर दत्त ने पार्टी की योजना के तहत संसद पर बम धमाका करके ‘बहरे कानों तक’ अपनी आवाज पहुंचाई थी।
श्रमिक नेताओं ने कहा कि आज मोदी सरकार ने मज़दूरों को पूंजी और मुनाफे का खुला गुलाम बनाने के लिए मज़दूर विरोधी चार श्रम संहिताएं थोप दी हैं। मज़दूरों के लंबे संघर्षों से हासिल सीमित कानूनी अधिकार भी समाप्त कर दिए हैं। इससे स्थाई रोजगार, यूनियन और संघर्ष के अधिकारों, न्यूनतम वेतन और बुनियादी सुविधाओं को खत्म करके मज़दूर वर्ग पर बड़ा हमला बोला गया है। ग्रामीण रोजगार गारंटी को खत्म किया गया है। इसके खिलाफ सभी मज़दूरों को वर्गीय एकजुटता के साथ आगे आना होगा।
वक्ताओं ने कहा कि गाजा की तबाही सहित जारी तमाम युद्धों के साथ वर्तमान में ईरान पर अमेरिका-इजरायल ने साम्राज्यवादी युद्ध थोप दिया है। इससे पूरे मध्यपूर्व में भयावह मानवीय त्रासदी पैदा हुई है। अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल-गैस पर कब्जे के लिए खुलेआम राष्ट्रपति मादुरो का अपहरण किया। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। पहले से ही विकट महँगाई भयावह रूप ले चुकी है। गैस, तेल की कमी को मेहनतकश जनता झेलने पर मजबूर है।
वक्ताओं ने कहा कि साम्राज्यवाद के दबाव में भारतीय शासकों द्वारा उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण की नीतियों का खामियाजा आज लागू श्रम संहिताएं हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य से जनता महरूम हो रही है तो दूसरी ओर बेरोजगारी, महंगाई और असुरक्षित भविष्य से सभी मेहनतकश पीड़ित हैं।
वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह के विचार साम्प्रदायिकता, जातिवाद के विरोधी थे। वे विज्ञान सम्मत तर्क करने के पक्षधर थे। आज के दौर में फासीवादी ताकतों ने उन्मादी नफ़रत का माहौल बनाकर देशी-विदेशी पूंजी की गुलामी को आसान बनाया है। ऐसे में भगत सिंह के विचार आज एकबार फिर हमें पुकार रहे हैं। देश-दुनिया में मानवता, समानता के जरिये ही इंसानियत को बचाया जा सकता है।
सभा में साम्राज्यवादी युद्ध का विरोध किया गया और साथ ही मज़दूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को रद्द करने की माँग की गई।
सभा को क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के शिवदेव, सीएसटीयू नेता मुकुल, भाकपा(माले) के ललित मटियाली, इंकलाबी मजदूर केंद्र के सुरेंद्र सिंह, इंट्रार्क मजदूर संगठन के महामंत्री सौरभ, पीपीआईडी के प्रदेश अध्यक्ष हरीश मौर्या, समाजसेवी सुब्रत विश्वास, सीआईई इंडिया श्रमिक संगठन के बालकरण सिंह, समता सैनिक दल के गोपाल गौतम , रविन्द्र कौर आदि ने संबोधित किया।
सभा का संचालन मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी व महासचिव चंद्र मोहन लखेड़ा ने किया। कार्यक्रम में ऐक्टू की अनिता अन्ना, विजय शर्मा, हरेंद्र सिंह, दलजीत सिंह, राकेश, बृजपाल, रोशनलाल, संजय, चेतन सिंह, नरेश कुमार , धीरज जोशी, जयदेव चंद्र मदक , विजय कुमार, सुखदेवी, शक्ति सरकार, राहुल, हरेंद्र, कामेश्वर, कृष्ण प्रसाद जोशी, महेंद्र , बिंदु कुमार, प्रमोद भारती, रामेश्वर दयाल, भगवान चौधरी सहित कई लोग। मौजूद थे।