रेगुलेशन के समर्थन में पटना में आक्रोशपूर्ण राजभवन मार्च, प्रदर्शनकारियों ने जेपी गोलंबर और डाकबंगला पर तोड़ा घेरा, कई गिरफ्तार
प्रदर्शन में शामिल छात्र युवा प्रतिनिधियों ने यह चेतावनी दी कि यदि यूजीसी रेगुलेशन लागू नहीं किया गया तो इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा....
पटना। आज 74 आंदोलन के ऐतिहासिक दिवस पर पटना में यूजीसी रेगुलेशन 2026 के समर्थन और SC/ST/EBC /BC तबकों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण लागू करने, संसद से रोहित एक्ट का निर्माण करने इत्यादि मांगों को लेकर ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले गांधी मैदान से राजभवन मार्च आयोजित किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में छात्र-नौजवान, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता और विभिन्न जिलों से आए लोगों ने भाग लिया.
आज इस ऐतिहासिक दिन पर एक बार फिर से बिहार के युवाओं ने मनुवादी फासीवादी सत्ता के खिलाफ सामाजिक न्याय और लोकतंत्र के लिए जंग के नए दौर का ऐलान किया है.
यह मार्च गांधी मैदान के गेट नंबर 10 से शुरू हो कर जेपी गोलंबर के बैरिकेट को तोड़ते हुए डाक बंगला चौराहा तक पहुंचा, जहां पर कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने धक्कामुक्की की और कुछेक लोगों को गिरफ्तार किया गया, हालांकि आंदोलनकारियों के दवाब में सबको छोड़ना पड़ा. मार्च डाक बंगला चौराहा पर सभा में तब्दील हो गया. मार्च की मुख्य मांगे उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करना, जाति भेद भाव व उत्पीड़न के खिलाफ यूजीसी के नए रेगुलेशन को लागू करने, बिहार में विधानसभा से पारित SC/ST/EBC/BC वर्गों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने, कोलेजियम सिस्टम को खत्म करने, संविधान विरोधी EWS को खत्म करने, गरीब विरोधी नई शिक्षा नीति 2020 और VBSA बिल को वापस करने, निजी क्षेत्रों और न्यायपालिका में SC/ST/OBC के लिए आबादी के अनुपात में आरक्षण लागू करने इत्यादि था.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा में बढ़ती सामाजिक असमानता, जातीगत भेदभाव एवं उत्पीड़न के खिलाफ यह जरूरी है कि यूजीसी रेगुलेशन लागू किया जाए, रोहित एक्ट का निर्माण किया जाए। नई शिक्षा नीति 2020 को वापस लिया जाए। वंचित वर्गों के लिए आरक्षण की सीमा को बढ़ाया जाए और उसे सख्ती से लागू किया जाए.
वक्ताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण और भेदभावपूर्ण नीतियों को छोड़कर समावेशी और न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए.
सभा का संचालन फोरम के राज्य संयोजक रिंकु यादव ने किया तथा सभा को संबोधित करते हुए काराकाट सांसद राजाराम सिंह ने कहा कि सड़क की इस आवाज को संसद में मजबूती से उठाएंगे. इस बार सामाजिक न्याय की जो लड़ाई छिड़ी है वो निर्णायक मंजिल तक पहुंचेगी. बिहार फिर से सामाजिक न्याय और लोकतंत्र के लड़ाई के अग्रिम चौकी के बतौर खड़ा होगा. सभा को पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा, पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, सामाजिक न्याय आंदोलन के राज्य सचिव सुबोध यादव, RYA के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा, फोरम के मनजीत आनंद साहू, विजय पासवान, संतोष आर्या, पूर्व विधायक मनोज मंजिल,आइसा राष्ट्रीय महासचिव प्रसेनजीत कुमार, भीम आर्मी राज्य अध्यक्ष अमर ज्योति, जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय, पटना विश्वविद्यालय छात्र नेता सबा आफरीन, फोरम से विश्वा यादव, मुख्तार, निशांत यादव, AISF राज्य अध्यक्ष सुधीर, सोनल नारायण, कुमुद पटेल, आइसा राज्य अध्यक्ष प्रीति, RYA राज्य सचिव और पूर्व विधायक शिवप्रकाश रंजन, आइसा राज्य सह सचिव, दिव्यम, RYA नेता विनय ने संबोधित किया.
प्रदर्शन में शामिल छात्र युवा प्रतिनिधियों ने यह चेतावनी दी कि यदि यूजीसी रेगुलेशन लागू नहीं किया गया तो इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
मार्च में बिहार के विभिन्न जिलों, पटना, बक्सर, छपरा, सिवान, भोजपुर, अरवल, भागलपुर, जहानाबाद, बेगूसराय, रोहतास, समस्तीपुर, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, दरभंगा, मधुबनी, गया, मुजफ्फरपुर सहित अन्य इलाकों से हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए.