दलित-आदिवासी छात्रों की 76 सालों से चल रही स्कॉलरशिप खत्म करने की साजिश कर रहा केंद्र

केंद्र सरकार ने इस योजना को देश के 14 राज्यों, जिसमें झारखंड, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्य भी शामिल हैं, को 2017 के फॉर्मुले के अनुसार राशि निर्गत नहीं करके एक तरह से ख़त्म कर दिया है.....

Update: 2020-12-17 11:48 GMT

विशद कुमार की रिपोर्ट

डालटनगंज। दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन, आंबेडकर विचार मंच, आईसा, भोजन का अधिकार अभियान तथा अंबेडकर छात्रावास के छात्रों द्वारा संयुक्त रूप से 'नाग लोक उत्सव भवन' डालटनगंज में 16 दिसंबर को आयोजित एक प्रेस वार्ता में शामिल छात्रों व बुद्धिजीवियों ने बताया है कि हाल ही में आयी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार आदिवासी एवं दलित छात्रों के लिए पिछले 76 साल से जारी छात्रवृत्ति 'पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप' जिसमें पूरे देश के लगभग 62 लाख गरीब छात्र हैं, को ख़त्म करने वाली है।

केंद्र सरकार ने इस योजना को देश के 14 राज्यों, जिसमें झारखंड, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्य भी शामिल हैं, को 2017 के फॉर्मुले के अनुसार राशि निर्गत नहीं करके एक तरह से ख़त्म कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने PMS (पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप) के लिए दी जाने वाली राशि में केंद्र एवं राज्य के अनुपात को संशोधित कर रही है। सामाजिक न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री रतन लाल कटारिया ने संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि केंद्र एवं राज्य के अंश में बदलाव के बाद इस योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार अपने संसाधनों से करेगी।

मीडिया रिपोर्ट यह भी बतलाती है कि हाल ही में पीएमओ की बैठक में भी यह आकलन किया गया कि केंद्र का हिस्सा 10 % एवं राज्य का हिस्सा 90 होगा। जबकि 12 वें वित्त आयोग के दौरान केंद्र का हिस्सा 60% एवं राज्य का हिस्सा 40% था, लेकिन 14 वें वित्त आयोग द्वारा केंद्र का हिस्सा 10% एवं राज्य का हिस्सा 90% कर दिया गया। ऐसे राज्य के लिए अपने संसाधनों से PMS मद का 90% का बोझ उठाना मुश्किल होगा और कई राज्य यह कह चुके हैं कि वे इसके लिए सक्षम नहीं हैं। पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार इस मुद्दे को सामजिक न्याय मंत्रालय में भी ले जा चुके हैं।


झारखंड के छात्र संगठन व सामाजिक संगठनों ने मांग किया है कि देश के 62 लाख गरीब—दलित—आदिवासी छात्रों को शिक्षा में न्याय की संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित की जाए। प्रेेस वार्ता में छात्र नेता ने कहा कि केंद्र सरकार PMS के लिए आवश्यक राशि देने की घोषणा करे ताकि 62 लाख दलित एवं आदिवासी छात्रों को लाभ मिले PMS के लिए दी जाने वाली राशि में केंद्र एवं राज्य के बीच पूर्ववत 60 : 40 प्रतिशत के अंश को लागू किया जाए। (पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप) PMS के लिए प्रति वर्ष दी जाने वाली केन्द्रीय राशि को बढ़ा कर 10 हजार करोड़ किया जाए ताकि 62 लाख दलित एवं आदिवासी छात्रों के बकाया छात्रवृति का भुगतान हो सके।

 शिकायत निवारण प्रणाली की स्थापना की जाए जिसके तहत निर्धारित समय में अस्वीकृत PMS आवेदनों एवं देरी से किए जाने वाले भुगतान जैसे मामलों का निपटारा किया जा सके, ताकि सभी योग्य छात्रों को उनके लंबित छात्रवृत्ति का भुगतान साल के अंत में हो जाए। सभी आदिवासी एवं दलित छात्रों की छात्रवृति की योग्यता के लिए आय की सीमा 2.5 लाख से बढ़ा कर 8 लाख की जाए। सामाजिक न्याय मंत्रालय को छात्रवृति की राशि बढ़ाते हुए इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक एवं महंगाई दर से जोड़ना चाहिए ताकि छात्र समय के साथ शिक्षा के बढ़ते खर्च का भार वहन कर सके।

प्रेस वार्ता में एनसीडीएआर के राज्य समान्वयक मिथिलेश कुमार, भोजन के अधिकार अभियान व झारखंड नरेगा वाॅच के राज्य समन्वयक जेम्स हेरेंज, आईसा के जिला अध्यक्ष दिव्य भगत, राज्य कमेटी सदस्य त्रिलोकीनाथ, आंबेडकर विचार मंच से गणेश रवि, जन संग्राम मोरचा के युगल पाल, झारखंड क्रांति मंच के शत्रुग्ध कुमार शत्रु, छात्र नेता बेबी कुमारी, श्रीराम डालटन, मेघा श्रीराम डालटन, अनामिका हेरेंज, अनुराग कुमार, बबलू कुमार रवि, आलोक कुमार, जसवंत कुमार सहित कई लोग शामिल थे।

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