झारखंड : एक ही व्यक्ति को पीसीसीएफ और प्रदूषण बोर्ड का अध्यक्ष बनाने के फैसला को अदालत में मिलेगी चुनौती

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने एक ही व्यक्ति का राज्य वन विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दोनों का प्रमुख बना दिया है, जिसे नियम विरुद्ध बताते हुए फैसला वापस लेने का आग्रह किया गया है अन्यथा इसे हाइकोर्ट में चुनौती दी जाएगी...

Update: 2020-07-20 02:30 GMT

जनज्वार, रांची। झारखंड में एक ही व्यक्ति को पीसीसीएफ (प्रधान मुख्य वन सरंक्षक) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अध्यक्ष बनाने पर विवाद गहरा गया है। पर्यावरणीय मुद्दों पर काम करने वाले राज्य के वरिष्ठ विधायक सरयू राय ने पहले ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आगाह किया था कि सरकार ऐसा फैसला नहीं ले और लेती है तो वे उसे हाइकोर्ट में चुनौती देंगे। वहीं, इस मामले में अधिवक्ता प्रतीक शर्मा ने राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह को एक पत्र लिख कर इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए इस निर्णय को गलत बताया है।

प्रतीक शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस संबंध में 2016 में दिए गए दिशा निर्देश का यह उल्लंघन है और अगर राज्य सरकार 15 दिनों में निर्णय को रद्द नहीं करती है तो वे इसे हाइकोर्ट में चुनौती देंगे। वहीं, सरयू राय ने एक बार फिर ट्वीट किया है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अध्यक्ष वही बनेगा जिसे पर्यावरण का विशेष ज्ञान है, यदि कोई सरकार इसका उल्लंघन करती है तो कोई भी 'पब्लिक स्पिरिटेड' व्यक्ति हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। सरयू राय इस मामले में वकील प्रतीक शर्मा के हाइकोर्ट जाने के फैसले को सराहा है। 

हेमंत सोरेन सरकार ने पिछले दिनों अधिसूचना जारी पीके वर्मा को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया था। वे पीसीसीएफ के पद पर भी हैं।

सरयू राय के अनुसार, यह सुप्रीम कोर्ट व राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण के दिशा निर्देशों का उल्लंघन है। उन्होंने इसे हितों के टकराव का मामला बताया है। उनके अनुसार, बोर्ड के चेयरमैन को पीसीसीएफ के खिलाफ भी निर्णय लेना होता है, इसलिए किसी अन्य जानकार को इस पद पर नियुक्त करना चाहिए जिसे वन विभाग के जुड़े मामलों का अनुभव हो।

वकील प्रतीक शर्मा ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि पीके वर्मा को दोनों पदों नियुक्त करना सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश का घोर उल्लंघन है। उन्होंने लिखा है कि इन्हें पर्यावरणीय विषय का आवश्यक जानकारी भी नहीं है और दोनों पदों पर एक व्यक्ति के रहने से हितों का टकराव की स्थिति उत्पन्न होगी। उन्होंने वर्मा को पीसीसीएफ नियुक्त करने में भी नियमों को उल्लंघन का उल्लेख किया है।

उन्होंने कहा है कि पीके वर्मा को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाकर नियमों के अनुसार योग्य व्यक्ति का उस पद पर चयन करना चाहिए। उन्होंने लिखा है कि अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो अदालत की शरण में जाएंगे।


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