About us

*2007 में जनज्वार की शुरुआत एक राजनीतिक—सामाजिक ब्लॉग के रूप में हुई थी। ब्लॉग ने कई बड़े मुद्दों को उठाया, जिसमें राजनीति, समाज, अर्थशास्त्र, धर्म और संस्कृति से जुड़े बहुतेरे सवाल थे जिसे मुख्य धारा की मीडिया खासकर हिंदी कभी छूने का प्रयास नहीं करती। इन मुद्दों की लोकप्रियता धीरे—धीरे इतनी बड़ी और व्यापक होती गयी कि हिंदी के सभी प्रमुख अखबार और तमाम पत्रिकाएं लगातार जनज्वार से साभार लेख, रिपोर्ट और विश्लेषण प्रकाशित करते थे।

*कई गैर व्यावसायिक पत्रिकाएं तो जनज्वार पर प्रकाशित सामग्री के जरिए ही निकलने लगी थीं। 2007 से 2012 के बीच के हिंदी अखबारों को पलट कर यह सिलसिला आप खुद देख सकते हैं। 2012 में जनज्वार वेबसाइट के रूप में लांच हुआ, पर हिंदी अखबारों में जनज्वार से साभार का सिलसिला जारी रहा।

*वेबसाइट बनने के बाद देशभर से खासकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, झारखंड, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात से दर्जनों पत्रकार सक्रिय तौर पर जुड़े।

*पत्रकारों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक बड़ी संख्या जनज्वार से जुड़ी जिनके सवालों और सुझावों को जनज्वार ने प्रमुखता से स्थान दिया। देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों जेएनयू, डीयू से लेकर पटना विश्वविद्यालय तक जनज्वार की पहचान एक जनपक्षधर वेबसाइट के रूप में कायम हुई और हम हमारी बुनियादी तौर पर पहचान ‘तथ्य ही सत्य है’, की राह पर आगे बढ़ चले।

*चूंकि जनज्वार का कोई व्यावसायिक ढांचा नहीं बन पाया इसलिए वेबसाइट आर्थिक कारणों से तकनीकी संकटों में पड़ गयी। जनज्वार जहां से चला था उससे बहुत व्यापक स्तर पर लोगों के बीच लोक​प्रिय हुआ और वेबसाइट की यात्रा जारी रही।

*इन चुनौतियों से निकलते हुए जनज्वार दुबारा 2017 जुलाई में रिलांच हुआ और आज जिस स्वरूप में जनज्वार दिखता है, वह दुबारा रिलांच होने के बाद का है। अब जनज्वार से करीब 100 से अधिक पत्रकार और अपने—अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं।

*जनज्वार के 10 वर्षों के इस सफर में कानून, सुरक्षा, स्वास्थ्य, मनोविज्ञान के विशेषज्ञों की एक टीम जुड़ी है तो दूसरी तरफ आंदोलन, कला, साहित्य, खेल और समाजविज्ञानियों के भी विशेषज्ञ लगातार जनज्वार पर लेख, ​रिपोर्ट लिख रहे हैं। जनज्वार क्रिएटिव की अलग से एक टीम है। सोशल मीडिया कैंपेन और प्रसार के साथियों की भी बड़ी भूमिका है। यह सभी साथी जनज्वार के सहयोगी और समर्थक के तौर वेबसाइट में मदद करते हैं। जनज्वार को सक्षम और लोकप्रिय बनाने में इन साथियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जनज्वार भारत के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, नेपाल, थाईलैंड, अरब, यूएई समेत कई दूसरे देशों में देखा जाता है।

*हमारा जोर सामाजिक पत्रकारिता को मजबूती से खड़ा करने पर है और हमारी कोशिश है कि हिंदी पत्रकारिता में ‘तथ्य ही सत्य है’, का मूल्य स्थापित हो।

* जनज्वार से जुड़ने की सिर्फ दो शर्तें हैं — एक तो आप साक्षर हों और दूसरी बतौर लेखक—पत्रकार ‘तथ्य ही सत्य है’, की जीवन पद्धति को मानते हों। अगर आप जनज्वार के ​जरिए जनपक्षधर पत्रकारिता को जन—जन के बीच लोक​प्रिय बनाना चाहते हैं तो हमें लिखें, हमसे जुड़ें और लोगों को जुड़ने के लिए उत्साहित करें।

Independent and Public Spirited Media Foundation has provided financial support to Janjwar Foundation for the purpose of reporting and publishing stories of public interest. Independent and Public Spirited Media Foundation does not take any legal or moral responsibility whatsoever for the content published by Janjwar Foundation on their website or on any of its other platforms.”

 

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