शिक्षक जालसाजी कांड में अनामिका शुक्ला, दीप्ति से सुप्रिया तक सब फर्जी, शिक्षा विभाग का गुरुजी निकला मास्टरमाइंड

शुरुआती छानबीन के बाद एसपी सुशील घुले ने कहा जालसाजों के तार कासगंज सहित कन्नौज, मैनपुरी, हरदोई, फर्रुखाबाद और गोण्डा में भी जुड़े हैं, इसके साथ ही पूरा गिरोह फर्जी डिग्रियां दिलाने व फर्जी डिग्रियों के सहारे नौकरी दिलाने में भी है माहिर...

Update: 2020-06-12 07:01 GMT
अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी करने वाली प्रिया उर्फ सुप्रिया की गिरफ्तारी के बाद हुआ था फर्जी शिक्षक कांड का पर्दाफाश (file photo) 

मनीष दुबे की रिपोर्ट

जनज्वार। जालसाज शिक्षिका अनामिका शुक्ला प्रकरण में पुलिस ने मास्टरमाइंड के भाई को गिरफ्तार किया है। पड़ताल में वह खुद भी फर्जी शिक्षक निकला। मास्टरमाइंड का भाई विभव नाम से कन्नौज के हरसेन ब्लॉक स्थित रामपुर बरौली के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक था। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि वह और उसका भाई प्रदेश के विभिन्न जिलों में अब तक 20 लोगों की नौकरियां लगवा चुके हैं।

कासगंज में अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी करने वाली प्रिया उर्फ सुप्रिया ने गिरफ्तारी के बाद कई राजों का पर्दाफाश किया था। उसने पुलिस को बताया था कि इन सबमें मास्टरमाइंड राज उर्फ नीतू का रचाया गया खेल था, जिसमे वो सब एक किरदार के तहत काम कर रहे थे। दस्तावेजों के आधार पर मास्टरमाइंड का असली नाम पुष्पेंद्र है। पुष्पेंद्र अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस का अनुमान है उसकी गिरफ्तारी के बाद फर्जीवाड़े का और भी खुलासा हो सकता है।

एसपी कासगंज सुशील घुले ने बताया कि मास्टरमाइंड के भाई जसवंत को कासगंज के राज कोल्ड स्टोर तिराहे से बुधवार 10 जून को गिरफ्तार किया गया था। वह मैनपुरी के थाना भोगांव छेत्र के गांव नगला खरा का रहने वाला है। आरोपी जसवंत भोगांव के ही हसनपुर मोटा निवासी विभव कुमार पुत्र विनोद के दस्तावेजों के आधार पर 2015 में बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े से नौकरी पाया था। उसने यह नौकरी गणित विज्ञान के शिक्षक के तौर पर प्राप्त की थी।

सोरों पुलिस द्वारा अनामिका शुक्ला प्रकरण में किये गए खुलासे की जानकारी आगरा एसटीएफ ने सोरों पुलिस से ली है। गौरतलब है कि एसटीएफ भी अन्य लोगों की तलाश में दबिशें दे रही है। मैनपुरी पुलिस से भी एसटीएफ संपर्क में है। एसपी सुशील घुले के अनुसार जालसाजों के तार कासगंज सहित कन्नौज, मैनपुरी, हरदोई, फर्रुखाबाद और गोण्डा में भी जुड़े हैं। इसके साथ ही पूरा गिरोह फर्जी डिग्रियां दिलाने व फर्जी डिग्रियों के सहारे नौकरी दिलाने में भी माहिर है।

गिरफ्तारियों के बाद मास्टरमाइंड राज के नाम से भी पर्दा उठा है। वह शिक्षा विभाग में गुरुजी के नाम से जाना जाता है। अब तक फर्जी उपनामों से पुलिस को चकमा देता रहा गुरुजी, जिसके भाई ने गिरफ्तारी के बाद उसके नाम से पर्दा उठाया है। मास्टरमाइंड का असली नाम पुष्पेंद्र है, जबकि उसे राज, नीतू और गुरुजी अलग अलग नाम से जाना जाता था। पकड़े गए मास्टरमाइंड के भाई ने पुलिस को बताया कि उसका भाई अब तक शिक्षा विभाग में कई जालसाजियां कर चुका है। पूरे प्रदेश में चल रहे अनामिका प्रकरण का वो ही मास्टरमाइंड है।

पकड़े गए जालसाज जसवंत और उसके मास्टरमाइंड भाई राज का गिरोह पिछले सात सालों से फर्जी डिग्रियों पर नौकरी दिलाने का गोरखधंधा चला रहे थे। सात साल पहले उन्होंने एक युवती को दीप्ति नाम से वाराणसी के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में नौकरी दिलाई थी। वाराणसी में दीप्ति की नौकरी से शुरू हुआ यह खेल कासगंज में अनामिका शुक्ला के नाम से नौकरी कर रही सुप्रिया की गिरफ्तारी के बाद खुला।

इन 7 वर्षों में गिरोह ने अलीगढ़, सहारनपुर, रायबरेली, फैजाबाद, अमेठी सहित तमाम जिलों में फर्जी नियुक्तियां कराई थीं। गिरफ्तार जसवंत ने 20 फर्जी नियुक्तियां कराए जाने की बात कबूली है।

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