IAS अधिकारी ने बदल दी सैकड़ों मजदूर मां-बाप के बच्चों की ज़िंदगी, लाईब्रेरीमैन के नाम से हैं मशहूर

दीपक के पिता 200 रूपये की रोजाना आमदनी पर वैल्डिंग का खुला काम करते हैं और माता रोज 9 से 10 घंटे एक फैक्ट्री में खपाती है, ऐसे में तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े दीपक के मुताबिक, हमारे माता-पिता के लिए यह संभव नहीं था कि मैं 12वीं के लिए अलग से ट्यूशन करूं .....

Update: 2020-07-24 01:30 GMT

अवधेश पारीक की रिपोर्ट

हनुमानगढ़। हौसले बुलंद और इरादे मजबूत तो हर मंजिल तक पहुंचा जा सकता है, ये हमने सुना है लेकिन इस सफर में अगर सुविधा और संसाधनों का सही समय पर साथ मिले तो तय लक्ष्य हासिल करना थोड़ा आसान हो जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है हनुमानगढ़ की न्यूकुंजा बस्ती के रहने वाले दीपक मेवता की जिनका हाल में आया 12वीं बोर्ड का परिणाम इस बात की तस्दीक करता है।

राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय की 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले दीपक ने विज्ञान संकाय में 82% अंक हासिल किए हैं। दीपक इसका श्रेय अपने स्कूल और बस्ती में बनी लाइब्रेरी को देते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि दीपक परिणाम इतना अहम क्यों है तो इसे जानने के लिए आपको थोड़ा फ्लैशबैक में चलना होगा।


 दीपक का परिणाम और लाईब्रेरी

दरअसल दीपक ने अपनी स्कूल की पढ़ाई के अलावा परीक्षा की पूरी तैयारी बस्ती में खुली लाईब्रेरी में रहकर की। न्यूकुंजा बस्ती में माइकल फैराडे लाईब्रेरी एंड रीडिंग रूम नाम से लाईब्रेरी की पहल यहां पूर्व में नियुक्त आईएएस अधिकारी पीसी किशन ने की थी, जिसके बाद दीपक जैसे सैकड़ों बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहन और सुविधाएं मिली।

दीपक बताते हैं कि लाईब्रेरी में परीक्षा संबंधी कई जरूरी किताबें मुझे मिली और हम जिस बस्ती में रहते हैं वहां लाईब्रेरी खुलने के बाद बच्चों का किताबों से लगाव बढ़ा और पढ़ने में काफी मदद मिली। गौरतलब है कि इस साल के बोर्ड परीक्षा परिणाम में इसी बस्ती में रहने वाले सैकड़ों बच्चों ने अच्छे अंकों से 12वीं या 10वीं परीक्षा पास की है।

नेशनल लेवल पर शतरंज चैंपियन हैं दीपक

दीपक बताते हैं कि लाईब्रेरी में किताबों के अलावा और भी कई तरह की खेल सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई। जहां हम मनोरंजन के लिए शतरंज भी खेलते हैं। लाईब्रेरी में पढ़ाई के अलावा शतरंज और कई अन्य खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई जाती हैं। दीपक ने 12 साल उम्र के समूह में जिले से लेकर नेशनल लेवल तक शतरंज खेला है और इसमें वह नेशनल लेवल चैंपियन भी रहा है।

माता-पिता करते हैं मजदूरी

आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनने का सपना ऱखने वाले दीपक के पिता 200 रूपये की रोजाना आमदनी पर वैल्डिंग का खुला काम करते हैं और माता रोज 9 से 10 घंटे एक फैक्ट्री में खपाती है।

ऐसे में तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े दीपक के मुताबिक, हमारे माता-पिता के लिए यह संभव नहीं था कि मैं 12वीं के लिए अलग से ट्यूशन करूं ऐसे में लाईब्रेरी का खुलना मेरे और हमारे बस्ती के बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं था।

पूर्व IAS ने गांव में खुलवाई थी कई लाईब्रेरी

आज बस्ती के बच्चों में जिस लाईब्रेरी की बदौलत पढ़ाई को लेकर जो उत्साह है उसका श्रेय जाता है आईएएस अधिकारी पीसी किशन को जो 2013 से 2016 तक हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में कलेक्टर पद पर रहे। वर्तमान में किशन मनरेगा में आयुक्त के पद पर हैं।


जिले में लाईब्रेरीमैन नाम से प्रसिद्ध आईएएस अधिकारी पीसी किशन ने बताते हैं कि, जब मैं कलेक्टर के पद पर वहां गया तो देखा कि बस्ती इलाकों में लोगों की कम आमदनी होने के साथ पढ़ाई का स्तर बहुत खराब था और बच्चों में शिक्षा का स्तर बहुत कमजोर था, ऐसे में मैंने बस्तियों के हिसाब से यहां पुरानी पड़ी सरकारी इमारतों को इस्तेमाल करने का सोचा और ऐसे ही लाईब्रेरी खोलने का विचार जमीन पर उतरा।

आगे वह जोड़ते हैं कि समाज में असमानताएं आर्थिक और सामाजिक रूप से व्यापत है ऐसे में कमजोर तबकों के सुधारीकरण में शिक्षा ही एक ऐसा जरिया है जिससे हम आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं, अगर हम सही दिशा में प्रयास करें।

शिक्षा को सुधारीकरण की पहली सीढ़ी मानने वाले पीसी किशन ने अपने कार्यकाल के दौरान हनुमानगढ़ में 39 लाईब्रेरी और श्रीगंगानगर में इसी दौरान 15 लाइब्रेरी की शुरूआत की। एक सरकारी अधिकारी की इस पहल को देखकर समाज के प्रभुत्व वर्गों के लोग भी आगे आए और सहयोग किया

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