Sand Crush News : महाराष्ट्र के जालना में तलाशा गया रेत का विकल्प सैंड क्रश, पर्यावरण के लिए भी है बेहतर

Sand Crush News : नदी से मिलने वाली रेत से यह गुणवत्ता के मामले में कई गुना बेहतर है। एक रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई ताजा स्टडी में भी इसे बेहतर माना गया है। जालना एमआईडीसी की 25 कंपनियों में रोजाना 8 से 10 हजार टन सरिया उत्पादन होता है...

Update: 2022-06-14 09:15 GMT

Sand Crush News : महाराष्ट्र के जालना में तलाशा गया रेत का विकल्प सैंड क्रश, पर्यावरण के लिए भी है बेहतर

Sand Crush News : जलवायू प्रदूषण के कारण पर्यावरण को हो रहे नुकसान को कम करने की दिशा में महाराष्ट्र का जालना जिला एक मिसाल पेश कर रहा है। दरअसल, नदियों से बेतहाशा रेत खनन, पर्यावरण को नुकसान और रेत की कमी को देखते हुए महाराष्ट्र के जालना में इस्पात उद्योग से जुड़े लोगों ने सैंड क्रश (Sand Crush News) के रूप में इसका विकल्प ढूंढ लिया है। जालना के उद्यमी रोजाना 250 टन सैंड क्रश बना रहे हैं।

क्या है सैंड क्रश? 

नदी से मिलने वाली रेत से यह गुणवत्ता के मामले (Sand Crush News) में कई गुना बेहतर है। दैनिक भास्कर के लिए कृष्णा तिडके की लिखी एक रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई ताजा स्टडी में भी इसे बेहतर माना गया है। जालना एमआईडीसी की 25 कंपनियों में रोजाना 8 से 10 हजार टन सरिया उत्पादन होता है। कबाड़ पिघलाने के बाद लोहे पर जमी परत का मिट्टी मिश्रित स्लैग के उपर जमा होता है। कंपनियां इसे फेंक देती थीं। इसके चलते ​डंपिंग यार्ड में स्लैग के ढेर लग गए थे।

इससे निजात पाने के लिए उद्यमी नितिन काबरा ने 2007 में इस वेस्ट से रेत (Sand Crush News) बनाने का काम शुरू किया। अब सभी 25 कंपनियां इसमें जुटी हैं। काबरा ने सबसे पहले अपनी ही कंपनी में निर्माण में सैंड क्रश इस्तेमाल की। इससे बाकी उद्यमी भी प्रेरित हुए अब शहर में एक साल तक निर्माण के लिए जरूरी सैंड क्रश बन पा रही है।

सैंड क्रश से क्या फायदा होगा?

काबरा बताते हैं कि इससे निर्माण खर्च में खासी बचत हुई है। नदी की रेत में काली मिट्टी भी होती है। इससे बाद में दरारें पड़ने लगती है। जबकि सैंड क्रश में मिट्टी नहीं होने से यह ज्यादा मजबूत होती है। सामान्य रेत 1 हजार से 1600 रुपए प्रति टन जबकि सैंड क्रश (Sand Crush News) 400 रुपए प्रति टन में मिल जाती है। आईआईटी कानपुर और जालना के तंत्र निकेतन कॉलेज की टेस्टिंग में इसकी गुणवत्ता अच्छी पायी गयी थी। नदियों के एक्सपर्ट डॉ. संजय पाटिल कते हैं, रेत की निकासी रोकनी जरूरी है। नदी में रेत से पानी का बहाव धीमा होता है। इससे वाटर लेवल बढ़ता है, रेत पानी को फिल्टर भी करती है। 

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