दुनियाभर में बढ़ रहे हैं डिप्रेशन के मामले, 30 करोड़ में से सिर्फ भारत में डिप्रेशन के 5 करोड़ से ज्यादा मरीज, महिलाओं की संख्या सर्वाधिक !
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जनस्वास्थ्य चिकित्सक डॉ. एके अरुण की टिप्पणी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) द्वारा जारी ताजा आँकड़ों में दुनियाभर में लगभग 30 करोड़ से भी अधिक लोग डिप्रेशन की समस्या से ग्रसित है। भारत में यह आंकड़े 5 करोड़ या फिर इससे भी ज्यादा है, जो कि एक गंभीर मामला है। यह डिप्रेशन पुरुषों की तुलना में महिलाओं में सबसे अधिक देखा जा रहा है। मानसिक परिस्थितियों के अलावा डिप्रेशन हार्मोनल असंतुलन, गर्भावस्था और अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है।
डिप्रेशन से पीड़ित लोग अपने मन में सुसाइड करने तक का विचार ले आते है,और कई तो कर भी लेते है। डिप्रेशन के मामले दिन-प्रतिदिन क्यों बढ़ रहे हैं यह समझना जरूरी है!
मेरे विचार में तो इसका जिम्मेदार हमार समाज ही है। यह उपभोक्तावादी दौर है और इसमें इंसान से ज़्यादा पैसे की अहमियत हो गई है। मानवीय रिश्ते लगभग ख़त्म हो चुके हैं। ऐसे में यही डिप्रेशन बाइपोलर डिसऑर्डर और अन्य गंभीर मानसिक रोगों में तब्दील हो रहा है।
डिप्रेशन के मुख्य लक्षण
डिप्रेशन के लक्षण की संख्या और तीव्रता के आधार पर विभिन्न प्रकार के होते हैं, जो हलके से लेकर गंभीर तक हो सकते है। इसके सफल इलाज के लिए प्रत्येक व्यक्ति का परीक्षण बेहद ज़रूरी होता है। प्रत्येक व्यक्ति में डिप्रेशन का कारण और लक्षण अलग-अलग होते हैं,जैसे हर समय चेहरे में उदासी, थकावट और कमज़ोरी महसूस करना।खुद को अयोग्य या फिर दोषी मानना। अकेले रहना और किसी से भी बात न करना। नींद ना आना,मन में उल्टे-सीधे ख्याल का आना। बेचैनी महसूस होना। वजन अचानक से बढ़ जाना या फिर कम हो जाना,आदि।
डिप्रेशन से बचने के लिए क्या करें
डिप्रेशन से बाहर आना है तो सबसे पहले अपना खानपान दुरुस्त करें। अपने भोजन में नट्स, फैटी फिश, एवोकाडो,ऑलिव ऑयल और ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड को शामिल करें।
सुबह-सुबह व्यायाम करना नेचुरल एंटी डिप्रेसेंट माना जाता है। अगर आप हर दिन कम से कम 30 मिनट का व्यायाम या वर्कआउट करते हैं तो इससे मूड काफी बेहतर होता है। मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में मेडिटेशन भी गजब काम आता है। डीप ब्रीदिंग, मंत्र उच्चारण जैसी एक्टिविटी से भी दिमाग को शांति मिलती है और पॉजिटिविटी बढ़ती है।
डिप्रेशन से बचने में अच्छी नींद आपकी काफी मदद कर सकता है, इसलिए हमेशा पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। इससे मूड सुधारने वाले हार्मोंस बढ़ते हैं और मानसिक तौर पर आप मजबूत बनते हैं। डिप्रेशन में जाने के बाद अकेलापन महसूस होता है। किसी से मिलने-जुलने का मन नहीं करता और न ही बात करने का। ऐसे में थोड़ी ही हिम्मत कर बाहर निकलें और अपनों से मिलकर बातचीत करें यह काफी फायदेमंद साबित होगा। जो काम करना आपको सबसे ज्यादा पसंद हो, उसे करने की कोशिश करें। अपनी पसंदीदा फिल्म देखें,किताब पढ़ें, डायरी लिखें। इससे आप बेहतर महसूस करेंगे और निगेटिव थॉट्स भी आपके दूर होंगे।
(हील इनिशिएटिव)