सांप का फन काटने के कितनी देर बाद तक जहर रहता है असरदार, पहली बार पढ़ें चीनी सेफ की मौत की पूरी कहानी

जिस तरह से शेफ पेंग की 20 मिनट बाद कटे हुए सांप के फन से डंसने से मौत हुई, उसे सवाल उठता है कि क्या ऐसा वाकई संभव है? क्या सांप मर जाए और उसके धड़ के कई टुकड़े हो जाए तो भी वो जिंदा रहता है? ऐसे तमाम सवाल आपके मन में भी उठ रहे होंगे....

Update: 2021-08-30 16:00 GMT

मोना सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। हमारे देश में एक कहावत है कि जहरीले सांप का फन कुचल ही देना चाहिए। वरना अंजाम कुछ भी हो सकता है। लेकिन शायद ही हमलोगों ने इसके पीछे की असली वजह के बारे में कभी ध्यान दिया हो। ये खबर जब आप पूरी पढ़ेंगे तो समझ जाएंगे कि इस कहावत के पीछे बड़ी वजह क्या है। क्योंकि मरे हुए सांप के फन ने जिंदा इंसान को डंस लिया। और उस इंसान की मौत हो गई।

चौंकाने वाली बात है कि जिस इंसान ने इस सांप को 20 मिनट पहले टुकड़ों में काटकर मार डाला था उसी कटे हुए सांप ने इस इंसान को डंस लिया था। यानी मौत के बाद 20 मिनट बाद भी सांप के फन के डंसने से इंसान की कुछ देर में ही मौत हो गई। इस घटना पर भले ही आपको यकीन ना हो।

और आप भी सोचें कि आखिर ये कैसे हुआ होगा। मन में ये भी सवाल आ रहे होंगे कि क्या वाकई मरा हुआ सांप भी इंसान को डंस सकता है? क्या सांप को काट दिए जाने के बाद भी उसके फन में विष भरा रहता है? क्या सांप का फन वाला हिस्सा धड़ से कट जाने के बाद भी काफी देर तक जिंदा रहता है? आगे इन सभी सवालों का जवाब मिलेगा।

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घटना चीन की है, सांप का सूप बना रहा था शेफ

दिल दहलाने वाली ये घटना चीन की है। आपको शायद पता भी हो कि चीन में सांप का सूप और मांस खाना आम बात है। होटलों के मेन्यू में भी सांपों से बने विभिन्न प्रकार के व्यंजन और सूप शामिल होते हैं। ये घटना चीन के गुआंगडोंग प्रांत की है।

दरअसल, यहां एक रेस्तरां सांपों के सूप के लिए काफी फेमस है। इस रेस्तरां का फेमस शेफ कोबरा सांप को काटकर उसका फन वाला हिस्सा अलग प्लेट में रख दिया। और सांप के धड़ वाले हिस्से का सूप बनाने की तैयारी करने लगा। सांप को काटने के करीब 20 मिनट बाद वो शेफ कटे हुए फन को प्लेट के साथ कूड़े के डिब्बे में फेंकने जा रहा था। तभी उस कटे हुए फन ने ही शेफ के हाथ में डंस लिया। कुछ देर बाद ही शेफ की मौत हो गई। मरने वाले शेफ की पहचान पेंग के रूप में हुई।

क्यों हुआ ऐसा

चीनी नागरिक जिस कोबरा सांप का सूप बना रहा था वो सांप दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक है। इसके डंसने से 30 मिनट के भीतर मौत हो जाती है। लेकिन इस बीच अगर एंटी वेनम यानी जहर को खत्म करने वाला इंजेक्शन दे दिया जाए तो इंसान की जान बच सकती है। लेकिन चीनी नागरिक पेंग के साथ ऐसा हुआ नहीं हुआ। उसे आधे घंटे के भीतर एंटी वेनम इंजेक्शन नहीं मिल पाया और उसकी मौत हो गई।

90 मिनट तक जिंदा रहता है जहरीले सांप का फन

जिस तरह से शेफ पेंग की 20 मिनट बाद कटे हुए सांप के फन से डंसने से मौत हुई, उसे सवाल उठता है कि क्या ऐसा वाकई संभव है? क्या सांप मर जाए और उसके धड़ के कई टुकड़े हो जाए तो भी वो जिंदा रहता है? ऐसे तमाम सवाल आपके मन में भी उठ रहे होंगे। तो यहां बता दें कि हां ऐसा संभव है।

क्योंकि सांप को मारने या काटने के बाद भी उसका फन जीवित रहता है। कैरोलिना यूनिवर्सिटी के सर्प विशेषज्ञ सेन पुश के अनुसार, सांप का फन कट जाने के बाद भी करीब 90 मिनट तक जीवित रहता है। यानी वो इस दौरान तक किसी को डंस सकता है। इसके पीछे वैज्ञानिक वजहें भी हैं।

दरअसल, सांप यानी रेपटाइल्स वर्ग के जीवों का मेटाबॉलिज्म यानी उपापचय क्रिया की दर इंसानों की तुलना में बहुत कम होती है। उपापचय मतलब पाचन क्रिया। और ये दर कम होने का मतलब है कि जिसकी पाचन दर जितनी कम होगी उसके शरीर के अंदर का भोजन उतनी ही देर बाद पचेगा। यानी इसका मतलब है कि ये है कि एक बार भरपेट खाना खा लिया तो उसे फिर से बहुत देर बाद भूख लगेगी। उदाहरण के लिए कई सांप ऐसे होते हैं कि कई सांप साल भर में एक बार भरपेट खाना खाते हैं।

उपापचय क्रिया धीमे होने की वजह से शरीर के अंदरूनी अंग मरने के बाद भी काफी समय तक जीवित रहते हैं। मेटाबॉलिज्म दर कम होने की वजह से सांपों की नरम कोशिकाओं में मौजूद आयन सक्रिय रहते हैं। इसलिए जब तुरंत मरे हुए सांप के साथ छेड़छाड़ की जाती है तो नरम वाहिकाएं सक्रिय हो उठती हैं। और शरीर में गति आ जाती है। यह गतिविधि मांसपेशियों में गति उत्पन्न करती है और काटने और डंसने जैसी प्रक्रिया को प्रेरित करती है।

कोबरा और रैटल जैसे विषैले सांपों में मरने के कई घंटे बाद तक काटने या डंसने वाली चेतना दिमाग में सक्रिय रहती है। सामान्य तौर पर माना जाता है कि सांपों के मरने के कुछ घंटों तक चेतना बाकी रहती है। यह गुण ठंडे खून वाले कशेरुकी जंतुओं में खासतौर पर पाया जाता है। इसीलिए इस केस में शेफ ने जब सांप को काटने के 20 मिनट बाद उसके फन वाले हिस्से को डस्टबीन में डालने गया तभी सक्रिय सांप के फन ने उसे डंस लिया।

इन देशों में सांप है भोजन का साधन

सांप विश्व के किन देशों में भोजन के रूप में खाए जाते हैं? अब आपके मन में ये भी सवाल आ रहा होगा। तो आपको बता दें कि उत्तर पश्चिम वियतनाम और चीन में लोग सांप से बने व्यंजन खाते हैं। वियतनाम की राजधानी हनोई से 3 घंटे की दूरी पर उत्तर पश्चिम में स्थित प्रांत निवाई के रेस्टोरेंट में सांप से बने व्यंजन परोसे जाते हैं। लोगों का मानना है कि ये बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक होते हैं। सांपों को लेमनग्रास (नींबू घास) के साथ उबालकर या फिर मिर्च के साथ फ्राई करके खाया जाता है। और उनके खून को एक खास किस्म की शराब के साथ मिलाकर परोसा भी जाता है। सांप के सिर यानी फन वाले हिस्से को किसी भी तरह से खाने या सूप बनाने के प्रयोग में नहीं लाया जाता है। लेकिन सिर वाले हिस्से के अलावा जो हिस्सा बचता है उसे खाने में खूब प्रयोग किया जाता है। इस हिस्से से अलग-अलग तरह की डिश तैयार करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

सांप खाने के क्या हैं फायदे

उत्तरी वियतनाम और चीन में माना जाता है कि सांप का मीट खाने से शरीर ठंडा रहता है। बुखार में आराम काफी आराम मिलता है। सिर दर्द में राहत मिलती है। ये आसानी से हजम होता है। हड्डियों के लिए अच्छा होता है। हड्डियां मजबूत होती हैं। सांप वाली वाइन सिर्फ 50 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों को पीनी चाहिए। ऐसी धारणा है कि अगर 50 साल से कम उम्र के लोग शराब में सांप के खून को मिलाकर सेवन करते हैं तो उन्हें नपुंसकता हो सकती है।

चीन में होती है सर्प फार्मिंग भी

सर्प पालन यानी स्नेक फॉर्मिंग भी चीन में होती है। चीन के जीसीकी आओ नामक गांव में सांपों को पालने का काम होता है। और ये सांप बेहद जहरीले होते हैं। यहां प्रतिवर्ष कम से कम 30 लाख सांप पैदा होते हैं। इस गांव की आबादी महज एक हजार है। पहले इस गांव में चाय कपास और जूट का उत्पादन होता था। लेकिन अब यह स्नेक फॉर्मिंग के लिए प्रसिद्ध हो गया है। यहां साधारण यानी कम जहरीले सांपों से लेकर दुनिया के सबसे जहरीले सांपों की भी खेती की जाती है। मसलन, अजगर. कोबरा, वाईपर जैसे जहरीले सांपों की भी फॉर्मिंग की जाती है।

इसके अलावा एक विशेष तरह किस्म का भी सांप है। जिसका नाम है 5-स्टेप है। जो इतना जहरीला है कि इसके काटने के महज 5 कदम चलने पर ही इंसान की मौत हो जाती है। यानी कुछ मिनट या सेकेंड में ही इंसान की मौत हो जाती है। वह भी यहां के फॉर्म में उपलब्ध है। स्नेक फॉर्मिंग में पाले गए सांपों का मांस व शरीर के अंग जैसे आंखें स्किन और ब्लड दवा बनाने के काम में आते हैं।

80 के दशक में यांग होंग चांग नामक शख्स ने अपनी जमा पूंजी लगाकर स्नेक फॉर्म शुरू की थी। इसके बाद उसने अपने गांव वालों को भी इसे सिखाया। इस गांव में तीन उद्देश्यों के लिए अलग-अलग तरीके से सांपों को पाला जाता है। एक हिस्से में सिर्फ वाइपर सांप पैदा किए जाते हैं ताकि इनका जहर भेजा जा सके। दूसरे हिस्से में ऐसे सांपों को पाला जाता है जिनका मांस पसंद किया जाता है।

तीसरे हिस्से में सांपों को दवा बनाने के लिए ब्रीडिंग यानी प्रजनन कराई जाती है। एक फॉर्म में लकड़ी और शीशे के छोटे-छोटे बच्चों में सांपों को पाला जाता है। ताकि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो प्लास्टिक की थैलियों में भरकर इन्हें दूसरी जगह बढ़ने के लिए ले जाते हैं।

दुनिया में सिर्फ 20% सांप ही जहरीले

दुनिया भर में सांपों की 3000 से भी ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें से लगभग 20% जहरीली होती हैं। भारत में लगभग 300 प्रजातियां पाई जाती हैं। जिनमें से 50 जहरीली हैं। न्यूजीलैंड, आईसलैंड और अंटार्कटिका ऐसे देश हैं जिसमें सांप बिल्कुल नहीं पाए जाते हैं। जबकि ब्राजील में दुनिया भर में सबसे ज्यादा सांप पाए जाते हैं।

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