भारत की अर्थव्यवस्था के लिए प्रदूषण बड़ा खतरा, हर साल लगभग 17 लाख​ जिंदगियां चढ़ जाती हैं प्रदूषण की भेंट !

प्रदूषण मनुष्य के फेफड़े, हृदय, मस्तिष्क और तंत्रिका संबंधी रोगों, जैसे अस्थमा, कैंसर, स्ट्रोक और डिमेंशिया का कारण बन रहा है। बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोग इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जो प्रतिदिन हजारों अकाल मौतों की वजह बन रहा है...

Update: 2026-01-24 15:40 GMT

देशभर में प्रदूषण बिगाड़ रहा मौसम का मिजाज, खुली हवा में सांस लेना हुआ दूभर

Pollution and Indian economy: भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर आईएमएफ की पूर्व डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर तथा भारतीय मूल की जानी मानी अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था पर यहाँ का प्रदूषण बहुत गंभीर प्रभाव डाल रहा है।उनकी नजर में ग्लोबल टैरिफ से कहीं ज़्यादा भारत में प्रदूषण अर्थव्यवस्था के लिए ज़्यादा खतरनाक है। उन्होंने कहा है कि इसे देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता के तौर पर निपटाना चाहिए। वे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में भारतीय अर्थव्यवस्था पर चर्चा के दौरान यह बातें कही। सुश्री गोपीनाथ ने बताया कि व्यापार बढ़ाने की चर्चाओं में अक्सर व्यापारिक बाधाओं और नियमों पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन प्रदूषण के आर्थिक असर को कम करके आंका जाता है।

वर्ष 2022 में जारी वर्ल्ड बैंक की स्टडी का हवाला देते हुए गोपीनाथ ने बताया कि भारत में हर साल प्रदूषण के कारण लगभग 17 लाख लोगों की मौत हो जाती है। यह देश में होने वाली कुल मौतों का करीब 18 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, 'अगर आप भारत में प्रदूषण के स्तर के कारण जीडीपी पर पड़ने वाले सालाना खर्च को देखें, तो यह सिर्फ आर्थिक गतिविधियों पर असर नहीं है, बल्कि लोगों के क़ीमती जीवन का नुकसान भी है। ये आंकड़े वाकई बहुत बड़े हैं।' उन्होंने आगे कहा कि इसका असर परिवारों, काम करने की क्षमता और लंबे समय के विकास पर पड़ता है।

निवेशकों का भरोसा दांव पर

प्रोफेसर गोपीनाथ ने यह भी कहा कि प्रदूषण भारत को निवेश के लिए एक आकर्षक जगह बनाने में भी बाधा डालता है। उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय निवेशक के नजरिए से अगर वे भारत में अपना काम शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं और उन्हें वहीं रहना है। अगर वहां का माहौल ऐसा नहीं है कि उन्हें लगे कि यह उनके स्वास्थ्य के लिए ठीक रहेगा, तो वे पीछे हट जाते हैं।

प्रदूषण से आम लोगों की जान खतरे में 

प्रदूषण मनुष्य के फेफड़े, हृदय, मस्तिष्क और तंत्रिका संबंधी रोगों, जैसे अस्थमा, कैंसर, स्ट्रोक और डिमेंशिया का कारण बन रहा है। बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर स्वास्थ्य वाले लोग इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जो प्रतिदिन हजारों अकाल मौतों की वजह बन रहा है।

तो क्या करें ?

सार्वजनिक प्रदूषण के मुख्य तत्वों को नियंत्रित करने की रणनीति पर विचार करने की जरूरत है। व्यक्तिगत तौर पर हमें ज़्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता है। (हील मीडिया)

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