Farmer's Law Repealed: वो दिन दूर नहीं जब CAA कानून भी वापस लेगी मोदी सरकार: AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी

Farmer's Law Repealed: AIMIM प्रमुख ने इस फैसले को भाजपा का चुनावी एजेंडा बताते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने खुद को और अपनी पार्टी को बचाने के लिए यह फैसला किया है...

Update: 2021-11-19 08:53 GMT

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Farmer's Law Repealed: केंद्र सरकार द्वारा 3 कृषि कानूनों वापस लेने के बाद तमाम राजनैतिक पार्टियों की प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी क्रम में AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने कहा कि कृषि कानून वापस लेने के बाद वो दिन दूर नहीं जब सरकार को CAA कानून भी वापस लेना पड़ेगा। केंद्र सरकार पर हमलावर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि "जब जनता विरोध के लिए सड़क पर उतर जाती है तो सरकार उससे डरती है।" AIMIM प्रमुख (AIMIM Chief Owaisi) ने कहा है कि सरकार ने कृषि कानूनों को रद्द करने का फ़ैसला देरी से लिया है। यह किसान आंदोलन (Farmers Protest) और किसानों की सफलता है।
कृषि कानूनों के विरोध में एक साल से देशभर में चल रहे किसान आंदोलन (Farmers protest) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा, "यह सरकार डरती है जब जनता सड़क पर निकलकर विरोध करती है। पहले सीएए-एनआरसी(CAA-NRC) का प्रोटेस्ट और दूसरा किसानों का आंदोलन यह बताता है कि इस सरकार को आने वाले विधानसभा चुनावों में अपनी हार नजर आ गई है।" AIMIM प्रमुख ने इस फैसले को भाजपा का चुनावी एजेंडा बताते हुए कहा कि "नरेंद्र मोदी ने खुद को और अपनी पार्टी को बचाने के लिए यह फैसला किया है। वो दिन दूर नहीं है जब मोदी सरकार CAA कानून को भी वापस लेगी। ये सब गैर संवैधानिक कानून हैं।"
ओवैसी ने CAA Act को कहा 'काला कानून'
बता दें कि 2019 में ओवैसी ने नागरिकता संशोधन एक्‍ट को 'काला कानून' कहा था। उन्‍होंने इस बिल के विरोध में हो रही हिंसा की निंदा भी की थी। वहीं, आज दो साल बाद जब मोदी सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया तो ओवैसी ने सीएए-एनआरसी कानून को वापस लेने की मांग भी रखी। ओवैसी ने इस मौके पर अपने ट्विटर पर एक शेर भी लिखा-

दहन पर हैं उन के गुमाँ कैसे कैसे

कलाम आते हैं दरमियाँ कैसे कैसे

ज़मीन-ए-चमन गुल खिलाती है क्या क्या

बदलता है रंग आसमाँ कैसे कैसे

क्या है CAA-NRC कानून
भाजपा सरकार द्वारा दिसंबर 2019 में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित किया गया। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन गया है जिसका देश में बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हुआ। नागरिकता संशोधन कानून 2019 के तहत भारत में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया। पहले किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल इस देश में रहना अनिवार्य था। मगर नए नियम में अवधि को एक साल से लेकर 6 साल किया गया।
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