मध्य प्रदेश में 150 से ज्यादा किसान नेताओं की गिरफ्तारी, संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया सरकार की हताशा का परिणाम

Indore news : मध्य प्रदेश में किसान नेताओं की धारा 151 के तहत गिरफ्तारी की गई है, जो अनावश्यक, अलोकतांत्रिक एवं संविधान विरोधी है...

Update: 2024-02-12 17:42 GMT

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इंदौर। संयुक्त किसान मोर्चा और उससे जुड़े संगठनों के मध्य प्रदेश में अलग-अलग जिलों में गिरफ्तार किए गए 150 से ज्यादा किसान नेताओं की गिरफ्तारी की इंदौर के किसान नेताओं ने कड़ी निंदा की और इसे डबल इंजन सरकार की हताशा का परिणाम बताया है।

संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि 16 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठन और मजदूर संगठन मिलकर ग्रामीण भारत बंद और औद्योगिक हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं। व्यापक तैयारी को देखते हुए सरकार अभी से हताश हो गई है और पूरे प्रदेश में किसान नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हो गई है।

संयुक्त किसान मोर्चा की इंदौर‌ इकाई के नेता रामस्वरूप मंत्री, बबलू जाधव, शैलेंद्र पटेल, चंदन सिंह बड़वाया, लाखनसिंह डाबी आदि ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े विभिन्न किसान संगठनों के नेताओं को 11 फरवरी को अलग-अलग जिलों में गिरफ्तार किया गया है, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा रीवा के संयोजक एड शिवसिंह, किसान सभा के जिला महासचिव रामजीत सिंह, शहीद राघवेंद्र सिंह किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह शंखू, अरुण पटेल, एडवोकेट शिवपाल सिंह, शोभनाथ कुशवाह, संत पटेल को गिरफ्तार कर रीवा जेल भेज दिया गया।

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मुलताई में किसान संघर्ष समिति की प्रदेश उपाध्यक्ष एडवोकेट आराधना भार्गव को मुलताई थाना प्रभारी द्वारा गिरफ्तार कर बैतूल जेल भेज दिया गया। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव को एमपी नगर भोपाल थाना तथा महेंद्र सिंह तोमर को गिरफ्तार कर राजगढ़ थाना लाया गया। किसान सभा के वरिष्ठ नेता रामनारायण कुरेरिया एवं उनके साथी अनिल सल्लाम को लखनादौन थाना एवं उनकी पत्नी महिला नेत्री अंजना कुररिया को जबलपुर से गिरफ्तार किया गया है। वहीं एनएपीएम के राजकुमार सिन्हा को जबलपुर जेल भेजा गया है।

ग्वालियर में किसान संघर्ष समिति के जिला उपाध्यक्ष शत्रुघ्न यादव को भी गिरफ्तार किया गया है। छिंदवाड़ा में किसान संघर्ष समिति के प्रमुख किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। शिव कुमार कक्का जी को भोपाल में गिरफ्तार किया गया है। इसी तरह से विभिन्न जिलों में डेढ़ सौ से ज्यादा किसान नेताओं की गिरफ्तारी की गई है। इंदौर में भी ऐसी ही कोशिश हो रही है और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान नेताओं को पुलिस द्वारा फोन कर चर्चा के लिए थाने पर बुलाया जा रहा है। इंदौर के अधिकांश नेता भूमिगत हो गए हैं। पुलिस द्वारा चर्चा के लिए किसान नेताओं को थाने पर बुलाया जा रहा है और वहीं से सीधे जेल भेजा जा रहा है। सरकार का यह कदम अत्यंत निंदनीय और हताशा तथा तानाशाही का परिचायक है।

मध्य प्रदेश के संयुक्त किसान मोर्चा के साथ 27 किसान संगठन जुड़े हैं तथा संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किसानों और मजदूरों के मुद्दों को लेकर अहिंसात्मक तरीके से आंदोलन किये जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में किसान नेताओं की धारा 151 के तहत गिरफ्तारी की गई है, जो अनावश्यक, अलोकतांत्रिक एवं संविधान विरोधी है।

संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठन किसान संघर्ष समिति और भारतीय किसान मजदूर सेना के रामस्वरूप मंत्री और बबलू जाधव ने प्रदेश के सभी किसान नेताओं की तत्काल रिहाई की मांग करते करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार किसानों को सभी कृषि उत्पादों की एमएसपी ;सी.2 ़ 50ःद्ध पर खरीदी की कानूनी गारंटी, सभी किसानों की सम्पूर्ण क़र्ज़ा मुक्ति, किसानों को प्रति माह 10 हजार रुपए पेंशन, राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम वेतन प्रति माह 26,000 रूपये कराने, मजदूर विरोधी चार श्रम संहिता वापस लेने, मनरेगा मजदूरों को 200 दिन, 600 रूपये प्रतिदिन की मजदूरी देने, अनावारी की इकाई पटवारी हल्का की जगह किसान का खेत बनाने, आवारा पशुओं से नष्ट हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग करते रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा एवं श्रमिक संगठनों द्वारा 16 फरवरी को किए जा रहे ग्रामीण बंद और औद्योगिक हड़ताल का समर्थन किया है। 

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