'विधानसभाकर्मियों की बर्खास्तगी पर धामी सरकार कर रही मीठा-मीठा गप्प-गप्प, कड़वा-कड़वा थू-थू' भाकपा माले हुई हमलावर

यह कितना विचित्र विरोधाभास है कि उत्तराखंड सरकार और विधानसभा अध्यक्ष नियम विरुद्ध नियुक्ति पाये कर्मचारियों की बर्खास्तगी का श्रेय तो लेना चाहते हैं, लेकिन इन नियम विरुद्ध नियुक्तियों को करने वालों के खिलाफ कार्यवाही के सवाल पर मुंह नहीं खोलना चाहते...

Update: 2022-12-15 15:10 GMT

'विधानसभाकर्मियों की बर्खास्तगी पर धामी सरकार कर रही मीठा-मीठा गप्प-गप्प, कड़वा-कड़वा थू-थू' भाकपा माले हुई हमलावर

Dehradun news : उच्चतम न्यायालय द्वारा उत्तराखंड विधानसभा के बर्खास्त तदर्थ कर्मचारियों की याचिका खारिज किए जाने के बाद नियम विरुद्ध नियुक्ति करने वाले विधानसभा अध्यक्षों के खिलाफ कार्यवाही के लिए भाकपा माले के गढ़वाल प्रभारी इंद्रेश मैखुरी ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है।

बर्खास्त कर्मचारियों की सुप्रीम कोर्ट से खारिज याचिका के बाद भाकपा माले नेता ने कहा कि यह पुनः स्पष्ट है कि यह नियुक्तियाँ नियम विरुद्ध हुई थी। उच्च न्यायालय की डबल बेंच के बाद उच्चतम न्यायालय के इस फैसले ने विधानसभा में नियुक्तियों में धांधली होने की बात पर मोहर लगा दी है। अब इस फैसले के बाद तत्काल उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए, जिन्होंने बिना सार्वजनिक विज्ञप्ति और अन्य प्रक्रिया के, अयोग्य, अक्षम लोगों की सैकड़ों की संख्या में विधानसभा में नियुक्ति की थी।

माले नेता मैखुरी ने विधानसभा में अयोग्य, अक्षम लोगों की नियुक्ति और उत्तराखंड के योग्य युवाओं से योग्यता और दक्षता के आधार पर विधानसभा में नियुक्ति पाने का अवसर छीनने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही अमल में लाने की मांग को उठाते हुए कहा कि यह कितना विचित्र विरोधाभास है कि उत्तराखंड सरकार और विधानसभा अध्यक्ष, नियम विरुद्ध नियुक्ति पाये कर्मचारियों की बर्खास्तगी का श्रेय तो लेना चाहते हैं, लेकिन इन नियम विरुद्ध नियुक्तियों को करने वालों के खिलाफ कार्यवाही के सवाल पर मुंह नहीं खोलना चाहते।

हैरत की बात है कि जिन प्रेमचंद्र अग्रवाल ने विधानसभा अध्यक्ष रहते, विधानसभा में बैकडोर से नियम विरुद्ध भर्तियाँ की, वह वर्तमान सरकार में संसदीय कार्य,वित्त, शहरी विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बने हुए हैं। यह भ्रष्टाचार का फल पाने वालों के खिलाफ कार्यवाही और भ्रष्टाचार का पेड़ लगाने वालों का संरक्षण करने जैसा काम है। सरकार लोगों को धोखा देने के लिए "मीठा-मीठा गप्प-गप्प, कड़वा-कड़वा थू-थू" की नीति पर काम कर रही है।

इस मामले में इन्द्रेश मैखुरी ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष तथा मौजूदा कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किये जाने के साथ ही विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल व प्रेमचंद्र अग्रवाल के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,1988 तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत मुकदमा दर्ज करने के साथ ही उत्तराखंड की विधानसभा में वर्ष 2000 से 2016 की बीच में हुई बैकडोर नियुक्तियों के मामले में भी नियुक्ति पाने और नियुक्ति करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की मांग की है।

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