सिंघु बाॅर्डर पर एक और किसान ने खाया जहर, अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत

अमरिंदर सिंह मंच के पीछे पहुंचे और बिना किसी को बताए जहर निगल लिया। उनकी हालत बिगड़ने पर साथी किसानों को जहर खाने की जानकारी हुई तो वहां हड़कंप मच गया....

Update: 2021-01-09 15:51 GMT

photo : social media

सोनीपत, जनज्वार। कुंडली बार्डर पर आज शनिवार 9 जनवरी की शाम को एक और किसान ने आत्महत्या कर ली है।

जानकारी के मुताबिक पंजाब मूल के किसान ने जहर खाकर आत्महत्या की है और आत्महत्या करने वाले किसान का नाम अमरिंदर सिंह है। कहा जा रहा है कि अमरिंदर सिंह मंच के पीछे पहुंचे और बिना किसी को बताए जहर निगल लिया। उनकी हालत बिगड़ने पर साथी किसानों को जहर खाने की जानकारी हुई तो वहां हड़कंप मच गया। उनको गंभीर हालत में तत्काल एंबुलेंस से एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पहुंचते ही डाॅक्टरों ने किसान अमरिंदर सिंह का इलाज तत्काल शुरू किया, मगर हालत बिगड़ने के कारण उनकी जान नहीं बचायी जा सकी।

पुलिस के अनुसार किसान की पहचान पंजाब के फतेहगढ़ क्षेत्र के गांव माछरी खुर्द निवासी सरदार अमरिंदर सिंह की गयी है। पुलिस का कहना है कि कुंडली बार्डर स्थित धरनास्थल पर आज मंच से जब किसान नेता सरकार के साथ पहले दिन हुई बातचीत की जानकारी साथियों को दे रहे थे, तो मंच के सामने से उठकर एक किसान पीछे की ओर चला गया और वहां पहुंचकर उसने जहर खा लिया।

कुछ देर बाद जब अमरिंदर की बिगड़ती हालत देख साथी किसानों को उसके जहर खाने की जानकारी हुई। इससे धरनास्थल पर हड़कंप मच गया, पीड़ित किसान को एंबुलेंस से तत्काल शहर के एक निजी अस्पताल में लाया गया।

चिकित्सकों के अनुसार खबर हालत के बाद अमरिंदर सिंह को वेंटीलेटर पर रखा गया था। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब क्षेत्र के माछरी खुर्द निवासी सरदार अमरिंदर सिंह के रूप में हुई है। सरदार अमरिंदर सिंह के साथियों के मुताबिक जहर खाने की जानकारी होते ही उनको तत्काल अस्पताल लाया गया, कुंडली और सिविल लाइन थाना पुलिस भी तत्काल अस्पताल में पहुंच गयी थी।

अमरिंदर सिंह ने मंच के पीछे जाकर तब आत्महत्या करने के लिए जहर पिया, जब किसान नेता अपने संबोधन के बीच में सरकार विरोधी और किसान एकता के पक्ष में नारे लगवाकर धरनारत किसानों में उत्साह भर रहे थे। किसानों के मुताबिक, सरदार अमरिंदर सिंह भी नारे लगवा रहे थे। इसी दौरान वह एकाएक उठे और मंच के पीछे चल गए। तब तक किसी को अंदाजा नहीं था कि उनका इरादा क्या है। कुछ ही देर में किसान के जहर खाने का शोर मचा। मंच से भी इसका एेलान किया गया। पुलिस अधिकारी पूरे हालात पर नजर बनाए हैं। माना जा रहा है कि नारेबाजी के उत्साह में किसान ने जहर निगल लिया।

किसान आंदोलन शुरू होने से अब तक यानी डेढ़ महीने के दौरान लगभग 60 किसानों की मौत आत्महत्या या अन्य कारणों से हो चुकी है। कुछ किसानों ने आत्महत्या कर ली तो वहीं कई ऐसे किसान भी थे, जिनकी आंदोलन के दौरान तबीयत खराब होने के कारण मौत हो गयी। इसके पहले एक किसान का शव दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के शौचालय में मिला था। वहीं एक संत, जो किसान आंदोलन में शामिल था, ने खुद को गोली मार ली थी। वहीं टिकरी बॉर्डर पर 3 जनवरी को एक 58 साल के किसान की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।

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