बीरपुर लच्छी में जनवादी नेताओं पर जानलेवा हमला मामले में महिला समेत 10 को कोर्ट ने दिया दोषी करार, 9 को एक साल तो एक को 6 माह सजा और जुर्माना

Ramnagar Birpur Lachhi Kand : 31 मार्च 2015 को गांव से रामनगर लौटते समय दर्जन भर आरोपियों ने थारी गांव में प्रभात ध्यानी व मुनीष कुमार की मोटर साईकिल रोककर उनपर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया था....

Update: 2022-08-31 16:34 GMT

बीरपुर लच्छी में जनवादी नेताओं पर जानलेवा हमला मामले में महिला समेत 10 को कोर्ट ने दिया दोषी करार, 9 को एक साल तो एक को 6 माह सजा और जुर्माना

Ramnagar Birpur Lachhi Kand : साढ़े सात पहले वीरपुर लच्छी गांव में समाजवादी लोकमंच के संयोजक और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पर किए गए हमले के बहुचर्चित मामले में कोर्ट ने एक महिला सहित 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए 9 लोगों को एक साल सश्रम कारावास व ढाई हजार रुपए जुर्माने की सजा व एक आरोपी को 6 महीने की सजा सुनाई है। दोनों नेताओं ने यह हमला वीरपुर लच्छी गांव के ढिल्लन स्टोन क्रेशर मालिकान के षड्यंत्र के तहत करवाने का आरोप लगाया था।

विवाद के मूल में तहसील रामनगर के बुक्सा जनजाति बहुल गांव वीरपुर लच्छी गांव स्थित ढिल्लन स्टोन क्रेशर स्वामी द्वारा ग्रामीणों की गांव की सड़क पर जबरन उपखनिज से लदे वाहन चलाने का विरोध करते हुए 1 मई 2013 को स्टोन क्रेशर स्वामी सोहन सिंह ने अपने आदमियों के साथ मिलकर गांव में तांडव मचाते हुए ग्रामीण महिलाओं के साथ जबरदस्त मारपीट करना था। इस मारपीट में कई ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए थे।

ग्रामीणों के पक्ष में समाजवादी लोकमंच व उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी सहित कई संगठनों ने क्रेशर स्वामी के खिलाफ लंबे आंदोलन का सूत्रपात किया था। इस आंदोलन की वजह से गांव की सड़क पर उपखनिज लाने वाले डंपरों की आवाजाही ठप्प हो गई थी। इसी वजह से यह दोनो नेता स्टोन क्रेशर स्वामी के निशाने पर थे। जिस कारण 31 मार्च को 2015 को गांव से रामनगर लौटते समय दर्जन भर आरोपियों ने थारी गांव में प्रभात ध्यानी व मुनीष कुमार की मोटर साईकिल रोककर उनपर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया था।

इस घटना में मुनीष कुमार का टेबलेट व प्रभात ध्यानी का मोबाईल फोन भी छीन लिया था। दोनों को घायल अवस्था में रामनगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रभात ध्यानी की स्थिति अत्यधिक खराब होने के कारण उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी के लिए रैफर कर दिया गया था। मामले में मुनीष कुमार की तरफ से हमला करने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया था। जहां साढ़े सात लंबी सुनवाई के दौरान कई उतार-चढ़ाव से होता हुआ यह मुकदमा अपनी परिणीति तक पहुंचा।


यह कहा अभियोजन ने

अभियोजन का था कि 1 मई 2013 को ग्राम वीरपुर लच्छी में ढिल्लन स्टोन केशर स्वामी सोहन सिंह पुत्र रतन सिंह इत्यादि ने बुक्सा जनजाति बहुल गांव में घुसकर फायरिंग, मारपीट व आगजनी की घटना को अंजाम दिया था, मैं और प्रभात ध्यानी उक्त मुकदमें में ग्रामीणों की मदद कर रहे थे, जबकि सोहन सिंह की तरफ से हमें लगातार धमकियां मिल रही थी। आज दिनांक 31-03-2015 को शाम लगभग 5 बजे हम दो मोटर साईकिल से वीरपुर लच्छी गाँव से रामनगर की तरफ आ रहे थे, तब ग्राम थारी में प्रीति कौर पत्नी बचन सिंह तथा 14-15 अन्य लोगों ने सुनियोजित तरीके से हमें जबरन रोक लिया, प्रीति कौर ने प्रभात ध्यानी का सैमसंग मोबाइल जेब से निकाल लिया तथा साथ खड़े दूसरे व्यक्ति ने मेरा टेवलेट पी.सी. सैमसंग छीन लिया।

उक्त सभी ने लाठी डण्डों से हम पर हमला किया तथा कहने लगे तुम बहुत बड़े नेता बनते हो देखते हैं, तुम कैसे वीरपुर लच्छी आते हो, जिन्दा रहोगे तब ही तो आओगे, हमारी सरकार है, तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते तथा वे सभी लाठी डण्डों से हमारे ऊपर गम्भीर प्रहार करने लगे, उन्होंने प्रभात ध्यानी को सड़क पर लिटाकर धारदार हथियारों से प्रहार किये, जिसके कारण प्रभात ध्यानी को गम्भीर चोटे आई, और वे बेहोश हो गये, जिसके बाद वे लोग मौके से चले गये। उन्होंने मेरे ऊपर भी लाठी डण्डों से प्रहार किये, हेलमेट पहने होने के कारण मेरा सर बच गया, परन्तु शेष शरीर में अनेक गुम चोट आई है।

उक्त हमलावरों में से मैं बचन सिंह पुत्र इन्द्र सिंह, देवू सिंह पुत्र करनैल सिंह, शेर सिंह पुत्र प्रेम सिंह, वीर सिंह पुत्र करनैल सिंह, सुखविन्दर सिंह पुत्र जोगिन्दर भी थें तथा शेष के नाम मैं नहीं जानता हूँ, सामने आने पर पहचान लूंगा, यह हमला सोहन सिंह ढिल्लन स्टोन केशर के मालिकों द्वारा करवाया गया है। अतः महोदय से निवेदन है कि सभी नामजद व अज्ञात लोगों के खिलाफ कड़ी विभाग / सि कानूनी कार्यवाही करने की कृपा करें।

इन धाराओं में लिया कोर्ट ने संज्ञान

सभी आरोपियों प्रीति कौर, करनैल सिंह, जसवीर सिंह, देशराज, शेर सिंह, सुखविन्दर सिंह उर्फ सुक्खी उर्फ सुखवंत सिंह, देवू सिंह उर्फ देवू उर्फ बलदेव सिंह, मुन्ना सिंह एवं होरी सिंह के विरूद्ध आरोप-पत्र भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147, 148, 323, 341, 392, 120बी तथा बचन सिंह के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा-120 बी के तहत न्यायालय के सामने पेश किया गया। जिसके आधार पर न्यायालय द्वारा अभियुक्तगण प्रीति कौर, करनैल सिंह, जसवीर सिंह, देशराज, शेर सिंह, सुखविन्दर सिंह उर्फ सुक्खी उर्फ सुखवंत सिंह, देवू सिंह उर्फ देवू उर्फ बलदेव सिंह, मुन्ना सिंह, होरी सिंह के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147, 148, 323, 341, 392, 120बी एवं अभियुक्त बचन सिंह के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा-120 बी का संज्ञान लिया गया।

कोर्ट में आरोपियों ने इस तरह बताया खुद को निर्दोष

न्यायालय के समक्ष अभियुक्ता प्रीति कौर ने कहा कि उसने कुछ नहीं किया। अभियुक्त बचन सिंह का कहना था कि उसने कुछ नहीं किया, बल्कि उसकी पत्नी को मोटर साईकिल वालों ने टक्कर मारी थी, जिससे वह चोटिल हो गयी थी, वह उसके इलाज में लगा हुआ था। अभियुक्त करनैल सिंह ने भी कहा कि उसने कुछ नहीं किया। अभियुक्त जसवीर सिंह, मुन्ना सिंह, शेर सिंह, देशराज एवं सुखविन्दर सिंह ने कहा अपने आप को निर्दोष बताया। अभियुक्त होरी सिंह का भी यही कहना था कि उसका इस मामले में कोई रोल नहीं है, उसे मामले में गलत नामित किया गया है। अभियुक्त बलदेव सिंह ने भी अपने को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसका नाम झूठा डाला गया है।

अभियोजन पक्ष की दलील

अभियोजन की ओर से विद्वान नामिक अधिवक्ता द्वारा बहस के दौरान यह तर्क प्रस्तुत किया कि प्रस्तुत मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से परीक्षित सभी साक्षियों ने अपने साक्ष्य में अभियोजन कथानक का पूर्णतः समर्थन किया है। अभियोजन साक्षियों के साक्ष्य में कथित घटना को लेकर किसी प्रकार का कोई विरोधाभास नहीं आया है। अतः अभियुक्तगण को आरोपित अभियोग में दण्डित किया जाए।

अभियोजन पक्ष के अकाट्य तर्कों, साक्ष्यों और ठोस गवाही की बुनियाद पर न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज रामनगर ने एक महिला समेत दस अभियुक्तों को भारतीय दण्ड संहिता को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147, 148, 323, 341 व 120 का दोषी करार दिया।


सजा के सवाल पर आरोपियों ने दिए यह तर्क

दोषी करार दिए जाने के बाद कोर्ट ने अभियुक्तगण को सजा के प्रश्न पर सुना गया। जहां अभियुक्तगण द्वारा कहा गया कि वह गरीब व्यक्ति हैं। उन्हें झूठा फंसाया गया है। उनके द्वारा ऐसी कोई घटना कारित नहीं की गई है। उनके परिवार में छोटे-छोटे बच्चे हैं, जिनके पालन पोषण की जिम्मेदारी उन्हीं पर हैं। इस मामले में वह वर्ष 2015 से अपना बचाव कर रहे हैं, जिसमें उनका अत्यधिक मानसिक, शारीरिक व आर्थिक उत्पीड़न हो चुका है। अतः सजा के प्रश्न पर उदारता पूर्वक विचार कर लिया जाए।

....इस तरह दिया न्यायालय ने अपना फैसला

जिस पर न्यायालय ने कहा कि अभियुक्तगण द्वारा कथित उपरोक्त तथ्यों एवं उनकी आर्थिक एवं पारिवारिक स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्तगण को निम्न प्रकार दण्डित किये जाने से न्याय के उद्देश्य की प्रतिपूर्ति हो जाएगी। अपने निर्णय में अदालत ने अभियुक्तगण प्रीति कौर, करनैल सिंह, जसवीर सिंह, देशराज, शेर सिह, सुखविन्दर सिंह उर्फ सुक्खी उर्फ सुखवन्त सिंह, देवू सिंह उर्फ देवू उर्फ बलदेव सिंह, मुन्ना सिंह, होरी सिंह को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 392 से दोष-मुक्त करते हुए अभियुक्तगण प्रीति कौर, करनैल सिंह, जसवीर सिंह, देशराज, शेर सिंह, सुखविन्दर सिंह उर्फ सुक्खी उर्फ सुखवन्त सिंह, देवू सिंह उर्फ देवू उर्फ बलदेव सिंह, मुन्ना सिंह, होरी सिंह को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147, 148, 323, 341 एवं 120 बी के आरोप में दोषी पाते हुए भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147 में छः-छः माह के सश्रम कारावास एवं 500-500 /- रूपये जुर्माना, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 148 में एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास एवम् 500-500 /- रूपये जुर्माना, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 323 में एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास एवं 500-500 /- रूपये जुर्माना, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 341 में एक-एक माह के साधारण कारावास एवम् 500-500 /- रूपये जुर्माना तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120 में छः-छः माह के सश्रम कारावास एवं 500-500 /- रूपये जुर्माने से तथा अभियुक्त बचन सिंह को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120 बी में छः माह के सश्रम कारावास व 500-500 /- रूपये जुर्माने से दण्डित किए जाने का आदेश सुनाया। जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक अभियुक्त को प्रत्येक भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147, 148, 323, 341 एवं 120 बी में दस-दस दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगना होगा। इनकी सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यदि अभियुक्तगण पूर्व में जेल में निरूद्ध रहे हैं, तो उनके द्वारा पूर्व में जेल में बितायी गई अवधि उपरोक्त सजा की अवधि में समायोजित की जाएगी।

फैसले के बाद यह बोले पीड़ित नेता

न्यायालय का निर्णय आने के बाद प्रभात ध्यानी व मुनीष कुमार ने न्यायालय के फैसले को संघर्षाें की जीत बताते हुए सभी सहयोगी संगठनों एवं न्यायालय में दमदार पैरवी करने वाले सहायक अभियोजन अधिकारी अशोक कुमार मौर्य व मोहन सिंह रावत का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क एवं न्यायालय में संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

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