500 पैसेंजर ट्रेन और 10 हजार स्टॉपेज बंद कर सकता है रेलवे, देहाती, गरीब और सुदूरवर्ती यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किल

रेलवे द्वारा खासतौर पर टाइम टेबल पर जोर दिया जा रहा है, बताया जा रहा है कि रेलवे 500 से अधिक ट्रेनों को बंद करने पर फैसला कर सकता है, साथ ही 10,000 स्थानों पर ट्रेनों के स्टापेज भी बंद किए जा सकते हैं...

Update: 2020-09-04 05:49 GMT

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जनज्वार। कोरोना को लेकर रेल की व्यवस्था एक तरह से ठप्प पड़ी हुई है। लंबी दूरी के चुनिंदा यात्री ट्रेनों और मालवाहक ट्रेनों को छोड़कर बाकी बंद है। इस बीच, खबर है कि भारतीय रेलवे ने इस पर मंथन शुरू कर दिया है कि कोरोना महामारी खत्म होने पर ट्रेनें चलाई जाएंगी तो क्या व्यवस्था रहेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेलवे द्वारा खासतौर पर टाइम टेबल पर जोर दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रेलवे 500 से अधिक ट्रेनों को बंद करने पर फैसला कर सकता है। साथ ही 10,000 स्थानों पर ट्रेनों के स्टापेज भी बंद किए जा सकते हैं।

कहा जा रहा है कि रेलवे जीरो बेस्ड टाइम टेबल पर काम कर रहा है और अधिकारियों का मानना है कि इससे रेलवे की कमाई 1,500 करोड़ रुपये सालाना बढ़ सकती है। वह भी बिना किराया बढ़ाए।

बताया जा रहा है कि रेलवे माल गाड़ियों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहा है। रेलवे की योजना के अनुसार, नई समय सारिणी में हाई स्पीड वाले कॉरिडोर पर 15 प्रतिशत अधिक माल गाड़ियों को चलाने के लिए जगह बनाई जाएगी। पूरे नेटवर्क में पैसेंजर ट्रेनों की औसत गति में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

जानकारी के अनुसार, जीरो बेस्ड टाइम टेबल पर रेलवे और आईआईटी-बॉम्बे के विशेषज्ञ साथ काम कर रहे हैं। वैसे इस पर देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान काम शुरू हुआ था। इस आधुनिक ऑपरेटिंग टूल को बनाना रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता बताई जा रही है, जिसकी निगरानी ऊपरी स्तर से की जा रही है।

टाइम टेबल बनाने में यह करेटेरिया है कि जो ट्रेन एक साल में औसतन आधी खाली जाती हैं, उन्हें बंद कर दिया जाएगा। हां जरूरत पड़ने पर ऐसी ट्रेनों को अन्य भीड़भाड़ वाली ट्रेनों के साथ मिला दिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि इस करेटेरिया के अनुसार लंबी दूरी की ट्रेनें आदर्श रूप से एक-दूसरे से 200 किमी के भीतर नहीं रुकेंगी, जब तक कि रास्ते में एक प्रमुख शहर न हो। कुल 10,000 स्टॉप को सूचीबद्ध किया गया है, जिन्हें खत्म किया जा सकता है।

हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कुछ ही ट्रेनों के स्टापेज खत्म होंगे, बाकी ट्रेनें पहले की तरह चलती रहेंगी।

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