यति नरसिंहानंद के खिलाफ प्रदर्शन करने पर 1 गिरफ्तार, 100 से ज्यादा के खिलाफ मामला दर्ज, लेकिन महंत की अबतक नहीं हुई गिरफ्तारी

यति नरसिंहानंद के स्वभाव से लगता है कि वो दुनिया के सामने मुसलमानों का असली चेहरा लाना चाहते है कि मुसलमान स्वाभाविक रुप से ही हिंसक होते है, भारत में अभिव्यक्ति की आजादी है। कोई कुठ भी बोल सकता है और इसीलिए नरसिंहानंद भी यह आजादी रखते है....

Update: 2021-04-10 13:51 GMT

(अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चाओं में रहते नरसिंहानंद)

जनज्वार डेस्क। अपने विवादित बयानों के लिए चर्चित और कट्टर हिंदुत्ववादी की छवि रखने वाले महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती को कथित धमकी देने वाले मुस्लिम युवक को मेरठ पुलिस ने गिरफ्तार किया गया है। साथ ही नरसिंहानंद के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 100 से ज्यादा लोगों के खिलाफ कोविड-19 के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का मामला पिलीभीत पुलिस ने मामला दर्ज किया है। डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद ने हाल ही में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस क्रांफेस के दौरान इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था जिसके बाद वह काफी चर्चाओं में आ गए थे।  

पुलिस के द्वारा उठाए गए इन दोनों ही मामलों को सही ठहराया जा सकता है क्योंकि किसी को जान से मारने की धमकी देना भी गलत है और दूसरा कोरोना वायरस के दौरान 100 लोगों द्वारा भीड़ को इकठ्ठा करना भी राज्य के नियमों के बिलकुल खिलाफ है क्याोंकि इससे देश में कोरोना संक्रमण बढ़ सकता है। इन दोनों मामलों में की गई कार्यवाही ठीक है लेकिन उस व्यक्ति का क्या जिसने एक धर्म विशेष का अपमान किया है। यति नरसिंहानंद जैसे लोग देश में कानून व्यवस्था को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ भगवाधारी पूरे मुस्लिम समुदाय का अपमान करते हैं, यह कितना जायज है।

यति नरसिंहानंद दिल्ली आते हैं, हिंसात्मक भाषा का इस्तेमाल कर इस्लाम और पैग़ंबर मोहम्मद के लिए अपशब्द बोलते हैं। नरसिंहानंद कहते हैं कि पैगंबर मोहम्मद लूटेरे थे और लोग एक लूटेरे को फॉलो करते हैं। यति नरसिंहानंद ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर कहा था कि अगर इस्लाम की असलियत जिसके लिए मौलाना कहते हैं कि अगर मोहम्मद के बारे में बोला तो सर काट देंगे, यह भय हिंदू अपने दिमाग से निकाल दें। हम हिंदू हैं हम राम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं। हम परशुराम के चरित्र की मीमांसा कर सकते हैं तो हमारे लिए मोहम्मद क्या चीज है। हम मोहम्मद की मीमांसा क्यों नहीं करेंगे और क्यों सच नहीं बोलेंगे।

नरसिंहानंद के भड़काउ बयान के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों में गुस्सा देखा जा रहा है लेकिन पुलिस के हावभाव से लगता है कि वह ये मान के चल रही है कि मुस्लिम आसानी से रेडिकलाइज्ड यानि कट्टर हो सकते हैं लेकिन हिंदू और कट्टरता का एक साथ चलना मुमकिन नहीं है। हिंदू सिर्फ कट्टर बोलते हैं लेकिन कट्टरता दिखाते नहीं हैं।

यति नरसिंहानंद के स्वभाव से लगता है कि वो दुनिया को बताना चाहते हैं कि मुसलमान स्वाभाविक रुप से हिंसक होते हैं। भारत में अभिव्यक्ति की आजादी है। कोई कुछ भी बोल सकता है और इसीलिए नरसिंहानंद भी यह आजादी रखते हैं। अगर ऐसा है तो इस पूरे मामले पर किसी की भी गिरफ्तारी अमानवीय है। अगर कोई किसी को भी डरा सकता है या कोई भी किसी के मजहब के लिए भड़काऊ बातें बोल सकता है तो इन तमाम गिरफ्तारियों पर सवाल खड़े होते हैं। अगर नरसिंहानंद सही हैं तो मुस्लिम कैसे गलत हो सकते हैं। नरसिंहानंद मुसलमानों को गाली देते हैं, मोहम्मद साहब का अपमान करते हैं और उसी के बाद लोगों का रोष दिखता है तो फिर नरसिंहानंद कहते हैं 'कि मैने तो पहले ही कहा था'।

हालांकि दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को महंत नरसिंहानंद सरस्वती को सम्मन भेजकर जांच में शामिल होने के लिए तलब किया। पुलिस ने कुछ दिन पहले धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर आहत करने के लिए नरसिंहानंद के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि नरसिंहानंद को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। 

सामाजिक कार्यकर्ता शहजाद अली जिन्होंने सीएए के खिलाफ भाजपा सरकार का जमकर विरोध किया था लेकिन शाहीनबाग में प्रदर्शन खत्म होते होते ही शहजाद ने 16 अगस्त, 2020 को भाजपा की सदस्यदता ग्रहण कर ली। यति नरसिंहानंद के मामले को लेकर शहजाद बताते हैं कि हमने 3 अप्रैल को शाहीनबाग थाने में यति नरसिंहानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।


शहजाद आगे कहते हैं कि हमें नागरिकता कानून से ऐतराज था तो हमने प्रदर्शन किया और अब सरकार से बात चल रही है। 'जनज्वार' के साथ बातचीत में भाजपा नेता शहजाद अली पार्टी का बचाव करते हुए नजर आए।शहजाद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने किस तरीके से मुसलमानों का शोषण किया। कैसे 2014 से भारत की स्थिति कैसी थी।

भारत में मुसलमानों के साथ हो रहे व्यवहार पर शहजाद कहते हैं कि 2014 के बाद से मुसलमानों की स्थिति काफी बेहतर है। डासना मंदिर में पानी पीने पर आसिफ की पिटाई वाले कांड पर वह कहते हैं कि मुझे न ही मंदिर में जाने से रोका जाता है और न ही मुझे पानी पीने की मनाही है। भारत में मुसलमानों की स्थिति काफी बेहतर है। किसी को भी किसी भी धर्म के खिलाफ बोलने को हक नहीं है। मैं चाहता हूं कि सरकार इसपर कायदे कानून बनाए और कोई भी किसी भी धर्म को आहत न करें। हमने एफआईआर दर्ज करवा दी है और शायद जल्द नरसिंहानंद कि गिरफ्तारी भी हो जाए। 

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