बलिया में 50 साल से भी ज्यादा समय से बसे दलितों के घरों पर चला बुल्डोजर, माले ने की उजाड़े परिवारों के पुनर्वास और पुलिसिया ज्यादती के खिलाफ कार्रवाई की मांग

Update: 2026-02-05 12:16 GMT

लखनऊ। बलिया में मनियर ब्लॉक के खेजुरी थाना अंतर्गत हथौज गांव में आधी शताब्दी से भी अधिक समय से बसे दलितों के घरों पर प्रशासन द्वारा मंगलवार 3 जनवरी को निर्ममतापूर्वक बुलडोजर चलाकर ध्वस्त करने की घटना सामने आयी है। बेघर परिवारों को बिना किसी पुनर्वास के इस ठंड के मौसम में खुले आसमान के नीचे छोड़ दिया गया है। भाकपा (माले) द्वारा इस घटना की कड़ी निंदा की गयी है।

पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के बुलडोजर राज में गरीब पिस रहे हैं। सरकारी भूमि पर पीढ़ियों से बसे दलितों-आदिवासियों को विनियमित करने की जगह उनके घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। उनसे आश्रय व आजीविका के अधिकार छीने जा रहे हैं। उनके पास अपनी निजी भूमि तो है नहीं, ऐसे में यह जिम्मेदारी राज्य की बनती है कि वे सरकारी जमीनों पर आबाद ऐसे परिवारों को बेरहमी से उजाड़ देने के बजाए उन्हें वास-आवास का अधिकार दे।

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माले नेता ने कहा कि बलिया में दलितों के घरों पर सिर्फ बुलडोजर ही नहीं चला, बल्कि बुलडोजर कार्रवाई का प्रतिवाद कर रहे दलितों की पुलिस-पीएसी द्वारा बर्बर पिटाई की गई। महिलाओं-बच्चों और विकलांगों तक को नहीं छोड़ा गया। बस्ती में गरीबों के घरों में घुसकर उनके समान को तहस-नहस किया गया और वहां खड़ी दर्जनों मोटरसाइकिलों को तोड़ा गया। सात लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया जिसमें ज्यादातर महिलाएं हैं।

भाकपा (माले) का एक प्रतिनिधिमंडल तत्काल मौके पर पहुंचा, जिसमें पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य व अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीराम चौधरी, माले जिला सचिव लाल साहब, राज्य कमेटी सदस्य बशिष्ठ राजभर, भागवत बिंद के अलावा ऐपवा नेता लीलावती और राधेश्याम चौहान शामिल थे। नेताओं ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और सरकार की इस कार्रवाई का विरोध किया। प्रशासन से पुलिस की ज्यादती पर मुकदमा दर्ज करने और उजाड़े गये गरीबों को तत्काल पुनर्वास व मुआवजा की व्यवस्था करने की मांग की। इन मांगों के लिए गांववासियों के साथ बलिया जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

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