पाकिस्तान के लाहौर जेल में बंद मिर्जापुर के पुनवासी की एक 11 साल बाद वतन वापसी, गांव में जश्न का माहौल

बिना वीजा के दूसरे देश में प्रवेश करने के आरोप में पाकिस्तान की कोर्ट ने पुनवासी को सात साल की सजा सुनाई थी, पूरी सजा काटने के बावजूद पुनवासी लाहौर जेल में बंद रहा....

Update: 2021-01-06 15:33 GMT

मिर्जापुर से संतोष देव गिरी की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के लाहौर जेल से तकरीबन 11 साल बाद रिहा हो वापस अपने वतन लौटे मिर्जापुर जनपद के थाना देहात कोतवाली क्षेत्र के भरूहना गांव निवासी पुनवासी (35) पुत्र कन्हैया के घर गांव में जश्न जैसा माहौल है। पुनवासी के आने की खबर लगते ही परिवार सहित गांव व आसपास के लोगों में खुशी की लहर दौड़ पडी है। 11 वर्षों के बाद पुनवासी को देखकर ग्रामीणों की आंखें खुशी के आंसुओं से नम हो गई थी उसे देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी थी मानो पूरे भरूहना गांव में उत्सव का माहौल देखने में आ रहा था।

गौरतलब हो कि मिर्जापुर जिले के भरूहना गांव निवासी पुनवासी का दिमागी संतुलन ठीक न होने के कारण वह वर्ष 2009 में एक ट्रक चालक के साथ राजस्थान घूमने गया था। इसी दौरान वह किसी तरह भटक कर पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गया था, जिसे पाकिस्तान के लाहौर प्रांत के नूरलवा थाने की पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया था।

बिना वीजा के दूसरे देश में प्रवेश करने के आरोप में पाकिस्तान की कोर्ट ने पुनवासी को सात साल की सजा सुनाई थी। पूरी सजा काटने के बावजूद पुनवासी लाहौर जेल में बंद रहा। किसी तरह इसकी जानकारी होने पर भारत सरकार ने पुनवासी के परिजनों की खोजबीन की। पता चलने पर उसे छुड़ाने की कवायद शुरू कर दी है। सरकार की पहल पर पाकिस्तान जेल से उसे रिहा करा दिया गया। पाकिस्तानी सैनिकों ने 17 नवंबर 2020 की सुबह पुनवासी को भारत-पाकिस्तान के बाघा-अटारी बार्डर पर तैनात बीएसएफ को सौंप दिया था। अटारी के तहसीलदार जगसीर सिंह ने उसे उसी दिन देर रात छेरहटा के नारायणगढ़ स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में क्वारंटाइन कर दिया। जहां उसकी कोविड 19 की जांच कराई गई।

रिपोर्ट निगेटिव आने पर उससे तीन दिन तक पूछताछ की गई। बताया गया था कि इसके बाद उसे उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपे जाने की प्रक्रिया की जाएगी। वहां से मिर्जापुर पुलिस को दिया जाएगा, जो उसे घर तक पहुंचाने का काम करेगी। जानकारी के मुताबिक मिर्जापुर के देहात कोतवाली के भरूहना गांव निवासी पुनवासी छह भाइयों में चौथे नंबर पर था। पांच भाइयों में चार मंगरू, गोनू, मतरू व शंकर की मौत हो चुकी है, जबकि पुनवासी की तरह एक भाई मिठाईलाल भी अबूझहाल में गायब हो गया था, जिसका आज तक पता नहीं चल सका है। पुनवासी भी इसी तरह गायब हो गया था। इसके बारे में दो महीने पहले ही पता चला कि वह पाकिस्तान के लाहौर जेल में बंद है।

इसकी जानकारी होने पर उसकी बहन किरन व चचेरे भाई जवाहर दलित को हुई तो वह खुशी से झूम उठे हैं। फिलहाल पुनवासी का घर खंडहर बन चुका है। उसके घर पर कोई नहीं है। उसकी बहन किरन अपने घर जिले के ही लालगंज तहसील क्षेत्र के बसइटा बहुती बलहरा में रहती है, जबकि उसकी पत्नी पुनवासी का इंतजार करते हुए जब थक गयी तो उसने 7 साल बाद घरवालों के दबाव में दूसरी शादी कर ली।

पत्नी ने कर ली दूसरी शादी मगर भाई को खोजती रही बहन

अब इसे विधि के विधान का लेखा ही कहा जाएगा कि जब पुनवासी अपने घर लौटा तो सभी तो मिले, लेकिन उसकी अर्धांगिनी उसे छोड़कर किसी और का दामन थाम चुकी थी जो नहीं मिली, जो शायद पाकिस्तान की जेल से ज्यादा कष्टदायक उसके लिए साबित हुआ है।

गौरतलब हो कि पुनवासी का विवाह सोनभद्र के घोरावल क्षेत्र के एक गांव में हुआ था। पुनवासी की दिमागी कमजोरी के चलते पत्नी शादी के 3-4 माह बाद ही घर छोड़कर चली गयी थी। जिसके बाद पुनवासी कही अचानक गायब हो गए। पुनवासी के मां-बाप (श्यामदुलारी, कन्हैयालाल) अब नही हैं। ईंट का दो कमरे का जर्जर छोटा सा घर है, जो कूड़े से भरा पड़ा है दूर से ही बदहाली की कहानी कहता दिखलाई देता है। बहन किरन की भी आर्थिक हालात ठीक नही है। विवाहिता बहन किरन पत्नी मुन्ना निवासिनी बहुती, लालगंज (मिर्जापुर) ने भाई की वापसी का आशा छोड़ दिया था, लेकिन इसी बीच अचानक गोपनीय विभाग से पता चला कि पुनवासी जिंदा हैं। तो वह अपने भाई की खोज खबर में जुट गई थी, जिसका प्रतिफल रहा कि आज वह अपने भाई को घर लाने में कामयाब हुई है।


वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की लाहौर जेल से पुनवासी के वतन वापसी की खबर से पुनवासी के परिजनों, नात रिश्तेदारों उसके गांव के ग्रामीणों में जहां खुशी की लहर देखी जा रही है तो वहीं लाहौर जेल में पुनवासी को काफी यातनाएं दी गई थीं की खबर से वह आक्रोशित भी हैं। ग्रामीणों ने कहा कि मानसिक रूप से बीमार चल रहे पुनवासी को यातना देना दरिंदगी का काम है। यह काम केवल पाकिस्तान के लोग ही कर सकते हैं।

उन्होंने भारत सरकार से यातना देने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की। 11 साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अपने घर लौटे दलित पुनवासी को देखने के लिए ग्रामीण जहां उत्सुक हैं तो वहीं वतन वापसी के बाद अपनी सरजमी पर वापस लौट पुनवासी खुली हवा में सांस तो जरूर लेगा, लेकिन परिजनों बिन खाली हो खंडहर बना उसका घर अब उसे काटने को दौड़ेगा। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ देने के साथ ही पुनवासी को किसी प्रकार की परेशानी न होने पाये इसके लिए हर आवश्यक कदम उठाये जायेगें।

भटक कर पाक सीमा चले गए में पुनवासी को 7 की जगह 11 साल तक जेल में रहना पड़ा

पाकिस्तान की जेल से 11 साल बाद बीते नवम्बर माह में रिहा किए गए देहात कोतवाली क्षेत्र के भरूहना गांव निवासी मजदूर पुनवासी हरिजन (35) पुत्र स्व. कन्हैयालाल 24 साल की उम्र में साल 2009 में भटक कर पाक की सीमा में चला गया था। पाकिस्तान के लाहौर राज्य की नूरलवा थाने की पुलिस बिना वीजा के दूसरे देश में प्रवेश व जासूसी करने के आरोप में वहां की कोर्ट ने पुनवासी को सात साल की सजा सुनाई थी। पूरी सजा काटने के बावजूद चार साल अतिरिक्त लाहौर जेल में इसलिए रहना पड़ा की उसकी खोजबीन के लिए कोई प्रयास नही हुआ। रिहाई के बाद भी आर्थिक कारणों से पुनवासी को घर लाने में देरी पर भी कई सवाल खड़े हुए हैं।

लोग पूछ रहे हैं कि क्या सरकार के पास किसी मजबूर लाचार को घर भेजने का बजट नही होता है? फिलहाल पुनवासी के वतन वापसी को लेकर ग्रामीण उसका हाल खासकर कैसे उसने 11 साल पाक की जेल में बिताये, उसे कैसे रखा गया? इत्यादि जानने को लेकर उत्सुक हैं। दूसरी ओर मीडिया में आए खबरों के बाद हर कोई यह जानने को उत्सुक रहा है कि, आखिर पुनवासी कब आयेगे? पुलिस कब उन्हे ला रही है? प्रशासन अब उनके लिए क्या व्यवस्था करेगी?

अब परिवार में कोई नहीं

मानसिक आपा खो चुके उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले का पुनवासी भटक कर करीब 11 साल पहले पाकिस्तान पहुंच गया था। जो आज अपने घर लौट आया। जिले में पहुंचने पर प्रभारी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर उलक स्वागत किया। कहा कि पुनवासी के पुनर्वास के लिए हर तरह से मदद की जायेगी। पुनवासी के परिवार में अब कोई नहीं है। वह अपने जीजा के घर से लापता हुआ था। अब घर जाने की बात कह कर हंस पड़ता है। उसकी मानसिक हालत अभी भी ठीक नहीं है। सिटी ब्लाक के भरूहना में रहने वाले 35 वर्षीय पुनवासी की शादी हो चुकी थी। पत्नी का गौना आने के पहले ही वह विक्षिप्त हो गया। किसी प्रकार वह पाकिस्तान जा पहुंचा। वहा करीब 11 साल जेल में रहा।


प्रदेश और केन्द्र सरकार के साथ ही एलआईओ के अथक प्रयास से उसका सही पता मिल सका। तब कही जाकर उसकी वापसी हो सकी। अटारी बार्डर पर उसे लेने उसकी बहन, बहनोई और जिले का सिपाही मनोज गया था। 14 दिन कवारेंटाइन रहने के बाद वह ट्रेन से वाराणसी आया और सबसे पहले पुलिस लाइन पहुंचा। जिसका भव्य स्वागत किया गया। प्रभारी जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि इसकी हर तरह से मदद की जायेगी। पुलिस लाइन में पहुंचने के बाद पुनवासी की मानसिक हालत पर वार्ता के दौरान ठीक नजर नहीं आया।

पुलिस अधीक्षक अजय कुमार ने बताया कि उसका पता गलत होने के कारण लंबा वक़्त उसके परिजनों को तलाशने में लगा। 11 साल वह अपने देश, प्रदेश के बाद अपने घर लौट कर आया है। इसके परिवार में अब कोई नहीं है। लिहाजा हर प्रकार से मदद की जायेगी।

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