अयोध्या राम मंदिर भूमिपूजन के लिए अबतक आडवाणी-जोशी को न्यौता नहीं, ये तीन होंगे शामिल

लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी राम जन्मभूमि आंदोलन के अगुवा थे। 1990 के दशक में जब राम जन्मभूमि आंदोलन हुआ था, तो ये दोनों नेता अटल बिहारी वाजपेयी के साथ भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में शामिल थे।

Update: 2020-08-01 08:09 GMT

जनज्वार। पांच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए अबतक भाजपा के दो बुजुर्ग नेताओं लालकृष्ण आडवाणी व डाॅ मुरली मनोहर जोशी को न्यौता नहीं दिया गया है। वहीं, उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह व पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती को इस कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता भेजा गया है।

राम जन्मभूमि आंदोलन के अगुवा विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक सिंघल एवं तब भाजपा के शीर्ष नेता रहे लालकृष्ण आडवाणी और डाॅ मुरली मनेाहर जोशी थे। उस समय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में शामिल रहे अटल बिहारी वाजपेयी ने खुद को इससे बहुत हद तक अलग रखा था। विहिप, बजरंग दल व आडवाणी के आह्वाण पर कार सेवा का आयोजन किया गया था और उन्होंने रथयात्रा भी की थी। आडवाणी की इस राष्ट्रव्यापी रथयात्रा की वजह से ही भाजपा को देश की राजनीति में स्वीकार्यता हासिल करने व जड़े फैलाने का मौका मिला।

हालांकि अभी यह स्प्ष्ट नहीं है कि आडवाणी और डाॅ जोशी को भूमि पूजन का न्यौता भेजा जाएगा या नहीं। उधर, कल्याण सिंह व उमा भारती ने पुष्टि की है कि उन्हें आमंत्रण मिला है और वे अयोध्या जाएंगे। कल्याण सिंह ने तो यहां तक कहा है कि राम लला का मंदिर देख कर ही प्राण निकले। वहीं, उमा भारती ने ट्विटर पर कहा है कि वे चार अगस्त की शाम अयोध्या जाएंगी और छह अगस्त तक रहेंगी।

उधर, राम मंदिर आंदोलन के एक अहम किरदार कोठारी बंधुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी का राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आयोजन में शामिल होने का न्यौता भेज दिया है। 30 अक्तूबर 1990 को विवादित ढांचे पर इन दोनों भाइयों ने भगवा ध्वज फहराया था। दो नवंबर 1990 को पुलिस की गोली से इनकी मौत हो गई थी। कोठारी बंधु बजरंग दल के कार्यकर्ता थे। 

कोठारी बंधु का फाइल फोटो।


 


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