DDU News Today: निलंबित प्रो.कमलेश गुप्त के सत्याग्रह से हरकत में आया विश्वविद्यालय प्रशासन, भेजा पत्र

DDU News Today: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के निलंबित आचार्य डा.कमलेश गुप्त एक बार फिर चर्चा में हैं। वे शीतावकाश के बाद पुनः अपना सत्याग्रह जारी रखे हैं। नियमित रूप से प्रतिदिन तय कार्यक्रम के अनुसार प्रशासनिक भवन स्थित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के समक्ष कुलपति प्रो. राजेश सिंह को हटाए जाने और अन्य मांगों को लेकर सत्याग्रह पर बैठ रहे हैं।

Update: 2022-01-19 18:08 GMT

चक्रपाणि ओझा की रिपोर्ट

DDU News Today: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के निलंबित आचार्य डा.कमलेश गुप्त एक बार फिर चर्चा में हैं। वे शीतावकाश के बाद पुनः अपना सत्याग्रह जारी रखे हैं। नियमित रूप से प्रतिदिन तय कार्यक्रम के अनुसार प्रशासनिक भवन स्थित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के समक्ष कुलपति प्रो. राजेश सिंह को हटाए जाने और अन्य मांगों को लेकर सत्याग्रह पर बैठ रहे हैं। लेकिन उनके सत्याग्रह से एकबार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन में हलचल पैदा हो गयी है।

मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार को भी वे सत्याग्रह पर बैठे रहे। लेकिन सत्याग्रह समाप्त होने के पश्चात कुलपति के आदेशों का एक पत्र उन्हें प्राप्त हुआ। पत्र में लिखा गया है कि आप के विरुद्ध उच्च स्तरीय जांच समिति द्वारा जांच की कार्यवाही की जा रही है परंतु इस दौरान भी आप विश्वविद्यालय परिसर में धरना दे रहे हैं जो कि अनुचित है। पत्र में यह भी कहा गया है कि आप कला संकायाध्यक्ष कार्यालय से संबद्ध हैं ऐसे में प्रातः 10:00 बजे से 4:30 बजे तक आप वहां उपस्थित नहीं रहते हैं,आप वहां पूरे समय उपस्थित रहें। पत्र में बताया गया है कि 1 से 2 सप्ताह के अंदर जांच समिति बैठेगी आप उपस्थित होकर अपनी बात साक्ष्यों सहित उनके समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। तब तक धरना प्रदर्शन स्थगित रखें।

प्रो.कमलेश गुप्त ने कुलसचिव द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा है कि हमारे सत्याग्रह से इतने आतंकित क्यों हैं कुलपति जी? उन्होंने आगे लिखा है कि इस पत्र की भाषा की आप समीक्षा करें। मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि प्रोफेसर राजेश सिंह जी, कुलपति, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर अपने आप में 'भ्रष्टाचार प्रशिक्षण केंद्र' हैं। पुरानी तिथियों में पत्र भेजना उनके कार्यकाल की सामान्य विशेषता बन गई है। कुलपति जी का बस चले, तो वह मुझे अधिष्ठाता कला संकाय के कार्यालय की किसी मेज-कुर्सी से बंधवा दें।


कुलपति जी के माध्यम से यह बात कई महीने पहले से कही जा रही है कि मेरे विरुद्ध कोई उच्च स्तरीय जांच चल रही है। आज पहली बार कुलसचिव महोदय द्वारा प्रेषित इस पत्र के माध्यम से लिखित रूप में मुझे यह जानकारी हुई है कि ऐसी कोई जांच मेरे विरुद्ध चल रही है। जांच समिति के प्रति पूरा सम्मान भाव व्यक्त करते हुए मैं यह बताना चाहता हूं कि यह जांच किस बात की चल रही है, जांच समिति किसने गठित की है, जांच समिति के सदस्य कौन हैं, इसके बारे में अभी तक मुझको कोई लिखित औपचारिक सूचना प्राप्त नहीं है।

कुलपति जी किसी के भी विरुद्ध कुछ भी आरोप लगा/लगवा सकते हैं, कुछ भी कर/करा सकते हैं, इसमें वह सक्षम हैं। लेकिन कुलपति जी के ऐसे किसी दमन और उत्पीड़नकारी कदम का मेरे ऊपर कोई असर होने वाला नहीं है। मैं कोई धरना-प्रदर्शन नहीं कर रहा हूं, सत्याग्रह कर रहा हूं और पूर्व सूचना के अनुसार सत्याग्रह कर रहा हूं। मैं मानता हूं कि स्वतंत्र भारत में किसी भी आतताई, अन्यायी, अत्याचारी, अहंकारी और गैरलोकतांत्रिक सत्ता का प्रतिकार सत्याग्रह के माध्यम से किया जा सकता है। मेरा दिनांक 20/01/2022 का सत्याग्रह अपराह्न 2:35 से 3:35 तक होगा। प्रोफेसर राजेश सिंह जी और उनको संरक्षण देने वाले कुलाधिपति महोदया के विशेष कार्याधिकारी डॉ० पंकज एल० जानी जी को हटाए जाने तक मेरा सत्याग्रह जारी रहेगा। मैं आपके समर्थन, सहयोग और सुझावों के लिए आभारी हूं।

कुल मिलाकर प्रो. कमलेश गुप्त ने अपनी प्रतिक्रिया में स्पष्ट कर दिया है कि वे कुलपति के आदेशों को मानने वाले नहीं हैं।वे अपनी मांगों के पूरा होने तक सत्याग्रह जारी रखेंगे। ऐसे में देखना यह है कि कुलपति और प्रो. कमलेश गुप्त के बीच चल रहे इस आरोप-प्रत्यारोप का अंत कब और किस रूप में होता है।

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