देवरिया में BJP को हार का डर: 3 विधायकों के काट दिए टिकट, दो सीटों पर उम्मीदवारों के चयन में छूटे पसीने, जानें देवरिया का राजनीतिक मूड

Deoria Vidhan Sabha Chunav 2022: यूपी विधान सभा चुनाव में देवरिया जिले के सात सीटों पर इस बार रोचक मुकाबले के आसार हैं। पिछले चुनाव में सात में से छह सीट पर चुनाव जीतने वाली भाजपा की मौजूदा स्थिति का आकलन इससे कर सकते हैं, कि पांच सीटों पर घोषित उम्मीदवारों में से तीन पर पार्टी ने अपने वर्तमान विधायकों का टिकट काट दिया है।

Update: 2022-01-29 12:47 GMT

देवरिया में BJP को हार का डर: 3 विधायकों के काट दिए टिकट, दो सीटों पर उम्मीदवारों के चयन में छूटे पसीने, जानें देवरिया का राजनीतिक मूड

जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट

Deoria Vidhan Sabha Chunav 2022: यूपी विधान सभा चुनाव में देवरिया जिले के सात सीटों पर इस बार रोचक मुकाबले के आसार हैं। पिछले चुनाव में सात में से छह सीट पर चुनाव जीतने वाली भाजपा की मौजूदा स्थिति का आकलन इससे कर सकते हैं, कि पांच सीटों पर घोषित उम्मीदवारों में से तीन पर पार्टी ने अपने वर्तमान विधायकों का टिकट काट दिया है। जबकि अभी दो सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर कशमकश जारी है। इस हालात को देख यह कयास लगने लगे हैं कि हर सीट पर भाजपा को कांटे की टक्कर झेलनी पड़ेगी।

यूपी विधान सभा चुनाव अब अपने सबाब पर है। प्रमुख दलों के अपने उम्मीदवारों के लगातार घोषणा का नतीजा है कि मतदाताओं के बीच उम्मीदवारों को लेकर अब मंथन तेज हो गया है। हर कोई उम्मीदवारों के जीत को लेकर अपनी अपनी राय रख रहा है। इस बीच दलों के मुल्यांकन की बात करें तो देवरिया की सात सीटों में से पांच पर भाजपा ने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा 28 जनवरी को कर दी। जिसमें से तीन पर पार्टी ने माना की उसके विधायक के भरोसे यहां चुनाव नहीं जीता जा सकता है।

देवरिया सीटः सत्यप्रकाश की जगह शलभ लड़ेगे चुनाव

देवरिया सदर विधानसभा सीट शहरी क्षेत्र की सीट मानी जाती है। इस विधानसभा सीट पर बसपा का आज तक खाता नहीं खुल सका है। यहां से 2017 में बीजेपी के जन्मेजय सिंह विधायक निर्वाचित हुए थे। इस बीच इनके निधन हो जाने पर 2020 के उपचुनाव में पार्टी के डॉक्टर सत्य प्रकाश मणि विधायक बने। ये सीट सवर्ण बाहुल्य सीट है। यहां ओबीसी मतदाता भी अच्छी तादाद में हैं। 2012 से ये सीट बीजेपी के कब्जे में है।

इस बार यहां से पार्टी नेतृत्व ने वर्तमान विधायक डा. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी का टिकट काटकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी को उम्मीदवार बना दिया है।ं पार्टी के इस निर्णय से विधायक डा.सत्यप्रकाश के समर्थक स्तब्ध हैं। इनका मानना है कि उप चुनाव में जीत के बाद भी आखिर किस आधार पर पार्टी ने इन्हें टिकट से वंचित कर दिया। इस बदले हालात की प्रतिक्रिया क्या होगी,यह आनेवाला वक्त ही बताएगा।

रूद्रपुर सीटः मंत्री जयप्रकाश पर पार्टी ने जताया फिर भरोसा

रुद्रपुर विधानसभा सीट बीजेपी के कब्जे में है। 2012 में इस सीट से कांग्रेस के अखिलेश प्रताप सिंह और 2017 में बीजेपी के जयप्रकाश निषाद विधायक निर्वाचित हुए। जयप्रकाश निषाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं। इस सीट से पार्टी ने एक बार फिर जयप्रकाश निषाद को अपना उम्मीदवार घोषित की है। ऐसे में कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह से एक बार फिर यहां मुख्य मुकाबले के आसार हैं। 1957 के बाद से इस सीट का इतिहास रहा है कि कोई भी लगातार दो बार चुनाव नहीं जीता है। विधानसभा क्षेत्र में तीन लाख से अधिक मतदाता हैं। 1967 तक सुरक्षित रहा ये विधानसभा क्षेत्र राप्ती और गोरा नदी से घिरा है।

पथरदेवा सीटः मंत्री सूर्य प्रताप शाही को पार्टी ने बनाया उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही पथरदेवा के विधायक हैं। भाजपा ने एक बार फिर इन्हें उम्मीदवार बनाया है। 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से सपा के शाकिर अली चुनाव जीते थे। फिर 2017 में बीजेपी के सूर्य प्रताप शाही ने चुनाव में विजय हासिल की। शाकिर अली के देहांत होने के बाद से पार्टी को क्षेत्र से एक दमदार चेहरे की तलाश थी। ऐसे में ब्रम्हाशंकर त्रिपाठी को सपा ने इस बार उम्मीदवार बनाया है। पथरदेवा विधानसभा क्षेत्र 2012 के चुनाव से अस्तित्व में है। इस विधानसभा क्षेत्र में सवा तीन लाख से अधिक वोटर हैं। यहां मुस्लिम और ओबीसी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

रामपुर कारखाना सीटःविधायक कमलेश की जगह सुरेंद्र लडे़ंगे चुनाव

भाजपा ने रामपुर कारखाना से पार्टी विधायक कमलेश शुक्ल का टिकट काट कर संगठन के सामान्य कार्यकर्ता सुरेंद्र चौरसिया को उम्मीदवार बनाई है। रामपुर कारखाना विधानसभा सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी। जहां से 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा की गजाला लारी विधायक निर्वाचित हुई थीं। 2017 में बीजेपी के कमलेश शुक्ला ने गजाला को पराजीत कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि कमलेश शुक्ला का स्वास्थ्य ठीक न रहने के चलते नेतृत्व अन्य को उम्मीदवार बनाना चाहती थी। ऐसे में कमलेश के पुत्र डा.संजीव शुक्ला यहां से दावेदारी कर रहे थे। लेकिन पार्टी ने संगठन से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ता सुरेंद्र चौरसिया को उम्मीदवार घोषित किया है। विधान सभा क्षेत्र में कुल करीब साढे़ तीन लाख मतदाता हैं।जिनमें सवर्ण मतदाताओं की तादाद सबसे अधिक है।

भाटपाररानी सीटःप्रत्याशी चयन को लेकर मंथन जारी

भाटपाररानी विधानसभा सीट से भाजपा अब तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। यहां के सपा विधायक आशुतोष उपाध्याय के खिलाफ पार्टी को मजबूत उम्मीदवार की तलाश है। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा ने सलेमपुर सांसद रविंद्र कुशवाहा के छोटे भाई जयनाथ कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया था, पर भाजपा के लहर में भी इसे कामयाबी नहीं मिली। ऐसे में सपा के गढ़ को तोड़ने के लिए दमदार चेहरे की तलाश में भाजपा नेतृत्व माथापच्ची करने में जुटा है। यह ओबीसी बाहुल्य सीट है। यहां कुर्मी वोटरों की संख्या अधिक है। आजादी के बाद से अब तक इस क्षेत्र से कभी बीजेपी के उम्मीदवार को जीत नहीं मिली है। यहां के मतदाता अक्सर लहर के विपरीत मतदान करते हैं। 1984 के चुनाव में इंदिरा लहर के बावजूद यहां से निर्दलीय कामेश्वर उपाध्याय जीते थे।

सलेमपुर सीटः विधायक के खिलाफ मुखर आवाज से नेतृत्व चिंतित

सलेमपुर विधानसभा क्षेत्र से काली प्रसाद भाजपा के विधायक हैं। काली प्रसाद के एक आडियो वायरल होने के बादे से उनकी परेशानी बढ़ गई है। आडियो में भाजपा के संगठन मंत्री संदिप बंसल के खिलाफ आपतिजनक शब्दों के प्रयोग करने की बात सामने आई है। हालांकि विधायक ने इसे साजिश करारते हुए खारिज कर दिया है। इस बीच जिले की सात सीटों में से पांच पर नाम घोषित होने के बाद भी सलेमपुर से उम्मीदवार तय न होने के कारण भाजपा विधायक के समर्थकों के मन में संशय बरकरार है। कभी यह सीट कांग्रेस और सोशलिस्टों का गढ़ रही है। 1980 के चुनाव में बीजेपी ने देवरिया में पहली बार कोई सीट जीती थी और वो सीट सलेमपुर सीट ही थी। 2012 के परिसीमन में ये सीट सुरक्षित सीट कर दी गई। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के मनबोध प्रसाद यहां से जीते तो 2017 में बीजेपी के काली प्रसाद को विजय श्री मिली।

बरहज सीटः विधायक सुरेश की छुटटी,शाका बने उम्मीदवार

बरहज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सुरेश तिवारी को इस बार पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। इनकी जगह पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद मिश्र के पुत्र दीपक मिश्र उर्फ शाका को उम्मीदवार बनाई है। 2012 के चुनाव में यहां से सपा के प्रेम प्रकाश सिंह चुनाव जीते थे। 2017 में यहां से बीजेपी के सुरेश तिवारी विधायक बने। इस बार सुरेश तिवारी अपनी जगह अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे थे। यहां से कांग्रेस पार्टी ने रामजी गिरि को उम्मीदवार बनाई हैं,जबकि सपा ने अभी अपना पत्ता नहीं खोला है। इस विधानसभा क्षेत्र में कुल तीन लाख से अधिक वोटर हैं।

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