Gyanvapi Masjid Controversy : ज्ञानवापी मस्जिद को मंदिर बताना AIMPLB को क्यों लगता धार्मिक विद्वेष पैदा करने की साजिश?

Gyanvapi Masjid Controversy : एआईएमपीएलबी का कहना है कि हिंदू पक्ष के एकवकील की ओर से दावा किया गया था कि सर्वे के दौरान वहां एक शिवलिंग पाया गया था। उसके बाद उस तालाब को सील कर दिया गया है। तालाब को सील करना साजिश का संकेत है।

Update: 2022-05-17 01:59 GMT

Gyanvapi Mosque Row : ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज, हिंदू पक्ष के हक में आया फैसला, कोर्ट ने कहा - मामला सुनने योग्य

Gyanvapi Masjid Controversy : ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे का काम पूरा होने के बाद हिंदू पक्ष के एक वकीलों द्वारा मस्जिद ( Gyanvapi Mosque ) को मंदिर बताना ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ( AIMPLB ) को एक साजिश लगता है। एआईएमपीएलबी ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में एक तालाब की सीलिंग को 'अनुचित' और सांप्रदायिक विद्वेष ( religious hatred ) पैदा करने का प्रयास' करार दिया है। इसके पीछे एआईएमपीएलबी ने कई कारण गिनाए हैं। दरअसल, हिंदू पक्ष के वकील की ओर से दावा किया गया था कि एक सर्वे के दौरान वहां एक शिवलिंग पाया गया था। उसके बाद एक तालाब को सील कर दिया गया है।

1. ज्ञानवापी को मंदिर बताना संवधानिक मूल्यों के खिलाफ

इस मामले में AIMPLB का कहना है कि सीलिंग आदेश सुनाए जाने से पहले मस्जिद समिति का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को पूरी तरह से नहीं सुना गया। इस मुद्दे को लेकर 16 मई को देर रात जारी एक बयान में AIMPLB के महासचिव खालिद सैफुल्ला रहमानी ( Khalid Saifullah Rahmani ) ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद ( Gyanvapi Masjid ) एक मस्जिद है और मस्जिद रहेगी। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ( AIMIM Chie Asaduddin Owaisi ) भी इस बात को दोहरा रहे हैं। उनका कहना है कि कयामत आने तक ज्ञानवापी मस्जिद, मजिस्द रहेगी। रहमानी का कहना है कि ज्ञानवापी को मंदिर कहने का प्रयास सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने की साजिश से ज्यादा कुछ नहीं है। यह एक है संवैधानिक अधिकारों का मामला है और कानून के खिलाफ है।

2. 1937 में कोर्ट नेमाना थ वजूखाना को मस्जिद की संपत्ति

एआईएमपीएलबी के महासचिव खालिद सैफुल्ला रहमानी का कहना है कि 1937 में दीन मोहम्मद बनाम राज्य सचिव के मामले में अदालत ने मौखिक गवाही और दस्तावेजों के आधार पर फैसला किया था कि यह पूरा परिसर ( Gyanvapi Masjid Campus ) मुस्लिम वक्फ का है। मुसलमानों को इसमें नमाज अदा करने का अधिकार है। कोर्ट ने मस्जिद और मंदिर का क्षेत्रफल भी तय कर दिया था। उसी समय वज़ूखाना को मस्जिद की संपत्ति के रूप में स्वीकार किया गया था।

3. संसदीय अ​धिनियम पूजा स्थल में यथास्थिति के पक्ष में

कांग्रेस शासनकाल में 1991 में संसद द्वारा पूजा स्थल अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम में कहा गया कि 1947 में पूजा स्थलों को उसी स्थिति में रखा जाएगा। यहां तक कि बाबरी मस्जिद के फैसले में भी कहा गया कि अब सभी जगह पूजा स्थल इस कानून के तहत होंगे।

4. वजूखाना को सील करने का आदेश गलत

AIMPLB का कहना है कि मस्जिद के अंदर मंदिर होने के दावे को अदालत को तत्काल खारिज कर देना चाहिए था। इसके उलट वाराणसी की दीवानी अदालत ने सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी का आदेश दिया। वक्फ बोर्ड ने इस मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यह मामला वहां लंबित है। ज्ञानवापी मस्जिद ( Gyanvapi Masjid ) प्रबंधन समिति ने भी दीवानी अदालत के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। खालिद सैफुल्ला रहमानी का कहना है कि इन सब बातों को नजरअंदाज करते हुए दीवानी अदालत ने पहले सर्वे का आदेश जारी किया और फिर उसकी रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए वजूखाना के हिस्से को सील करने का आदेश जारी किया।

5. धार्मिक स्थलों की रक्षा करे सरकार

दीवानी अदालत का आदेश कानूनी मूल्यों के विपरीत है। एक अदालत से हम इसकी उम्मीद नहीं करते। सरकार को आदेश के कार्यान्वयन को रोकना चाहिए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए। 1991 के अधिनियम के मुताबिक सभी धार्मिक स्थलों की रक्षा करनी चाहिए। यदि इस तरह के तर्कों के आधार पर पूजा स्थलों की स्थिति बदली जाती रही तो देश में उथल-पुथल मच जाएगी। मुसलमान इस अत्याचार को बर्दाश्त नहीं कर सकते।

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