यूपी के सत्ताधारियों ने माफिया विकास दुबे को नहीं दिया होता संरक्षण तो आज 8 पुलिसवालों को नहीं देनी पड़ती श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दलों ने कानपुर देहात में आठ पुलिस कर्मियों की गैंगस्टर विकास दुबे के गिरोह द्वारा हत्या किए जाने की निंदा की है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि राजनीतिक दल अपराधियों को अपना संरक्षण देना कब बंद करेंगे...

Update: 2020-07-03 06:47 GMT
इस शिलापट्ट को ध्यान से देखिए, इसमें जिला पंचायत का सदस्य होने के बावजूद बड़े अक्षरों में विकास दुबे का नाम पहले है जबकि अध्यक्ष का नाम छोटे अक्षर में नीचे है.

जनज्वार। कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों के मारे जाने के बाद सरकार और प्रशासन में खलबली मच गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसकी विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर, प्रक्षेत्र के आईजी समेत सभी बड़े अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और कांबिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

घटना पर दुःख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा, 'जनपद कानपुर में कर्तव्य पथ पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले आठ पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि। शहीद पुलिसकर्मियों ने जिस अपरिमित साहस व अद्भुत कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया, उत्तरप्रदेश उसे कभी भूलेगा नहीं। उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा'।

दो जुलाई की देर रात कानपुर के बिठूर थाना क्षेत्र के बिकारु गांव में कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे के शूटरों ने पुलिस दल के ऊपर फायरिंग झोंक दी थी। फायरिंग में एक क्षेत्राधिकारी सहित आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे। इस दौरान सात अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस हत्या के प्रयास के एक मामले में विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई थी। अचानक हुई फायरिंग में पुलिसकर्मियों को संभलने का भी मौका नहीं मिल सका था।

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, 'कानपुर में कर्तव्यपालन कर दौरान शहीद पुलिसकर्मियों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा और उन सभी हत्यारे अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाएगा और कठोर से कठोर दंड दिया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार ने पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में एसटीएफ का गठन कर मौके पर भेज दिया है। इन अपराधियों के बारे में कोई सूचना संज्ञान में आने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त कानपुर नगर के आसपास के सभी जनपदों, जहां इन अपराधियों के जाने की संभावना है, को सील कर दिया गया है'।

बहुजन समाज पार्टी पार्टी की अध्यक्ष व राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी ट्वीट कर इस घटना की निंदा की है और कहा है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहिए, भले ही इसके लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत क्यों न पड़े। उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था दुरुस्त करने व मृतकों के परिजनों को मुआवजा व सरकारी नौकरी देने की मांग सरकार से की है।

पुलिस ने गांव के हर रास्ते की नाकेबंदी कर दी है और कांबिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आसपास के गांवों के रास्तों की भी घेराबंदी की गई है। एसटीएफ की तैनाती की गई है और बड़ा ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

डीजीपी एचसी अवस्थी ने कहा, 'वहां एसटीएफ की तैनाती कर दी गई है। एसटीएफ के आईजी को भेज दिया गया है। एसपी, एसटीएफ वहां मौजूद हैं। बड़ा ऑपरेशन चलाया जा रहा है। यह ऑपरेशन पहले वाले का ही हिस्सा है। चूंकि अंधेरे का फायदा उठाकर अपराधी भागने में सफल रहे थे। कानपुर की फॉरेंसिक टीम वहां पहले से मौजूद है। लखनऊ से भी टीम भेजी जा रही है'।

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने घटनास्थल का दौरा किया है। उन्होंने पूरे मामले की जांच की और पुलिसकर्मियों से घटना की जानकारी ली।

एडीजी ने मीडिया से बात करते हुए कहा 'अगर पुलिस की किसी लापरवाही की बात सामने आती है तो इसकी भी जांच कराई जाएगी। एक ग्रामीण सहित सात अन्य पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं। पुलिस के कुछ हथियार गायब होने की बात भी सामने आई है। इस घटना में शामिल अपराधियों को शीघ्र पकड़ा जाएगा और कड़ी सजा दिलाई जाएगी'।

कानपुर ज़ोन के एडीजी जीन सिंह ने कहा 'कन्नौज और कानपुर देहात से भी पुलिस बल बुला लिया गया है। घायलों का इलाज चल रहा है। छापामारी जारी है'। 

वहीं इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने सोशल मीडिया पर लिखा है—

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