कानपुर के कारोबारी इरशाद ने बैंकों का हड़पा 56 करोड़, फिल्म ताजमहल में लगाया 18 करोड़

इरशाद एक उदाहरण है कि देश के बड़े कारोबारियों से लेकर मंझोले व छोटे कारोबारी तक कैसे मामूली लोन गारंटी पर बैंकों से मोटा पैसा कर्ज पर उठाते हैं और फिर उसे एनपीए में परिवर्तित करवाते हैं और पैसों को कहीं और निवेश कर डालते है। यह पैसा भारत के आम-अवाम व गरीब का ही होता है...

Update: 2020-07-31 07:05 GMT

जनज्वार। यूपी के कानपुर का एक चमड़ा कारोबारी इन दिनों चर्चा में है। नाम है इरशाद आलम। इरशाद सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष महताब आलम का भाई है। इरशाद आलम ताजमहल फ़िल्म का सह निर्माता भी है जिस पर इलाहाबाद बैंक ने खूब दरियादिली दिखाई। प्रवर्तन निदेशालय के हत्थे चढ़ा कारोबारी को करोड़ों रुपये का लोन देकर उसके खातों को एनपीए यानी नॉन परफार्मिंग एसेट्स होने के बाद बैलेंस शीट से हटा दिया गया था। यह पूरा खेल इलाहाबाद बैंक की बड़ा चौराहा स्थित मुख्य शाखा में अफसरों की शह पर हुआ था। 

हालांकि यह मामला पुराना जरूर है लेकिन सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की अब तक कि चली जांच में तमाम तथ्य सामने आए थे जिसमें अब तक तीन अफसरों की गिरफ्तारी हो चुकी है। कई अन्य भी जांच के दायरे में हैं। इन सभी पर इरशाद आलम की तरह कभी भी जांच की गाज गिर सकती है। एक करोड़ की जमानत राशि पर 10 करोड़ का लोन दिया गया, वह पहले 38 बढ कर 38 करोड़ और बाद में बढ़कर 56 करोड़ तक पहुंच गया।

कया है मामला?

चमड़ा कारोबारी होने के साथ ही एक पेट्रोल पंप के मालिक रहे इरशाद आलम ने 2001-02 में विदेश व्यापार के नाम पर इलाहाबाद बैंक से 10 करोड़ रुपये का लोन लिया था। इसमें मात्र एक करोड़ रुपये की एफडीआर बतौर जमानत के रखी गई थी। इस रकम की किस्तें अनियमित होने के बाद भी लोन की रकम पांच सालों में बढ़कर 38 करोड़ रुपये पहुंच गई। 38 करोड़ की भारी भरकम रकम पर कुल जमा रकम पर महज छह करोड़ के एफडीआर लिए गए। बैंक के आलाधिकारियों ने कभी इस बात की जांच करने की जहमत नहीं उठाई जबकि कारोबारी के अनियमित होते खातों पर इतनी मेहरबानी होती रही।

साल 2006 में कारोबारी का लोन खाता एनपीए भी हो जाता है। रकम वसूली के लिए जटिल कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई, बावजूद इसके बैंक को कुछ भी हाथ नहीं लगा। खाता एनपीए होने के तीन साल बाद बैलेंसशीट से हटा दिया गया। इसके बाद सीबीआई और ईडी की जांच में मामले की परत दर परत उधड़ रही है। इस दौरान इरशाद आलम ताजमहल फ़िल्म पर 18 करोड़ रुपये लगाकर उसका सहनिर्माता बन गया। फ़िल्म पर लगी यह 18 करोड़ की रकम लोन की ही थी।

कारोबारी इरशाद के फर्जीवाड़े की कहानी

फर्जी जर्मन कंपनी बनाकर चार बैंकों से 56 करोड़ की रकम हड़प जाने के बाद गिरफ्तार इरशाद के कई खुलासे सामने आए। व्यवसायी इरशाद ने न सिर्फ फर्जी दस्तावेजों पर लोन लिया बल्कि लोन कि रकम हड़पने के लिए उसने खुद ही फर्जी कागजों पर जर्मन कंपनी बना डाली। इसके बाद उसने दावा किया था कि एक जर्मन कंपनी को करोड़ों का माल भेजा है, लेकिन वहां से भुगतान नहीं हुआ। इडी की जांच में खुलासा हुआ कि यह जर्मन कंपनी फर्जी है।

चमड़ा कारोबारी इरशाद आलम ने शहर की चार अलग-अलग बैंकों से कुल 56 करोड़ रुपये का लोन लिया था। यह लोन विदेश व्यापार के नाम पर लिया गया था। 2006 में इरशाद के बैंक खाते एनपीए भी हो गए। मामले की सीबीआई जांच हुई थी। 2014 में ईडी ने केस दर्ज किया। ईडी के मुताबिक लोन लेकर विदेश व्यापार तक जितने भी दस्तावेज लगाए गए वो सभी फर्जी थे। जिनको ईडी ने साक्ष्य बनाया है। सूत्रों के मुताबिक इरशाद ने पेट्रोल पंप सहित जिन प्रोपर्टियों के दस्तावेज लगाए थे वह सभी पहले से ही गिरवी रखी हुई थी। सभी फर्जीवाड़े को देखते हुए अब ईडी ने पीएमएल कोर्ट से आरोपी की 5 दिन की रिमांड मांगी है।

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