Levana Hotel : 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया लेवाना होटल प्रबंधन, चार-चार नोटिसों के बाद भी क्यों अकड़ में था समूह
Levana Hotel : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में स्थित होटल लेवाना (Hotel Levana) में सोमवार, 5 सितंबर की सुबह आग लग गई थी। इस हादसे में चार लोगों की मौत की खबर है। वहीं शुरुआती जांच में ये सामने आया है कि लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) को इस होटल का कोई नक्शा जमा नहीं किया गया था।
Levana Hotel : 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया लेवाना होटल प्रबंधन, चार-चार नोटिसों के बाद भी क्यों अकड़ में था समूह
Levana Hotel : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में स्थित होटल लेवाना (Hotel Levana) में सोमवार, 5 सितंबर की सुबह आग लग गई थी। इस हादसे में चार लोगों की मौत की खबर है। वहीं शुरुआती जांच में ये सामने आया है कि लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) को इस होटल का कोई नक्शा जमा नहीं किया गया था। अब इस अग्निकांड के बाद होटल को सील कर ध्वस्त करने का निर्देश दिया गया है। इस हादसे के बाद राज्य और राज्य के बाहर लेवाना होटल चर्चा में है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद होटल प्रबंधन के चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। इनमें राहुल अग्रवाल, रोहित अग्रवाल, पवन अग्रवाल समेत होटल के मैनेजर सागर श्रीवास्तव को अरेस्ट किया गया है। इन सभी को मेडिकल जांच के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इन सभी में पवन अग्रवाल होटल के मालिक हैं। जबकि रोहित और राहुल लेवाना ग्रुप का अलग-अलग बिजनेस संभालते हैं।
तमाम छानबीन के बाद जनज्वार को लिंकेडिन पर राहुल, रोहित और पवन के बारे में छोटी-छोटी जानकारी मिल पाई है। जिस मुताबिक ग्रुप के मालिक पवन अग्रवाल ने अगस्त 2018 में लेवाना का कार्यभार संभालना लिख रखा है। वहीं सिंबायोसिस से एमबीए राहुल अग्रवाल लेवाना ग्रुप के डायरेक्टर हैं। राहुल अप्रैल 2002 से इस पद पर हैं। यानी 20 साल 6 महीने से वह होटल और लेवाना ग्रुप की कमान संभाल रहे हैं। वहीं रोहित अग्रवाल भी ग्रुप के डायरेक्टर हैं। वह रियल स्टेट डेवलपमेंट का काम देखते हैं। लॉ-मारटीनियर कॉलेज लखनऊ से पढ़े रोहित लगभग 12 से अधिक सालों से कंपनी का काम देख रहे हैं।
लखनऊ के एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम ना छापने की शर्त पर जनज्वार को बताया कि कुछ नौकरशाहों की शह पर यह ग्रुप फला-फूला है। मानक के विपरीत होने के बावजूद भी इनपर कभी कार्रवाई नहीं हो सकी। लखनऊ विकास प्राधिकरण की तरफ से एक नहीं बल्कि चार-चार बार नोटिस मिलने के बावजूद यह लोग बच जाते रहे। हमें यह भी बताया गया कि अगर सोमवार को यह हादसा ना हुआ होता तो शायद ही इनपर कभी कार्रवाई होती भी।
सोमवार तड़के लखनऊ के लेवाना सूट होटल में लगी भीषण आग ने शहर में बने होटलों और अस्पतालों में सुरक्षा के मानकों की पोल खोलकर रख दी थी। इस हादसे में पांच लोगों की मौत होने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख से अधिकारियों के हाथ -पांव फूल गए। शासन से जुड़े सूत्रों की माने तो लेवाना होटल नियमों को ताक पर रखकर बनाया गया था और गलत तरीके से एनओसी भी जारी की गई थी। इसकी जांच के लिए कमेटी बनाई गई है।
जानकारी के मुताबिक होटल मालिकों को सबसे पहले LDA की तरफ से 7 मई, 2022 को नोटिस दिया गया था। नक्शा जमा न करने की वजह से 26 मई, 2022 को जोन-6 के जोनल अधिकारी ने होटल के मालिकों को दूसरा नोटिस दिया था। 17 अगस्त 2022 को जोन-6 के असिस्टेंट इंजीनियर ने अपनी रिपोर्ट एलडीए के वीसी को सौंप दी थी। असिस्टेंट इंजीनियर की रिपोर्ट पर 18 अगस्त, 2022 को एलडीए ने 6400 वर्ग मीटर में बिना नक्शा पास कराए होटल बनाने पर केस 537/2022 दर्ज कर तीसरा नोटिस जारी कर दिया।
28 अगस्त को एलडीए ने होटल मालिकों को नक्शा जमा करने और अन्य सरकारी विभागों से जुड़े दस्तावेजों को पेश करने के लिए चौथा नोटिस जारी किया और अगले दिन 29 अगस्त को तलब किया था। बीती 29 अगस्त को होटल मालिकों की तरफ से एलडीए में न कोई पहुंचा और न ही कोई दस्तावेज जमा कराए गए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक होटल के निर्माण से पहले मालिकों ने LDA यानी लखनऊ विकास प्राधिकरण में शपथ पत्र देकर कहा था कि इस भूखंड पर आवासीय निर्माण होगा, कोई कॉमर्शियल यूज नहीं किया जाएगा, लेकिन मालिकों ने रेजीडेंशियल यूज का शपथ पत्र देकर होटल लेवाना खड़ा कर दिया। यानी आवासीय उपयोग के लिए ज़मीन ली गई, फिर उस जगह होटल खड़ा कर दिया गया।
सीएम की सख्ती के बाद हुई गिरफ्तारी
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्पताल में घायलों से मुलाकात की थी और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली थी। उन्होंने इस घटना की संभागीय आयुक्त रोशन जैकब और पुलिस आयुक्त एसबी शिराडकर द्वारा संयुक्त जांच के भी आदेश दिए। आग की घटना के कुछ घंटे बाद, लेवाना सूट के मालिक पवन अग्रवाल, राहुल और रोहित अग्रवाल, होटल प्रबंधक सागर श्रीवास्तव के साथ उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 304 (लापरवाही से मौत के लिए) और 308 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के बाद गिरफ्तार किया गया था।
मदन मोहन मालवीय मार्ग स्थित होटल लेवाना को एलडीए ने सील करने के साथ ध्वस्त करने के आदेश हुए है। शासन ने इस अग्निकांड में मंडलायुक्त और पुलिस आयुक्त को जांच सौंपी है। लखनऊ के हजरतगंज इलाके में स्थित होटल लेवाना को सील करने और विधिक प्रक्रिया पूरी करते हुए ध्वस्तीकरण के निर्देश मंडलायुक्त ने दिए हैं। प्राथमिक जांच में पाया गया कि लेवाना होटल का कमर्शियल नक्शा पास नहीं है। मंडलायुक्त डा. रोशन जैकब ने होटल को सील कर ध्वस्त करने की कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही जिन होटलों ने एलडीए को नोटिस मिलने के बाद कोई दस्तावेज नहीं दिए हैं, उनको सील करने के निर्देश भी दिए हैं।
बहरहाल होटल समूह मानक के विपरीत बना था। चार चार नोटिस दिए जाने के बाद भी वह किस अकड़ में बना रहा जो ना तो कागज दिखाये और ना ही खुद भी कहीं गये। वह कौन लोग थे जो इस ग्रुप को संरक्षण दे रहे थे? यह जांच के बाद पता चलेगा। जांच टीम यह भी पता करेगी की वे कौन से अफसरशाह थे जिनके बलबूते यह लोग फलते और फूलते रहे? साथ ही यह भी देखना है कि क्या जांच पूरी भी हो पाती है, अथवा किसी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?