यूपी के मेरठ में डॉक्टर बन गये मदारी, 15 दिन पहले हुई मौत, मरीज को जिंदा बताकर दिखाते रहे खेल

कमेटी की शुरुआती जांच में संतोष कुमार की 23 अप्रैल को मौत की पुष्टि हुई है, इस मामले को लेकर पुलिस भी अपने स्तर स्तर पर जांच कर रही है...

Update: 2021-05-09 05:31 GMT

जनज्वार, मेरठ। कोरोना महामारी के बीच डॉक्टर भी अपने पेशे को हर तरह से कलंकित करवाने में कोई भी कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। यूपी के मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज से एक शर्मनाक घटना निकलकर आई है। यहां 15 दिन पहले मर चुके कोरोना मरीज को डॉक्टर ठीक बताते रहे। जब बेटी अस्पताल पहुंची तो मरीज को गायब बता दिया गया। गुरुवार को पता चला कि मरीज की 23 अप्रैल को ही मौत हो चुकी है।

वहीं मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि उसी दौरान शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने चूक मानते हुए जांच कमेटी बनाई। कमेटी की शुरुआती जांच में संतोष कुमार की 23 अप्रैल को मौत की पुष्टि हुई है। इस मामले को लेकर पुलिस भी अपने स्तर स्तर पर जांच कर रही है।

गौरतलब है कि राजनगर एक्सटेंशन गाजियाबाद निवासी संतोष कुमार 21 अप्रैल की सुबह 11 बजे मेडिकल कॉलेज मेरठ के कोविड वार्ड में भर्ती हुए थे। बेटी शिखा शिवांगी के अनुसार, वह रोजाना कंट्रोल रूम पर फोन कर अपने पिता का हाल पूछती थीं। कंट्रोल रूम का स्टाफ उन्हें 3 मई तक पिता के ठीक होने की खबर देता रहा। तीन मई के बाद कोई जानकारी नहीं लगी तो वह मेरठ आ गई। कोविड वार्ड में संतोष का कुछ पता नहीं चला। 

मेडिकल कॉलेज के प्रचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार का कहना है कि 'शव का अंतिम संस्कार उसी दौरान संतोष के नाम से कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि कोविड वार्ड में संतोष कपूर और संतोष कुमार नाम के दो मरीज भर्ती थे। संतोष कुमार की मौत 23 अप्रैल को हो गई। एक नाम के दो मरीज होने से स्टाफ को गलतफहमी हो गई और वह संतोष कपूर का हाल संतोष कुमार के परिजनों को देते रहे। जांच कमेटी की रिपोर्ट पर कार्रवाई होगी।' 

वहीं इस मसले पर मेरठ के एसएसपी अजय साहनी का कहना है कि 'मरीज की मौत हो चुकी है। मडिकल प्रशासन के अनुसार शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया था। यदि परिजन कोई तहरीर देंगे तो विधिक राय लेकर कारवाई की जाएगी।'

Tags:    

Similar News