अखण्ड राजपूताना सेवा संघ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनीं दलित छात्रा की हत्या की आरोपी प्रोफ़ेसर, कहा-भाजपा विधायक के दबाव में फंसाया गया
हाल ही में अखण्ड राजपुताना सेवा संघ की बैठक में दिव्या रानी सिंह को संगठन का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाते हुए महिला संगठन तैयार करने हेतु उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया..
सवालों के घेरे में प्रियंका की मौत : तीन दिन पहले ही कुकिंग कंपटीशन में पहले स्थान पाने वाली लड़की की मौत को घरवाले नहीं मान रहे आत्महत्या
जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट
जनज्वार। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की छात्रा प्रियंका कुमारी की हत्या के मामले में आरोपी गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिव्या रानी सिंह अपने बयान को लेकर चर्चा में है। हाल ही में अखण्ड राजपुताना सेवा संघ की बैठक में दिव्या रानी सिंह को संगठन का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाते हुए महिला संगठन तैयार करने हेतु उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया। वेबिनार में दिव्या रानी सिंह ने कहा कि भाजपा के नगर विधायक डा. राधा मोहन अग्रवाल के दबाव में मेरे उपर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया। एक जाति विशेष को इन लोगों द्वारा जानबूझ कर निशाना बनाया जा रहा है। वेबिनार में वक्ताओं ने कहा कि हमलोगों की जाति के ही मुख्यमंत्री भी है। विधान सभा चुनाव को देखते हुए जातिगत ध्रुविकरण की कोशिश की जा रही है।
मालूम हो कि गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर साहबाजगंज पोखरा टोला निवासी दलित परिवार के विनोद कुमार की 21 वर्षीय पुत्री प्रियंका गोरखपुर विश्वविद्यालय में बीएससी (गृह विज्ञान) तृतीय वर्ष की छात्रा थी। 31 जुलाई की सुबह नौ बजे से दीक्षा भवन में प्रियंका की परीक्षा थी। सुबह साढ़े दस बजे परीक्षा देकर वह कक्षा से बाहर निकली।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अंतिम बार उसे विभाग के शौचालय की ओर जाते देखा गया। दोपहर करीब 12 बजे गृह विज्ञान विभाग के शौचालय की तरफ गई कुछ छात्राओं ने स्टोर रूम के पास गैलरी में फंदे से लटकता छात्रा का शव देखकर शोर मचाया। प्रत्यक्षदशियों के मुताबिक प्रियंका का पैर जमीन से सटा हुआ था।गले में फंदा उसके दुपटटे का था। घटना की सूचना मिलने पर एसएसआई कैंट प्रवींद राय और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई।
टीम को घटनास्थल के पास से एक मेज पर पर्स पड़ा मिला, जिसमें बीएससी (गृह विज्ञान) तृतीय वर्ष का प्रश्न पत्र, आधार कार्ड व मोबाइल नंबर था। आधार कार्ड से पहचान कर घरवालों को सूचना दी गई। विश्वविद्यालय पहुंचे पिता विनोद कुमार ने पुलिस को बताया कि सुबह ही परीक्षा थी, जिसके चलते उनकी बेटी बिना भोजन किए ही परीक्षा देने चली आई थी। सुबह उसके भाई ने ही बाइक से कैंपस के बाहर प्रियंका को छोडकर लौटा था।
घर में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। अचानक हुई इस घटना से परिवार के लोग हतप्रभ हैं। तीन दिन पूर्व ही कैंपस में आयोजित कुकिंग कंपटिशन में प्रियंका ने प्रथम स्थान लाया था।ऐसे में मौत के पीछे डिप्रेशन में आत्महत्या कर लेने की बात को गलत बताते हुए परिजन हत्या का आरोप लगा रहे थे।
घटना के दूसरे दिन नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल प्रियंका के घर पहुंचे और फिर एसपी सिटी से वार्ता कर वहीं पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद विधायक ने परिजनों से हत्या की बात बताई। विधायक ने बताया कि सिर पर चोट की बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट में है। पैर भी जमीन से सटे हुए थे तो उसकी सांस कैसे फूल सकती है? आत्महत्या करने वाले के सिर में चोट के निशान नहीं हो सकते हैं। ये निशान कहां से आएंगे।
नगर विधायक ने कहा कि पोस्टमार्टम से साफ है कि जिंदा रहते गला घुटने से मौत हुई है। विधायक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार छात्रा की मौत गला दबाने से हुई है जिसके बाद उसे दुपट्टे से बांधकर लटकाया गया है।रिपोर्ट के मुताबिक छात्रा के सिर के पीछे चोट के निशान थे। छात्रा के हाथ की घड़ी गायब थी। छात्रा के कपड़े धूल से लिपटे हुए थे व बांह के कपड़े फटे हुए थे। विधायक के लौटने के बाद परिजन कैंट थाने पहुंच गए और तहरीर देकर हत्या का केस दर्ज करने की मांग की। जिस पर बाद में पुलिस द्वारा विभाग की अध्यक्ष दिव्या रानी सिंह व उनके सहयोगियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
अखण्ड राजपुताना सेवा संघ ने आरोपित दिव्या रानी का किया बचाव
अखण्ड राजपुताना सेवा संघ के वेबिनार में संगठन को मजबूत बनाने के साथ ही प्रियंका हत्याकांड चर्चा में रहा। वेबिनार में पूरी घटना का विवरण सुनाते हुए प्रोफेसर दिव्या रानी ने कहा कि अचानक नगर विधायक के कहने पर पुलिस दबाव में आ गई। विधायक के कहने पर पर अचानक आंदोलन तेज हो गया, व देखते देखते विश्वविद्यालय पुलिस छावनी में तब्दील हो गई। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद पांच सदस्यों के चिकित्सकों की टीम बनाकर रिपोर्ट का पुनः अध्ययन किया गया। खास बात यह रहा कि पीड़ित पक्ष की मांग पर दो अनुसूचित सदस्यों को भी टीम में रखा गया।
रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सकों की टीम ने हत्या के आरोपों से इंकार किया। दिव्या रानी ने कहा कि घटना के समय मैं कुलपति के साथ में वेबिनार में शामिल थी। इसके बाद भी हत्या के मुकदमे में फंसा दिया गया।
गोरखपुर में आए भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद रावण ने कहा कि न्याय की मांग को लेकर प्रदेश स्तर पर लड़ाई लड़ने में पीछे नहीं रहेंगे। चंद्रशेखर ने कहा कि आप लोगों के कहने से कातिलों को सजा नहीं मिलेगी। यह योगी जी की सरकार है। पुलिस प्रशासन उनका है। रिपोर्ट भी बदल जाएगी। कोई हत्या भी करेगा तो उसे यह योगी मॉडल की सरकार है जहां प्रियंका की हत्या कर दी जाती है। चन्द्रशेखर ने प्रशासन को चुनौती देने के अंदाज में कहा कि आप जेल खाली करवा लीजिए मैं गोरखपुर की जेल जाने को तैयार हूं। चंद्रशेखर ने कहा कि मैं भी देखना चाहता हूं कि गोरखपुर की पुलिस में कितना दम है। ।
दलित बनाम सवर्ण के राजनीतिक गोलबंदी की हो रही कोशिश
प्रियंका हत्याकांड को लेकर पुलिस का शुरू से ही जांच की दिशा आत्महत्या की ओर केंद्रित करते हुए अपने तहकीकात में लगी है। दलितों के राजनीतिक हितैषी लगातार दबाव बनाए हुए हैं। उधर भाजपा के नगर विधायक के मृतक के परिवार के पक्ष में खड़ा होने से एक नई राजनीतिक परिस्थितियां बन रही है।
इस बीच जहां विधानसभा चुनाव करीब है, ऐसे में अखण्ड राजपुताना सेवा संघ के वेबिनार में हुई बहस ने माहौल को और गरमा दिया है। वेबिनार में दिव्या रानी के पक्ष में खड़ा होते हुए लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने का संकल्प लेकर संगठन ने दलितों के खिलाफ एक राजनीतिक गोलबंदी की जमीन तैयार कर दी है। जिसका असर अगले कुछ माह तक बरकरार रहने की उम्मीद है।