UP News : भृष्टाचार को लेकर योगी के एक और मंत्री के बागी हुए तेवर, सीएम को चिट्ठी भेजकर रखी ये मांग
UP News : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री ने मंडी परिषद में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है। इस सिलसिले में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सीएम योगी को लेटर भेजा है।
UP News : भृष्टाचार को लेकर योगी के एक और मंत्री के बागी हुए तेवर, सीएम को चिट्ठी भेजकर रखी ये मांग
UP News : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री ने मंडी परिषद में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है। इस सिलसिले में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सीएम योगी को लेटर भेजा है। जिसमें विकास कार्यों में करप्शन की जानकारी दी गई है। लेटर में आरोप है कि मंडी परिषद के अधिकारियों ने गोदाम में लगे सीसीटीवी खराब कर दिए। आरोप यह भी है कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बने मैंगो पैक हाउस और कंस्ट्रक्शन में कई फीट गड्ढे होने के बाद भी अफसरों ने बिल पास करा दिए हैं।
मंडी परिषद राज्यमंत्री मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने योगी को भेजे पत्र में लिखा कि समीक्षा बैठक की पूरी रिकॉर्डिंग कराई गई है। सभी उपनिदेशक इसमें मौजूद थे। सिर्फ सहारनपुर के अधिकारी नहीं थे। मंडी में रजिस्टर्ड ठेकेदारों ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों ने ठेकेदारों पर आरोप लगाया है।
लेटर में लिखे गये क्या हैं 10 बिंदू
1. मंडी समितियों में व्यापारियों से चेक लिए जा रहे हैं। जो बाद में बाउंस हो जाते हैं। जबकि चेक नहीं लिए जाने के निर्देश हैं। बकाए रुपए की वसूली का कोई सही प्रयास अधिकारियों से लेकर निचले अधिकारियों तक नहीं किया जा रहा है। ऐसे में अगर बकाया धनराशि बैंक में पड़ी है, तो एक बड़ी धनराशि ब्याज के रूप में विभाग को मिलती। ऐसा नहीं किए जाने पर यह एक वित्तीय लापरवाही की श्रेणी में भी आता है।
2. मंडी समितियों में वे-ब्रिज लगाए गए हैं। उसका एक्सेस खराब रहता है। यह भी संज्ञान में आया है कि उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से वे-ब्रिज के पास एक अन्य रास्ता बना दिया गया है। जिसके कारण ज्यादातर वाहन वे-ब्रिज से मंडी के अंदर नहीं जाते हैं। इससे बड़ी धनराशि खर्च करने के बावजूद भी उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है।
3. मंडी समितियों में जो CCTV कैमरे लगे हैं। उन्हें जानबूझकर खराब किया गया या उन कैमरों का डायवर्ट करके बड़ी मात्रा में मंडी शुल्क की चोरी की जाती है। अगर इस चोरी को रोक दिया जाए, तो मंडी की आय करोड़ों में बढ़ जाएगी।
4. मंडी समितियों में दुकान और गोदामों के आवंटन में दिए गए प्रीमियम और यूजर चार्ज का बकाया करीब 213 करोड़ से अधिक है। वसूली न किए जाने के संबंध में जब अधिकारियों से पूछा गया तो उनका कोई भी जवाब संतोषजनक नहीं मिला।
5. फल व सब्जी मंडी में बड़े पैमाने पर गंदगी होती है। जिसकी सफाई कराने में काफी बड़ी धनराशि आती है। मंडी की खाली पड़ी जमीन पर पीपीपी मॉडल और बायो कंपोस्ट यूनिट लगाए जाने से गंदगी से बचने से के साथ-साथ युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और किसानों को जैविक खाद भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
6. विभिन्न निर्माण कार्य समय से खत्म होने चाहिए। पिछले 1 वर्ष से 5 वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद अभी भी पूरा नहीं किया जा सका है। अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं।
7. मंडी परिषद के अधिकारियों की बैठक में मंडी परिषद के कुछ ठेकेदारों को भी शामिल करना पड़ा। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग गोपनीय रखी गई है। एग्री एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए मंडल स्तर पर और ज्यादा सेमिनार करने चाहिए। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक्सपर्ट की राय भी ली जा सकती है।
8. मंडी परिषद, मंडी समितियों की संपत्तियों का रजिस्टर बनाकर संपत्तियों का आकलन राजस्व विभाग को करना है। अतिक्रमण होने पर विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए।
9. मंडी के सभी उपनिदेशक को नियमित रूप से मंडी समितियों में भ्रमण करना चाहिए। इसके रजिस्टर बनाए जाने थे। जोकि किसी ने नहीं बनाए हैं।
10. वाराणसी में मैंगो पैक हाउस हो या अन्य निर्माण कार्य। बिना देखे प्रशासनिक एवं वित्तीय मंजूरी प्रदान की गई। कई फीट गड्ढे में निर्माण कार्य शुरू है। इसकी क्वालिटी इतनी खराब है कि कई बार शिकायतों के बावजूद भी अधिकारियों ने कोई भी रुचि नहीं दिखाई। जिसकी जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराए जाने की आवश्यकता है।
इससे पहले इन मंत्रियों ने खोला था मोर्चा
बता दें कि, इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने अपने ही विभाग पर सवाल उठाए थे। ब्रजेश पाठक ने ट्रांसफर-पोस्टिंग में भ्रष्टाचार को लेकर लेटर भी लिखा था। यही नहीं उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद से स्पष्टीकरण भी मांगा था। पत्र जारी कर डिप्टी CM ने ट्रांसफर के कारण सहित डिटेल देने के लिए कहा था। यही नहीं ट्रांसफर-पोस्टिंग में तबादला नीति पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने सीएम योगी से भी मामले में शिकायत की थी।
क्या था पीडब्ल्लयूडी का मुद्दा
लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों और अफसरों के तबादले में हुई धांधली में सीएम योगी ने बड़ा एक्शन लिया था। पहली गाज विभागीय मंत्री जितिन प्रसाद के विशेष कार्याधिकारी अनिल कुमार पांडेय पर गिरी। उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त करते हुए भारत सरकार को वापस करने का आदेश शासन ने जारी कर दिया। पांडेय के खिलाफ विभाग में हुए तबादले में भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें मिली थीं। उन्हें केंद्र सरकार को वापस करते हुए उनके खिलाफ विजिलेंस जांच कराने की केंद्र से संस्तुति की गई है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित तीन IAS अधिकारियों की जांच कमेटी की सिफारिश पर की गई। इसी मामले में प्रमुख अभियंता मनोज कुमार गुप्ता, प्रमुख अभियंता राकोश कुमार सक्सेना और सीनियर स्टॉफ ऑफीसर शैलेंद्र कुमार यादव को निलंबित किया गया था।