Uttarakhand Weather Update: पहाड़ में आफत की बारिश, मानसून की पहली दस्तक ने डराया, मौतों का सिलसिला हुआ शुरू

Uttarakhand Weather Update: उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू होते ही जनजीवन को मुश्किलों का सामना करना पड़ गया। बरसात ने जहां तपते पहाड़ों की गर्मी से निजात दिलाई है तो कई और मुश्किलें शुरू हो गई।

Update: 2022-06-29 13:39 GMT

Uttarakhand Weather Update: पहाड़ में आफत की बारिश, मानसून की पहली दस्तक ने डराया, मौतों का सिलसिला हुआ शुरू

Uttarakhand Weather Update: उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू होते ही जनजीवन को मुश्किलों का सामना करना पड़ गया। बरसात ने जहां तपते पहाड़ों की गर्मी से निजात दिलाई है तो कई और मुश्किलें शुरू हो गई। प्रदेश भर के कई स्थानों पर भूस्खलन और मार्गों पर मलबा आने का सिलसिला शुरू हो गया है। राज्य में नेशनल हाइवे सहित 88 सड़कें बंद होने की खबर है। बरसाती नाले की चपेट में आकर एक व्यापारी की मौत हो गई है। क्षेत्र का जायेज़ा लेने निकले कपकोट के विधायक सुरेश गड़िया तक बारिश और मलबे से प्रभावित सड़क पर फंस गए। सड़क पार करने में उन्हें मदद की ज़रूरत पड़ी। कई गांवों से संपर्क टूटने, बिजली और और संचार व्यवस्था ठप होने की खबरें हैं।

उत्तराखंड के कई हिस्सों में बरसात मंगलवार से ही शुरू हो गई थी। लेकिन बुधवार को इसमें खासी तेजी आई। सोमवार तक राज्य में 64 सड़कें बंद थी लेकिन बुधवार को हुई बारिश से 60 अन्य सड़कें भी बंद हो गई। हालांकि दिनभर में लोक निर्माण विभाग की ओर से बंद में से 36 सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया गया। जिसके बाद राज्य में अभी भी 88 सड़कें बंद चल रही हैं। जिन पर यातायात शुरू करवाने की कोशिश में इस सड़कों को खोलने के प्रयास चल रहे हैं। सड़कें बंद होने से चारधाम यात्रा पर आए तीर्थ यात्रियों की भी मुश्किलें दोगुनी हो गईं है। सड़क बंद होने से कई यात्रियों को सड़क पर ही रात गुजारनी पड़ रही है।

राज्य में प्रमुख रूप से बंद सड़कों में थल-मुन्सयारी राज्य मार्ग, बडेथी-बद्रीगाड मोटर मार्ग, लम्बगांव-मोटना-रजाखेत-घनसाली मोटर मार्ग, हरिपुर-इच्छाड़ी- क्वानू-मीनस मोटर मार्ग, कालसी-चकराता मोटर मार्ग और चकराता-लाखामंडल मोटर मार्ग शामिल हैं। प्रशासन द्वारा बंद सड़कों को खोलने को युद्धस्तर पर कार्य किया गया है, ताकि यात्रियों की मुश्किल कम हो सके। लेकिन पर्वतीय जिलों में खराब मौसम बंद सड़कों को खोलने में बाधा बन रहा है। रुद्रप्रयाग जनपद के सोनप्रयाग और गौरीकुण्ड़ के पास मुनकटिया में पहाड़ी से मलवा आने के कारण वाहन मलवे में दबने की खबर है। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं। जबकि एक महिला की मौके पर मौत हुई है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ द्वारा रेस्क्यू किया जा रहा है। इस घटना के विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा है।

इधर कुमाउं मंडल के बागेश्वर में कई जगह भवनों के टूटने की भी खबरें हैं। कपकोट के असो में स्थित उपकेंद्र सीएचओ केंद्र, एएनएम सेंटर बारिश से ध्वस्त हो गया है। प्री मॉनसून की बरसात के दौर में ही कुमाउं में भी कई सड़कें प्रभावित या बंद हो गई हैं तो कई जगह बिजली सप्लाई ठप हुई है। नदियां उफान पर होने से जगह जगह डर, खतरा और आशंकाएं बनी हुई हैं। विधायक भी बारिश के हालात से दो चार हो रहे हैं। क्षेत्र के हालत जानने निकले कपकोट विधायक सुरेश गड़िया एक मलवे वाली सड़क पर गिरते गिरते बचे। पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग तहसील के पांखू के एक बरसाती नाले की चपेट में मोटर साइकिल बहने से बाइक सवार व्यापारी गणेश पाठक की मौके पर ही मौत हो गई। थल और बेरीनाग से पहुंची पुलिस व प्रशासनिक टीम ने शव का पंचायतनामा भरा।

बेरीनाग तहसील क्षेत्र के दशौली गांव निवासी 45 वर्षीय गणेश पाठक हल्द्वानी से सामान मंगाकर दुकानों में सप्लाई करते थे। पाठक बुधवार की सुबह गांव दशौली से पांखू आने के दौरान पांखू से दो किमी आगे कोटमन्या मार्ग पर देवी नाले में आए बरसात के पानी को चपेट में आ गए थे। नाले में उनकी बाइक बह गई। इस घटना में व्यापारी गणेश पाठक की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि तराई के उधमसिंह नगर जिले के सितारगंज में भी पर्वतीय क्षेत्र में हुई भारी बारिश का असर तराई में दिखने लगा है। नदियां उफनने के बाद सितारगंज क्षेत्र की कैलाश नदी में भी अचानक पानी बढ़ गया। जिससे पहाड़ी उकरौली गांव में करीब आधा दर्जन घरों में पानी भर गया। सूचना पर प्रशासन की टीम ने परिवारों को वहां से सुरक्षित स्थान पर भेजा। तहसीलदार जगमोहन त्रिपाठी ने लोगों से नदी के आसपास नहीं जाने की अपील की है। प्रशासन ने कहा कि बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोग नदियों और तेज बहाव वाले नालों से दूर रहें।

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